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आतिशबाजी : कार्बाइड गन से आंखों और चेहरे को गंभीर नुकसान का खतरा, हादसे हुए तो अस्पतालों में मिलेगा तत्काल उपचार

अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने जिला चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों में बर्न वार्ड की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में भर्ती बर्न इंजरी के मरीजों की प्रतिदिन समीक्षा होगी। पटाखों से जलने के अलावा आंख, हाथ-पैर, कान और धुएं से सांस संबंधी परेशानी के उपचार की व्यवस्था भी रखनी होगी।
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खंडवा

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Rajesh Patel

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Updated: 4 Nov 2026, 12:23 PM IST

emergency service

खंडवा : पटाखों से जलने के अलावा आंख, हाथ-पैर, कान और धुएं से सांस संबंधी परेशानी के उपचार की व्यवस्था भी रखनी होगी। फोटो-एआई

अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने जिला चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों में बर्न वार्ड की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में भर्ती बर्न इंजरी के मरीजों की प्रतिदिन समीक्षा होगी। पटाखों से जलने के अलावा आंख, हाथ-पैर, कान और धुएं से सांस संबंधी परेशानी के उपचार की व्यवस्था भी रखनी होगी।

अस्पतालों के बर्न वार्ड, बर्न यूनिट को पूरी तरह क्रियाशील

दीपावली पर पटाखों और आतिशबाजी से होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। बर्न इंजरी के मरीजों के उपचार के लिए जिला अस्पतालों के बर्न वार्ड और बर्न यूनिट को पूरी तरह क्रियाशील रखने को कहा गया है। अस्पतालों में 24 घंटे चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, जरूरी दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के अस्पतालों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

24 घंटे मिलेगी चिकित्सक सेवाएं

दीपावली पर पटाखों और आतिशबाजी से होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। बर्न इंजरी, आंखों और चेहरे पर चोट, हाथ-पैर जलने तथा धुएं से सांस संबंधी परेशानी के मरीजों के उपचार के लिए अस्पतालों में विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। जिला अस्पतालों के बर्न वार्ड और बर्न यूनिट को पूरी तरह क्रियाशील रखने के साथ 24 घंटे चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, जरूरी दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रहेंगे। कार्बाइड गन से होने वाले गंभीर हादसों को लेकर भी नागरिकों को जागरूक किया जाएगा। गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था रहेगी।

कार्बाइड गन से बच्चों को खतरा

स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से बनाई जाने वाली कार्बाइड गन को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। इसके विस्फोट से प्लास्टिक और धातु के छोटे टुकड़े आंख, चेहरे और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। एसीटिलीन गैस से जलने की घटनाएं भी हो सकती हैं। बच्चों और किशोरों की आंखों को स्थायी नुकसान और दृष्टिहानि का खतरा रहता है। नागरिकों को कार्बाइड गन और असुरक्षित आतिशबाजी से दूर रहने के लिए जागरूक किया जाएगा।

गंभीर मरीजों के लिए रेफरल व्यवस्था

गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजने से पहले प्राथमिक उपचार देकर स्थिति स्थिर की जाएगी। संबंधित अस्पताल को पहले सूचना देने के साथ रेफरल नोट में उपचार और जांच का पूरा विवरण दर्ज करना होगा। 108 एम्बुलेंस में ऑक्सीजन और जरूरी उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश हैं। जरूरत पड़ने पर कलेक्टर की अनुमति से मरीजों को दूसरे जिले या राज्य में भी भेजा जा सकेगा। अति गंभीर मरीजों के परिवहन के लिए एयर एम्बुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।