खंडवा

उपलब्धि : कोचिंग बंद हुई तो शुरु किया मत्स्य पालन… अब 90 लाख रुपए का कारोबार

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से नंदकिशोर पटेल मत्स्य उद्यमी बने गए। सुरगांव जोशी के नंद किशोर शुरुआत की। कोचिंग पढ़ाकर हर माह 40 हजार रुपए की आय से परिवार चलाते थे। कोरोना के दौरान कोचिंग बंद हो गई। गांव में मत्स्य पालन शुरू किया। और अब 90 लाख रुपए का टर्न ओवर पहुंच गया है।
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Sep 27, 2026
Fisheries
खंडवा : कोचिंग बंद होने से आय प्रभावित हुई तो मत्स्य पालन शुरू किया ।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से नंदकिशोर पटेल मत्स्य उद्यमी बने गए। सुरगांव जोशी के नंद किशोर शुरुआत की। कोचिंग पढ़ाकर हर माह 40 हजार रुपए की आय से परिवार चलाते थे। कोरोना के दौरान कोचिंग बंद हो गई। गांव में मत्स्य पालन शुरू किया। और अब 90 लाख रुपए का टर्न ओवर पहुंच गया है।

हर साल 70 टन मछली का उत्पादन

कोरोना ने रोजगार छीना तो सुरगांव जोशी के नंदकिशोर पटेल ने नया रास्ता तलाशा। कभी कोचिंग से हर महीने 40 हजार रुपए कमाने वाले पटेल ने महामारी के बाद मत्स्य पालन को व्यवसाय बनाया। सरकारी योजना से आर्थिक और तकनीकी मदद मिली। मेहनत और बेहतर प्रबंधन ने इस कारोबार को नई ऊंचाई दी। आज वे सालाना 70 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं। कारोबार का टर्नओवर 90 लाख रुपए तक पहुंच गया है। शुद्ध वार्षिक आय करीब 40 लाख रुपए है।

आय का जरिया बंद तो चुनी नई राह

कोरोना से पहले नंदकिशोर पटेल कोचिंग संचालन करते थे। महामारी के दौरान कोचिंग बंद हुई तो आय का जरिया भी खत्म हो गया। उन्होंने स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशीं। इसके बाद मत्स्य पालन शुरू करने का निर्णय लिया। तकनीकी जानकारी और आर्थिक सहायता के लिए मत्स्य विभाग से संपर्क किया।

14 लाख की इकाई, 40 प्रतिशत अनुदान

मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन में नंदकिशोर ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लिया। उन्होंने 14 लाख रुपए की लागत से 0.1 हेक्टेयर में बायोफ्लॉक इकाई स्थापित की। परियोजना पर 40 प्रतिशत शासकीय अनुदान मिला। इसके साथ ही 0.5 हेक्टेयर के तालाब में भी मत्स्य पालन शुरू किया। उन्नत मत्स्य बीज, संतुलित आहार और जल गुणवत्ता प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया।

छह महीने में 35 टन उत्पादन

नियमित तकनीकी देखरेख और बेहतर प्रबंधन से उत्पादन बढ़ा। वर्तमान में पटेल छह महीने में करीब 35 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं। इस तरह सालाना उत्पादन लगभग 70 टन हो गया है। इससे कारोबार का वार्षिक टर्नओवर 90 लाख रुपए तक पहुंच गया। शुद्ध आय करीब 40 लाख रुपए सालाना है। पटेल का कहना है कि योजना से मिली सहायता के बिना व्यवसाय शुरू करना मुश्किल था। सरकारी मार्गदर्शन और अनुदान ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।

फैक्ट फाइल

ऐसे समझें सफलता की कहानी

विवरण उपलब्धि

बायोफ्लॉक इकाई लागत 14 लाख

शासकीय अनुदान 40 %

वार्षिक उत्पादन 70 टन

वार्षिक टर्नओवर 90 लाख

शुद्ध वार्षिक आय 40 लाख

अतिरिक्त तालाब 0.5 हेक्टेयर

Updated on:
27 Sept 2026 12:07 pm
Published on:
27 Sept 2026 12:06 pm