
चालू शैक्षणिक सत्र में दस करोड़ से अधिक की स्कूलें जर्जर हो गई हैं। 384 प्राथमिक-माध्यमिक स्कूलों में छत टपक रही है। खिड़की, फर्श और दरवाजे टूटे हुए हैं। एक साल से 83 के काम अधूरे पड़े हुए हैं।
जिले में 384 स्कूलों में बारिश के दौरान बच्चों को पढऩे जैसी स्थिति नहीं है। मेजर मरम्मत योग्य की श्रेणी में होने से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। एक साल से 83 स्कूलों के मरम्मत कार्य पूर्ण नहीं हुए हैं। बारिश के दौरान स्कूलों की छत टपकने लगी है। वाटरप्रूफिंग के बाद भी क्लास में बच्चे और शिक्षक पानी से बचने कोने में बैठकर पढ़ने को विवश हैं। कुछ स्कूलों में तो बच्चों को एक साथ क्लास में बिठाया जा रहा है।
माध्यमिक शाला घासपुरा में क्लास 2 की छत टीन शेड की है। शुक्रवार को 15 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। बारिश के दौरान शेड के नट बोल्ट के होल से पानी टपक रहा है। क्लास के एक कोने में फर्श पर बैठकर बच्चे पढ़ने को विवश हैं। पूछने पर शिक्षिका ने बताया कि बारिश होने पर टीन शेड के होल से पानी टपकता है। सुधार के लिए निगम को सूचना दी गई है।
-क्लास 5 में 41 बच्चे टीन शेड की छत के नीचे फर्श पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षक प्राची गुप्ता ने बताया कि बारिश के दौरान टीन शेड की छत से पानी टपकता है। बच्चे फर्श पर बैठते हैं। बूंद-बूदं पानी टपकने से फर्श पर सीपेज होता है। बारिश में दिक्कत होती है। सुधार कराने की सूचना भेजी गई है।
अब्बास तैय्यब स्कूल परिसर में नालियां चोक होने से पूरे परिसर में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। यहां पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं चलती हैं। इसी परिसर में चार आंगनवाड़ी केंद्र संचालित होते हैं। जलभराव के कारण बच्चे भयभीत हैं। शिक्षकों का कहना है कि पाइप लाइन ऊपर होने के कारण जल निवासी प्रभावित हो गई है। इसकी जानकारी निगम व पार्षद को दी गई है।
माखनलाल चतुर्वेदी प्राथमिक शाला में बाउंड्रीवाल नहीं होने से स्कूल परिसर में मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। शुक्रवार को दोपहर के भोजन के समय आठ से अधिक मवेशी परिसर में पहुंच गए, जिससे बच्चों को खेलने की जगह नहीं मिली और वे भयभीत नजर आए। शिक्षिका स्मिता मिश्रा के अनुसार पशु कभी-कभी आते हैं।
घासपुरा, टपालचाल, शिवाजी चौक, पड़ावा, दादाजी वार्ड, सिघाड़तलाई , छिपा कॉलोनी, रामेश्वर वार्ड, हरसूद रोड, गणेश गंज में प्राथमिक व एक शाला परिसर की छत मरम्मत योग्य है। छिपा कॉलोनी में दो कमरों की फर्श मरम्मत योग्य है।
384 स्कूलों में मेजर मरम्मत योग्य ।
-83 स्कूलों में प्रचलन में मरम्मत कार्य।
-14 शहर में मरम्मत योग्य।
स्कूलों में टपकने जैसी स्थिति नहीं है। जहां ऐसी स्थित थी वहां पर वाटरप्रूफिंग करा दिया गया है। एक दो जगहों पर सूचना मिलने पर दूसरी कक्षा में शिफ्ट दिए गए हैं। मरम्मत योग्य स्कूलों के कार्य पूर्ण हो गए हैं। मेजर मरम्मत वाले स्कूलों का प्रस्ताव भेजा गया है।