
मां भगवती जगदम्बा आदिशक्ति की आराधना, भक्ति और साधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगा। आज घरों, पंडालो ओर देवी मंदिरों में घट स्थापना के साथ मां जगदंबा की आराधना कि जाएगी। मां शीतला संस्कृत पाठशाला गुरुकुल के आचार्य अंकित मार्कण्डेय ने बताया कि नवरात्र में मां गज हाथी पर विराजमान हो कर आएगी। भक्तों के दु:ख दूर करेगी।
नवरात्र पर कई शुभ योगों का अद्भुत संयोग बन रहा है जिसमें 14 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धियोग रहेगा, वहीं 18 ,19 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। आचार्य मार्कण्डेय के अनुसार वैसे मां दुर्गा का वाहन शेर है, पर नवरात्र में उनके पृथ्वी पर आगमन के लिए उनकी सवारी किस वाहन पर होगी, इसका निर्धारण नवरात्र के पहले दिन के वार को देख कर होता है। इस दिन रविवार है, अत: माता का आगमन हाथी यानी गज पर होगा। भारतीय धार्मिक परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, स्थिरता, शक्ति, वर्षा और समृद्धि का प्रतीक है।
पौराणिक मान्यता है कि माता के हाथी पर आगमन को आगामी दिनों के लिए सुख-समृद्धिदायी, अच्छी वर्षा, अन्न-धान्य की वृद्धि और जनकल्याण का शुभ संकेत माना जाता है। नौ दिवसीय नवरात्र साधना का समापन 19 अक्टूबर को महानवमी पर होगा। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु अपनी कुल परंपरा के अनुसार कुल देवी का पूजन, कन्या भोज, हवन और भंडारों का आयोजन करेंगे।
प्रात: 6.26 से 10.26 बजे तक ।
दोपहर अभिजित मुहूर्त
11.48 से 12.35 बजे तक
संतोषी माता वार्ड में ज्वाला देवी मित्र मंडल द्वारा माताजी की मूर्ति का आगमन उत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह मंडल का सातवां वर्ष है, जब माता रानी को सांवले स्वरूप में स्थापित किया जाएगा। आगमन उत्सव को देखने के लिए बड़ी संख्या में आसपास की कॉलोनियों के रहवासी भी पहुंचे। श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल दिखा। रात करीब नौ बजे आगमन उत्सव संपन्न होने के बाद देवी मूर्ति को सम्मानपूर्वक पंडाल में ले जाया गया। रविवार को घट स्थापना के साथ माता मूर्ति को विधि-विधान से विराजित किया जाएगा। मंडल द्वारा नौ दिन तक मां की आराधना के लिए गरबा उत्सव कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें भक्तजन शामिल होंगे।