जिले में एक तरफ जंगलों में कब्जे के लिए पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल रही तो दूसरी तरफ सागौन तस्कर जंगल को सफाया करने में लगे हुए हैं। मदनी सर्कल में सागौन के पेड़ों पर कुल्हाड़ी व इलेक्ट्रॉनिक कटर चल रही है। तस्कर पेड़ों का बाइक से परिवहन कर रहे हैं।
हरसूद वन परिक्षेत्र के मदनी सर्कल में सागौन से भरा जंगल हैं। सागौन के सीधे व लंबे पेड़ों पर तस्करों की बुरी नजर पड़ गई हैं। कुछ माह से यहां लगातार सागौन की तस्करी की जा रही हैं। पहले रात के समय ही तस्कर सागौन काटकर ले जाते थे लेकिन अब दिन में भी गांव से सागौन के लड्डे लेकर बाइक निकल रही हैं। एक बाइक पर दो तो किसी पर तीन गोल लड्ढे होते हैं। तस्करी बेखौफ होकर गांव के बीच से निकल रहे हैं। अब यहां सागौन तस्करी करने वालों की संख्या भी बढ़ गई हैं। बताया जाता है कि कुछ स्थानीय लोग भी सागौन की तस्करी में शामिल हैं।
कुल्हाड़ी व बैटरी से चलने बाले कटर मशीन का उपयोग सागौन को काटने में किया जा रहा हैं। कटर से अधिक आवाज नहीं होती और पेड़ आसानी से कम समय में कट जाता हैं। इसके लिए तस्कर कटर का अधिक उपयोग कर रहे हैं। पहले दिन सागौन के पेड़ को काटकर पटक देते हैं और दूसरे दिन पांच से चार फिट तक के टुकड़े कर इन्हें बाइक पर बांधकर ले जाते हैं। इन पर किसी तरह की रोक नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बड़े स्तर पर सागौन के पेड़ काटे जा रहे हैं। इनकी देखभाल व सुरक्षा में लगे कर्मचारी कभी इधर देखने तक नहीं आते हैं. कार्रवाई करना तो दूर की बात है।
जिले के जंगलों में उत्पन्न होने वाली सागौन उच्च क्वालिटी की हैं। इससे बनने वाले फर्नीचर और दरवाजे लोगों की पहली पसंद हैं। इसके साथ ही दरवाजे की चौखट में भी सागौन की लकड़ी की मांग हैं। ऐसे में तस्करों के लिए मदनी सर्कल से सागौन ले जाना सबसे आसान हो गया हैं। इसी तरह से देखा जाए तो शहर से लगे टिटगांव के पास जंगल से भी सागौन की तस्करी हो रही है। यहां से भी बाइक पर सागौन का अवैध रूप से परिवहन हो रहा है।
हरसूद के एसडीओ संदीप वास्कले ने बताया कि मदनी सर्कल में सागौन की तस्करी होने के संबंध में जानकारी मिली है। टीम को भेजकर कार्रवाई की जाएगी।