
स्वच्छ भारत मिशन 2.0 : नगरीय क्षेत्र के ट्रेचिंग ग्राउंड पर कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने की तैयारी है। तीसरी बार टेंडर में जयपुर की कंपनी को दिया ठेका दिया गया है। गीले कचरे का निस्तारण प्लांट चालू होने का इंतजार कर रहा है। नगरीय प्रशासन आयुक्त के निरीक्षण के दो माह बाद भी प्रोजेक्ट की रफ्तार सुस्त है। निगम की मॉनीटरिंग कमजोर है।
शहर के गीले कचरे से गैस और जैविक खाद बनाने के लिए नगर निगम ने 20 करोड़ रुपए की कंप्रेस्ड बायोगैस ( सीबीजी ) प्लांट परियोजना शुरू की। फरवरी 2026 में टेंडर निकाला। प्रक्रिया प्रक्रिया पूरी होकी है। आठ माह बीतने के बाद भी कार्य शुरू नहीं हो सका है। ट्रेचिंग ग्राउंड पर गीले कचरे के निस्तारण की व्यवस्था प्रभावित है। नगरीय प्रशासन एवं आवास विकास आयुक्त संकेत भोंडवे के निरीक्षण को भी दो माह बीत चुके हैं। बावजूद इसके परियोजना की प्रगति नहीं दिख रही। एक दिन पहले समीक्षा में निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत ने जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन परियोजना कब चालू होगी, इसकी स्पष्ट समय सीमा सामने नहीं आई है।
नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत सीबीजी सह एमआरएफ परियोजना के लिए करीब 20 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था। इसके लिए पहली बार जनवरी 2025 में टेंडर बुलाए गए। इसमें केवल एक कंपनी ने रुचि दिखाई। इसके बाद 6 मार्च 2025 को दोबारा टेंडर कॉल किया। इस बार भी एक ही टेंडर आया। तीसरी बार टेंडर फरवरी 2026 में फाइनल हुआ। जयपुर की बिजसन इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को ठेका दिया। निगम का दावा है कि 10 अगस्त 2026 को कार्य आदेश जारी हुआ है।
ट्रेचिंग ग्राउंड पर घरों से निकलने वाले सब्जियों, फलों और अन्य जैविक कचरे का निस्तारण कर गैस और खाद बनाने की योजना है। इसके लिए निगम ने ट्रेचिंग ग्राउंड का क्षेत्र भी बढ़ाया है। नए सीबीजी प्लांट से गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होना है। लेकिन प्लांट शुरू नहीं होने से इस व्यवस्था का लाभ शहर को नहीं मिल पा रहा है। पुराने प्लांट में जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया भी बंद पड़ी है। ऐसे में गीले कचरे के निस्तारण की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
निगम के अनुसार, सीबीजी प्लांट पूरी तरह स्वचालित होगा। इसमें गीले कचरे से बायोगैस तैयार की जाएगी। इसके बाद गैस को शुद्ध कर कंप्रेस्ड बायोगैस के रूप में संग्रहित किया जाएगा। इस गैस का इस्तेमाल सीएनजी वाहनों में किया जा सकेगा। कचरे से जैविक खाद भी तैयार होगी। इससे कचरे का निस्तारण होने के साथ उपयोगी संसाधन भी मिलेंगे। लेकिन फिलहाल ये फायदे योजना तक ही सीमित हैं।
परियोजना की जिम्मेदारी और उसकी प्रगति की निगरानी नगर निगम के स्तर पर की जानी है। इसके बावजूद छह माह बाद भी काम शुरू नहीं होने से मॉनीटरिंग कमजोर है। नगरीय प्रशासन आयुक्त के निरीक्षण के बाद भी काम में तेजी नहीं आई। निगम आयुक्त ने समीक्षा में जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित कंपनी कब काम शुरू करती है और शहर को गीले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की सुविधा कब मिलती है।
परियोजना की लागत : 20 करोड़ रुपए।
पहली बार टेंडर : जनवरी 2025।
दूसरी बार टेंडर : 6 मार्च 2025।
तीसरी बार टेंडर फरवरी 2026 में फाइनल :
इनका कहना : राधेश्याम उपाध्याय, कार्यपालन यंत्री, ननि
कार्य आदेश जारी है। काम प्रारंभ करने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द कार्य शुरू हो जाएगा।