खंडवा

पिता ही निकला कातिल, बाल-चमड़ी-हड्डियों के डीएनए ने दिलाई दोहरी उम्र कैद, मासूमों के सीने पर पत्थर पटककर हत्या

जिस पिता के कंधों पर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही उनका हत्यारा निकला। पत्नी से विवाद और मानसिक तनाव में अंधे होकर जादू ने अपने ही दो मासूम बच्चों को जंगल में ले जाकर मौत के घाट उतार दिया। सीने पर भारी पत्थर पटककर की गई इस निर्मम हत्या के बाद आरोपी ने कपड़े जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की और पुलिस को गुमराह करता रहा। तीन दिनों तक पुलिस जंगलों में भटकती रही, लेकिन आखिरकार डीएनए रिपोर्ट ने आरोपी पिता को ताउम्र के लिए जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। मंगलवार को न्यायालय प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने फैसला देते हुए दोषी पाए गए पिता को दोहरी उम्र कैद से दंडित किया है।

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Jan 21, 2026

अभियोजन की ओर से प्रकरण का संचालन उप निदेशक अभियोजन त्रिलोक चंद बिल्लौरे द्वारा किया गया। अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी एडीओपी हरिप्रसाद बांके ने बताया गया कि जादू पिता लिमड़ा बारेला (35) निवासी ग्राम लालमाटी बिलूद की पत्नी सिंदूबाई विवाद होने पर वह अपने मायके अंबाखेड़ा चली गयी थी। जादू अपने दोनों बच्चे अरुण (5) और सुनीता (3) की परवरिश कर रहा था। वह अपनी पत्नी के मायके जाने पर गुस्सा था। इसके साथ ही बच्चों को लेकर परेशान था।

घर अकेले आने पर हुआ था शक

5 मार्च 2023 को दोपहर करीब 1.30 बजे जादू बाइक से दोनों बच्चों को बैठाकर ग्राम अंबाखेडा निकला था। इसी दिन शाम में करीब 4 बजे वह बाइक से वापस घर आया। उसी दिन शाम 4 बजे वह अकेला घर आया तो साथ में दोनों बच्चे नहीं थे। इस पर आसपास के लोगों ने व रिश्तेदारों को शंका भी हुई, फिर उन्हें लगा की बच्चों को वह उनकी मां के पास ग्राम अंबाखेड़ा छोड़ आया होगा, लेकिन अगले दिन सोमवार को पता चला की बच्चे उनकी मां के पास नहीं पहुंचे। मामा गोपाल ने दो दिन तक जब बच्चों को कहीं पता न चलने पर पंधाना थाने में उनके अपहरण का केस दर्ज करवाया था।

पूछताछ में कबूली थी हत्या

इस मामले में तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी बलराम राठौर और बोरगांव चौकी प्रभारी आरपी यादव ने बच्चों के पिता जादू से पूछताछ की। उसने बताया था कि दोनों बच्चों को मंदिर में पूजा करने का बोलकर जंगल ले गया था। उसने सुनसान जगह देखकर दोनों बच्चों के सिने पर पत्थर मारकर हत्या कर दी थी। दोनों के शव एक साथ रखकर पत्तों से छुपा दिए थे। इसके बाद घटना के समय पहने अपने कपड़े जला दिए थे।

लोगों से मांगकर खाया खाना

निरीक्षक बलराम राठौर और एसआइ रामप्रकाश यादव आरोपी जादू को लेकर ग्राम इटारिया के पास खामपानी के जंगल में भटके रहे। आरोपी द्वारा गुमराह किए जाने से तीन दिनों तक जंगल में रहकर ग्रामीणों से खाना मांगकर खाया। सख्ती से पूछताछ करने के बाद बालक का शव बरामद हुआ था, वहीं बालिका के शव को जंगली जानवर खा गए थे। शव की पहचान के लिए दो हड्डियां मिली थी। पुलिस ने इस मामले में डीएनए परीक्षण करवाया था। इस मामले में निरीक्षक राठौर व एसआइ यादव की विशेष भूमिका रही।

Published on:
21 Jan 2026 12:13 pm
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