-शाम में माता को पिलाया पानी, किया विसर्जन, कई समाजों ने बौड़ाए रथ -मारवाड़ी समाज में 16 दिवसीय गणगौर पर्व का विसर्जन के साथ समापन -तीन दिन तक चलेगा निमाड़ के लोक उत्सव का उल्लास
निमाड़ में आस्था और आगाध श्रद्धा का लोक पर्व गणगौर का उल्लास चारों ओर छाया हुआ है। आठ दिनों से बाडिय़ों में ज्वारों की पूजा अर्चना के बाद चैत्र शुक्ल तीज को बाडिय़ां श्रद्धालुओं के लिए खोली गई। शनिवार को बाडिय़ां खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ी। धनियर राजा, रणुबाई के रथों के साथ श्रद्धालु बाडिय़ों में पहुंचे और पूजन के बाद ज्वारों को घर ले गए।
एक दर्जन से अधिक बाडिय़ां खुली
शनिवार शहर में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर माता की बाडिय़ां खुली। सुबह से ही बाडिय़ों के बाहर लंबी कतार दर्शन, पूजन के लिए लगी। नंगे पैर, सिर पर रणुबाई, धनियर राजा के रथों को सजाकर श्रद्धालु बाडिय़ों में पहुंचे। पूजा अर्चना के बाद रणुबाई और धनियर राजा के साथ माता के ज्वारों को शिरोधर्य कर ले जाया गया। शहर के कहारवाड़ी, पड़ावा, ब्राह्मणपुरी, गुरवा मोहल्ला, संजय नगर, गणेश तलाई, शिवाजी नगर, शिवाजी नगर, बड़ा अवार, छोटा अवार सहित अन्य स्थानों पर बाडिय़ों में दोपहर तक पूजा-अर्चना का दौर चला।
भंडारे के बाद किया विसर्जन
शाम को रथों को पानी पिलाने पार्वतीबाई धर्मशाला ले जाया गया। यहां कई समाजों द्वारा माता को पानी पिलाने के बाद विसर्जन किया गया। मारवाड़ी, ब्राह्मण, मारवाड़ी खंडेलवाल, माहेश्वरी समाज सहित अन्य समाजों में चल रही 16 दिवसीय गणगौर पर्व का समापन भी हुआ। मारवाड़ी समाज की युवतियों और महिलाओं द्वारा नम आंखों से माता को विदाई दी। आयोजन के समापन पर दुबे कॉलोनी में भंडारे का आयोजन किया गया। शाम 7 बजे माता को विसर्जन के लिए पार्वतीबाई धर्मशाला लाया गया। युवतियों द्वारा झालरिय दिए गए, विधि विधान से ज्वारों का विसर्जन किया। इस दौरान ख़ुशी अग्रवाल, साक्षी दशोरे, प्रिया अग्रवाल, सलोनी अरझरे, प्राची शर्मा, अर्शिता वर्मा, सोनल सैनी, इशिका वर्मा, साक्षी वर्मा, अरुणा नारायण अरझरे, ममता संजय सेन, विनीता रूपेंद्र सेन आदि उपस्थित रहे।
ज्वार की रोटी, अमाड़ी की भाजी का लगेगा भोग
गुरव समाज और कहार समाज द्वारा रथों को घर लाने के साथ ही भजनों के साथ रात जागरण हुआ। कहारवाड़ी स्थित गुरव समाज के गुरवेश्वर शिव मंदिर में तीन दिन तक आयोजन चलेगा। रविवार को माता को ज्वार की रोटी, अमाड़ी की भाजी और कच्ची कैरी की चटनी का भोग लगाया जाएगा। गुरव समाज, कहार समाज और मांझी समाज द्वारा सोमवार को सार्वजनिक भंडारे का आयोजन भी होगा।
ज्वार की रोटी, अमाड़ी की भाजी का लगेगा भोग
गुरव समाज और कहार समाज द्वारा रथों को घर लाने के साथ ही भजनों के साथ रात जागरण हुआ। कहारवाड़ी स्थित गुरव समाज के गुरवेश्वर शिव मंदिर में तीन दिन तक आयोजन चलेगा। रविवार को माता को ज्वार की रोटी, अमाड़ी की भाजी और कच्ची कैरी की चटनी का भोग लगाया जाएगा। गुरव समाज, कहार समाज और मांझी समाज द्वारा सोमवार को सार्वजनिक भंडारे का आयोजन भी होगा।