
बारिश के दौरान नदियों के पानी में सामान्य दिनों की तुलना में 150 गुना से अधिक टर्बिडिटी ( पानी में मिट्टी के कण ) बढ़ गई है। फिल्टर प्लांट में पहुंच रहे सुक्ता नदी के पानी में 800-1500 एनटीयू ( नेफेलोमेट्रिकटर्बिडिटी यूनिट यानी मिट्टी के कणों को मापने वाली इकाई ) मिट्टी के कण मिला है। जबकि सामान्य दिनों अप्रेल व मई में नदी का पानी 10-25 एनटीयूटर्बिडिटी रहती है।
जसवाड़ी फिल्टर प्लांट में सुक्ता नदी के सफाई के बाद 0.9 एनटीयूटर्बिडिटी हो गई। प्लांट से 0.9 एनटीयू जलापूर्ति का दावा किया जा रहा है। जबकि फिल्टर प्लांट की तुलना में शहर में हो रही सप्लाई में टर्बिडिटी 2-3 गुना अधिक है। शहर में 3 से 4 टर्बिडिटी वाला पानी पहुंच रहा है। पीने योग्य पानी का मानक 1 से 5 एनटीयूटर्बिडिटी का है।
महापौर और एमआईसी की टीम के जांच के दौरान चारखेड़ा से पंप में आ रहे पानी की गुणवत्ता परखी गई। जिसमें टर्बिडिटी 3 एनटीयू मिली। टीम जसवाड़ी फिल्टर प्लांट पहुंची। यहां जांच में 0.9 एनटीयूटर्बिडिटी मिली है। दोनों फिल्टर प्लांटों के बीच पानी की टर्बिडिटी में 2 एनटीयू का अंतर है।
प्लांट के लैब रिपोर्ट में टर्बिडिटी ( मिट्टी मिक्स पानी ) 0.9 एनटीयू दर्ज है। जबकि मानक 1 से 5 एनटीयू तक है। पीएच स्तर 7.6 है। जिसका 6.5 से 8.5 मानक होता है। टीडीएस 270 मिलीग्राम / लीटर मिला है। जबकि स्वीकार्य सीमा 500 से 2000 मिलीग्राम /लीटर है। प्लांट में 80 पीपीएम फिटकरी और 50 पीपीएम चूने का एक्सपेरिमेंट किया गया। 5 पीपीएम और 8 पीपीएम क्लोरीन का उपयोग किया गया। स्वच्छ जल में अवशिष्ट क्लोरीन की मात्रा 0.2 मिलीग्राम / लीटर पाई गई है। जो न्यूनतम आवश्यक स्तर को पूरा करती है।
महापौर अमृता यादव ने एमआईसी सदस्यों के साथ सिविल लाइंस पंप और जसवाड़ी फिल्टर प्लांट में पानी की गुणवत्ता का फैक्ट चेक किया। सिविल लाइंस पंप में पानी में टीडीएस, पीएच और टर्बिडिटी का फैक्ट किया। सिविल लाइंस में पानी में पीएच 7 मिला। शुद्ध पानी का मानक स्तर 6.5 से 8.9 पीएच होता है। इस दौरान एमआईसी सदस्य राजेश यादव व विक्की बावरे ने एक-एक गिलास पानी पीकर शुद्धता परखी। टीम ने नदी से आने वाले मटमैले पानी की सफाई का वैज्ञानिक पद्धति देखी।