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गुरु पूर्णिमा… खंडवा के दादाजी धाम में बस भगवान के चरणों में अर्पित हो जाए निशान, ये ही अभिलाषा

-मंदिर निर्माण के चलते इस बार निशान परिक्रमा कराना मुश्किल -निशान ला रहे भक्तों ने कहा -निशान चढ़ाना महत्वपूर्ण, परिक्रमा जरूरी नहीं -पांडुर्ना, गुमगांव, छिंदवाड़ा, सौंसर, बैतूल, भैंसदेही से आ रहे निशान
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खंडवा

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Manish Arora

Jul 10, 2026

Guru Purnima

खंडवा. पांडुर्ना का 40 वर्ष पुराना निशान प्रमोद टेटे के नेतृत्व में मुलतई तक पहुंच चुका है।

श्री दादाजी धाम में गुरु पूर्णिमा पर्व को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। इस बार मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य के कारण वर्षों से चली आ रही निशानों की परिक्रमा नहीं हो सकेगी। हालांकि श्रद्धालुओं की आस्था पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। दूर-दूर से आने वाले भक्तों का कहना है कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण भगवान दादाजी के श्रीचरणों में निशान अर्पित करना है, परिक्रमा होना या नहीं होना गौण है।

सैकड़ों किमी दूर से नंगे पैर पैदल आ रहे भक्त

गुरु पूर्णिमा पर हर वर्ष मप्र और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पैदल नंगे पैर निशान लेकर दादाजी धाम खंडवा पहुंचते हैं। इस बार भी पांढुर्ना, गुमगांव, छिंदवाड़ा, सौंसर, बैतूल और भैंसदेही सहित कई स्थानों से निशान यात्रा निकल चुकी है। मंदिर निर्माण के चलते दोनों समाधि मंदिर के पीछे नींव का काम चल रहा है। जिसके चलते इस बार समाधि मंदिर की परिक्रमा करा पाने में ट्रस्ट असमर्थ है। ट्रस्ट द्वारा निशान लेकर आ रहे श्रद्धालुओं से संपर्क कर उन्हें खंडवा धाम की परिस्थितियों के बारे में बताकर समझाइश दी जा रही है। निशान लेकर आ रहे भक्त भी मान रहे है कि मंदिर निर्माण जरूरी है, इसलिए वें भी ट्रस्ट के सहयोग में आगे आकर सिर्फ दादाजी के चरणों में निशान अर्पित करने की बात कह रहे हैं।

बस भगवान के चरणों में अर्पित हो निशान

बैतूल बाजार से सबसे पुराने निशान के साथ आने वो पार्थ जोशी ने बताया कि हम हर वर्ष निशान लेकर दादाजी के दरबार आते हैं। इस बार परिक्रमा नहीं होगी, लेकिन भगवान के चरणों में निशान अर्पित करना ही हमारे लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है।

मंदिर निर्माण हो रहा इसकी खुशी है

पांडुर्ना से पिछले 11 साल से निशान लेकर आ रहे मनोज गुडधे ने बताया कि मंदिर निर्माण भी सेवा का ही कार्य है, इससे सबको बेहद खुशी है। थोड़ी असुविधा स्वीकार है, क्योंकि भविष्य में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

दादाजी का आशीर्वाद प्राप्त हो

पांडुर्ना से निशान लेकर निकल चुके जगदीश पराडकर ने बताया कि वें 10 साल से निशान ला रहे हैं। हमारी श्रद्धा परिक्रमा से नहीं, समर्पण से जुड़ी है। दादाजी के चरणों में निशान चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त करना ही हमारी यात्रा का उद्देश्य है।

430 किमी नंगे पैर पैदल ला रहे निशान

महाराष्ट्र के भरतपुरा-नांदा उमरी तहसील सावनेर से नर्मदा परिक्रमा वासी बाड़ू महाराज (नागपुर) के सानिध्य में 30 श्रद्धालुओं का जत्था निशान ला रहा है। यात्रा का नेतृत्व यश गुगल एवं मयूर बोबडे निशान लेकर कर रहे हैं। करीब 430 किलोमीटर की यह पदयात्रा श्रद्धालु नंगे पांव कर रहे हैं। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया जा रहा है। यह जत्था 28 जुलाई को खंडवा धाम पहुंचकर धूनीवाले श्री दादाजी महाराज के चरणों में निशान अर्पित करेगा। जत्थे में 20 पुरुष और 10 महिलाएं शामिल है।