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ओंकारेश्वर : चलित प्रस्ताव अवैध…न्यास की 200 करोड़ की भूमि निजी संस्था को देने की तैयारी

ओंकारेश्वर मंदिर न्यास की 10.00 हेक्टेयर ( 24.70 एकड़ ) भूमि आवंटन में गंभीर विधिक अनियमितता किए जाने का मामला सामने आया है। मामले में जिपं अध्यक्ष ने शासन और कलेक्टर को पत्र भेजकर चलित प्रस्ताव निरस्त करने की मांग करते हुए विधिक जांच कराने पत्र भेजा है।
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खंडवा

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Rajesh Patel

Jul 09, 2026

omkareshwar

खंडवा. ओंकारेश्वर।

ओंकारेश्वर मंदिर न्यास की 10.00 हेक्टेयर ( 24.70 एकड़ ) भूमि आवंटन में गंभीर विधिक अनियमितता किए जाने का मामला सामने आया है। मामले में जिपं अध्यक्ष ने शासन और कलेक्टर को पत्र भेजकर चलित प्रस्ताव निरस्त करने की मांग करते हुए विधिक जांच कराने पत्र भेजा है।

जिपं अध्यक्ष ने पत्र में चलित प्रस्ताव को बताया अवैध

जिला पंचायत अध्यक्ष और ओंकारेश्वर मंदिर न्यास की पदेन न्यासी पिंकी सुदेश वानखेड़े ने ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग मंदिर न्यास की बहुमूल्य भूमि के अवैध आवंटन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश शासन और कलेक्टर खंडवा को पत्र लिखकर ग्राम मोरघड़ी की 10.00 हेक्टेयर कृषि भूमि एक निजी समिति को सौंपने हेतु जारी ' चलित प्रस्ताव ' ( क्रमांक ओ/2025/54) को तत्काल निरस्त करने और इसकी विधिक जांच कराने की मांग की है।

' चलित प्रस्ताव ' का कोई विधिक प्रावधान नहीं

जिपं अध्यक्ष वानखेडे ने अपने पत्र में कहा है कि मध्य प्रदेश लोक न्यास अधिनियम के अंतर्गत भूमि आवंटन या संपत्ति हस्तांतरण जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए ' चलित प्रस्ताव ' का कोई विधिक प्रावधान नहीं है। उन्होंने इस पूरी कार्यवाही को पूर्णतः अवैध और विधि-विरुद्ध बताया है। उनकी मुख्य आपत्तियों में कलेक्टर न्यायालय के विधिवत न्यायिक आदेश और ' मत ' का अभाव, लीज की अवधि, वार्षिक लीज और प्रीमियम राशि जैसी अनिवार्य शर्तों का उल्लेख न होना शामिल है। पत्र में यह भी बताया गया है कि आवंटित की जाने वाली 10.00 हेक्टेयर भूमि की ' चतुर्सीमा ' या पृथक नक्शा प्रस्ताव के साथ संलग्न नहीं है, जिससे भविष्य में अतिक्रमण और विधिक विवादों की आशंका बढ़ सकती है।

डॉकट्रिन ऑफ पब्लिक न्यास नियम का उल्लंघन

जिपं अध्यक्ष वानखेड़े ने चलित प्रस्ताव को ' डॉकट्रिन ऑफ पब्लिक न्यास ' का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंदिर की संपत्ति का न्यासी होने के नाते इसकी विधिक रक्षा प्राथमिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने प्रबंधक न्यासी की भूमिका की जांच कराने और भविष्य में संपत्ति संबंधी समस्त निर्णय अधिनियम में वर्णित विधिक प्रक्रियाओं और न्यायालयीन आदेशों के पालन के बाद ही करने के निर्देश देने की मांग की है। यह पत्र दिनांक 6 जुलाई 2026 को जारी किया गया है।

सार्वजनिक न्यास और संपत्ति के नियम

-सार्वजनिक न्यास अधिनियम मंदिरों की संपत्तियों को विधि-सम्मत तरीके से संरक्षित करने के लिए बना है। न्यास की अचल संपत्ति का कोई भी आवंटन या हस्तांतरण पारदर्शिता के साथ, सार्वजनिक सूचना, खुली निविदा और विधिवत न्यायिक आदेशों के बाद ही किया जा सकता है। ' चलित प्रस्ताव ' जैसी प्रक्रियाएं, यदि अधिनियम में वर्णित न हों, तो न्यास के आर्थिक हितों और सार्वजनिक विश्वास का उल्लंघन करती हैं। इन संपत्तियों का उपयोग जनहित में सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

ऐसे समझें 200 करोड़ से अधिक कीमत

ओंकारेश्वर तीर्थ धार्मिक नगरी का कॉरिडोर बन रहा है। 2028 में सिंहस्थ को देखते ही सीमावर्ती राज्यों के लोग और पूंजीपतियों ने भूमि क्रय कर लिया है। ओंकारेश्वर क्षेत्र में भूमियों की रजिस्ट्रियां अधिक होने से कलेक्टर गाइडलाइन से बाजार मूल्य चार गुना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मोरधड़ी में सड़क के किनारे भूमि की कीमत प्रति एकड़ करीब 10 करोड़ रुपए हो गई है। कृषि योग्य भूमि आठ सात करोड़ रुपए है। इस औसत 25 एकड़ भूमि की कीमत 200 करोड़ रुपए होती है। हालांकि कलेक्टर गाइड लाइन और बाजार मूल्य में अंतर है। इससे कीमत कम भी हो सकती है।