ईरान, इजराइल युद्ध का असर भारत में तेजी से असर करने लगा है। आयात-निर्यात प्रभावित होने से बाजार में 4 लाख टन गेहूं का निर्यात होगा प्रभावित हो जाएगा। इसकी सूचना से मंडी में 400-500 रुपए क्विंटल भाव गिर गए हैं। समर्थन मूल्य पर खरीदी भी अभी शुरू नहीं हुई इै।
ईरान, इजराइल युद्ध का असर भारत में तेजी से असर करने लगा है। आयात-निर्यात प्रभावित होने से बाजार में 4 लाख टन गेहूं का निर्यात होगा प्रभावित हो जाएगा। इसकी सूचना से मंडी में 400-500 रुपए क्विंटल भाव गिर गए हैं। समर्थन मूल्य पर खरीदी भी अभी शुरू नहीं हुई इै।
खाड़ी युद्ध का असर अब सीधे खेत, खलिहान और मंडी तक पहुंच गया है। किसान, व्यापारी और उपभोक्ताओं तक हर कोई इसकी मार झेल रहा है। फसल उत्पादन में उपयोग होने वाली डीएपी-यूरिया को छोड़कर केमिकल फर्टिलाइजर 15-20 % महंगे हो गए हैं। यही नहीं आयात-निर्यात प्रभावित होने से खाद-बीज, अनाज और पैकिंग पर दबाव बढ़ा गया है।
आयात-निर्यात का असर अब कीटनाशक दवाओं पर भी शुरू हुआ हैं। केमिकल और अन्य सामग्री नहीं आने से कंपनियां भाव में वृद्धि करने की तैयारी की है। कीटनाशक विक्रेताओं को आहट है कि कंपनियां जुलाई में कीटनाशक का भाव भी 15 से बीस फीसदी बढ़ाकर देंगे। क्योंकि खाद-बीज और कीटनाशक में गैस व केमिकल का उपयोग है। दोनों आयात पर निर्भर है।
खाद-बीज कारोबारी आशीष भंसाली बताते हैं कि डीएपी और यूरिया को छोड़कर अन्य केमिकल फर्टिलाइजर 15 से 20 प्रतिशत महंगे हो गए हैं। इसका असर सीधे दो लाख से अधिक किसानों पर पड़ेगा। भंसाली ने बताया कि युद्ध के दौरान पोटाश की कीमत 1820 से बढ़कर 1950 रुपए हो गई है, जबकि 12-32-16 का भाव 1950 से बढ़कर 2250 रुपए तक पहुंच गया है।
कीटनाशक दवाएं भी 15 फीसदी महंगी हो गई हैं। जुलाई में आने वाला नया स्टॉक बढ़ी हुई दरों पर ही उपलब्ध होगा। इससे किसानों की लागत बढ़ेगी और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
मंडी के कारोबारी राजेंद्र अग्रवाल के अनुसार अनाज बाजार में भी स्थिति बदली है। निमाड़ की मंडियों से हर साल करीब करीब चार लाख टन से ज्यादा गेहूं का विभिन्न देशों में निर्यात होता है। मंडी में युद्ध के पहले 2800 रुपए क्विंटल बिकने वाला गेहूं अब 1900 से 2200 रुपए में बिक रहा है। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है और व्यापारियों को भी निर्यात बंद होने से घाटा उठाना पड़ रहा है।
पैकिंग सामग्री भी महंगी हो गई है। प्लास्टिक का दाना न आने से बोरी की कीमत 12-15 रुपए से बढ़कर 22-25 रुपए हो गई है। जूट की बोरी भी 18-20 रुपए से बढ़कर 28-30 रुपए तक पहुंच गई है। इससे अनाज की पैकिंग लागत बढ़ गई है, जिसका असर सीधे बाजार भाव पर पड़ेगा।
ईरान, इजराइल युद्ध का असर भारत में तेजी से असर करने लगा है। आयात-निर्यात प्रभावित होने से बाजार में 4 लाख टन गेहूं का निर्यात होगा प्रभावित हो जाएगा। इसकी सूचना से मंडी में 400-500 रुपए क्विंटल भाव गिर गए हैं। समर्थन मूल्य पर खरीदी भी अभी शुरू नहीं हुई इै।
पैकिंग सामग्री भी महंगी हो गई है। प्लास्टिक का दाना न आने से बोरी की कीमत 12-15 रुपए से बढ़कर 22-25 रुपए हो गई है। जूट की बोरी भी 18-20 रुपए से बढ़कर 28-30 रुपए तक पहुंच गई है। इससे अनाज की पैकिंग लागत बढ़ गई है, जिसका असर सीधे बाजार भाव पर पड़ेगा।