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पवित्र गुरुवार… प्रभु येसु के अंतिम भोज को याद कर 12 लोगों के पैर धुलाकर दिया प्रेम का संदेश

-इसाई समाज नें मनाया पवित्र गुरुवार, आज गुड फ्राइडे पर निकलेगी क्रूस यात्रा

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खंडवा

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Manish Arora

Apr 03, 2026

Holy Thursday

खंडवा. प्रभु येसु को याद करते हुए आमजन के पैर धुलाते मुख्य याजक।

इसाई समाज नें 2 अप्रैल को पवित्र गुरुवार मनाया। इस अवसर पर सेंट मेरीस गिरजाघर में विशेष प्रार्थना की गई। पुण्य गुरुवार इसाई समुदाय का सबसे पवित्र त्योहार माना जाता है। प्रभु येसु ने अंतिम भोज के दौरान 12 शिष्यों के पैर धुलाकर प्रेम का संदेश दिया था। इसी को याद करते हुए मुख्य याजक फादर जान विक्टर ने 12 आमजन के पैर धुलाए और मिस्सा बलिदान चढ़ाई।

दो महत्वपूर्ण संस्कारों की हुई थी स्थापना
खडंवा डायोसिस के फादर रॉबिनसन ने बताया कि गुरुवार का विशेष महत्व है। इस दिन प्रभु यीशु मसीह नें दो महत्वपूर्ण संस्कारों परम प्रसाद एवं पुरोहिताई संस्कार की स्थापना की थी। मुख्य याजक फादर जान विक्टर के साथ फादर मैथ्यू, फादर देवानंद, फादर सुजीन, फादर नीलकंठ, फादर मानू ने 12 आमजन के पांव धोकर प्रभु येसु के विनम्रता के इस उदाहरण को याद किया। इसके बाद परम प्रसाद की स्थापना की गई।

प्रभु येसु के दु:ख भोग का स्मरण किया
मिस्सा बलिदान के बाद सभी विश्वासियों ने शाम 8 से रात्रि 12 बजे तक प्रार्थना एवं प्रभु येसु के दु:खभोग का स्मरण किया। इसाई समाजजनों ने भोज में दाखरस व रोटी को ग्रहण किया। फादर रॉबिनसन ने बताया कि प्रेम और अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले प्रभु येसु को गुड फ्राइडे के दिन ही सूली पर लटका दिया गया था। उनकी याद में दु:ख और गम के प्रतीक के रूप में गुड फ्राइडे शुक्रवार को मनाया जाएगा। दोपहर 1 बजे से क्रूस यात्रा का आयोजन होगा। दोपहर 1 बजे दु:ख भोग का स्मरण, प्रार्थना और कू्रस की उपासना होगी। इस मौके पर विशेष प्रार्थना सभाएं भी होंगी।

एक दूसरे से प्यार करने का दिया संदेश
पवित्र गुरुवार प्रभु येसु मसीह के अंतिम भोज को चिह्नित करता है, जहां अपनी मृत्यु के पहले प्रभु यीशु ने अपनें शिष्यों के साथ भोजन किया। इसी भोज में रोटी के रूप में अपना शरीर तथा दाखरस के रूप में रक्त चढ़ाया था। इसी दिन येसु ने अपने शिष्यों के साथ अंतिम भोजन करते समय विनम्रता का परिचय देते हुए अपने 12 शिष्यों के पैर धोए और उन्होंने कहा, मैंने तुम्हारे प्रभु और गुरु होकर पैर धोए तो तुम भी एक दूसरे के साथ ऐसा ही करें, यानी एक दूसरे से प्यार करें। इस धर्मविधि को विशेष रूप से चर्च में पवित्र गुरुवार को प्रतीक स्वरूप दोहराया गया।