
पत्रिका `अमृतमजलम` अभियान के तहत धार्मिक और प्राचीन धरोहर रामेश्वर कुंड का जल स्रोत चकाचक हो गया। यह सभी सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं के साझा प्रयास से हुआ। निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत ने कहा कि धार्मिक व प्राचीन स्थल को 2.60 करोड़ रुपए से विकसित किए जाने का कार्य शुरू हो गया है।
पत्रिका ने कुंड के जलस्रोत की सफाई का संकल्प लिया। जिला प्रशासन, नगर निगम और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पत्रिका अमृतमजलम` अभियान के तहत कुंड की सफाई शुरू की। पत्रिका ने कुंड की सफाई का अभियान 24 मई को शुरू किया था। 14 जून को धार्मिक एवं प्राचीन धरोहर का कुंड सामूहिक श्रमदान से चकाचक हो गया। इस रविवार को पत्रिका अमृतम्जलम और इम्पीरिकल शिक्षा अभियान के प्रतियोगी छात्रों के भगीरथ प्रयास से जलस्रोत साफ हुआ। और कुंड की सीढि़यां चमकने लगी।
इम्पीरिकल शिक्षा अभियान के संचालक राहुल गीते, जयराम मालाकार ने विभिन्न प्रतियोगिताओं की तैयारी करने वाले छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्रों ने दो अलग-अलग रविवार को सामूहिक श्रमदान किया। इस दौरान ज्योति दिलावरे, कल्पना तंवर, रितिका वर्मा, अलीना शेख, गौरी कछाया, खुशबू पटेल, कनक मालाकार, खुशी चौहान, मनीष मालाकार, सागर राजपूत, कृष्णा मालाकार, मयूर कौशल, सुमित, यश वर्मा, दिलीप दिलावरे समेत अन्य रहे।
पत्रिका अमृतमजलम और इम्पीरिकल शिक्षा अभियान के संयुक्त अगुवाई में सामूहिक श्रमदान किया गया। इस दौरान प्रतियोगी छात्रों ने शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण और स्वास्थ्य को बेहतर करने का संकल्प लिया है। इस दौरान इम्पीरिकल के संचालक राहुल गीते ने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई।
नगर सरकार ने धरोहर को 2.60 करोड़ रुपए की लागत से विकसित करने का काम शुरू कर दिया गया है। नगर निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत ने बताया कि धार्मिक और प्राचीर धरोहर को विकसित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। पत्रिका और जल गंगा सर्वंधन अभियान रंग लाया। इस प्राचीन कुंड के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए 2.60 करोड़ रुपए का टेंडर होने के बाद कार्य शुरू हो गया है।
राहुल गीते, शिक्षक : पत्रिका का सराहनीय कदम है। इम्पीरिकल के प्रतियोगी छात्रों के साझा प्रयास से प्रयास रंग लाया। प्रतियोगी छात्राओं के हौंसले से जलस्रोत साफ हुआ। हमें इससे प्रेरित होकर जल संरचनाओं को संरक्षित करना होगा।
जयराम मालाकार, शिक्षक : जलस्रोतों को संरक्षित करने सामूहिक प्रयास करना होगा। प्रतियोगी छात्रों ने पिछले दो रविवार से यहां सफाई कर रहे हैं। दूसरी ओर लोग पूजा सामग्री समेत अन्य सामग्री कुंड में फेंक रहे हैं। लोगों को यह समझना होगा कि आज जलस्रोत जिंदा रहेंगे तो हमारा कल का भविष्य संरक्षित होगा।
कल्पना तंवर : पिछले तीन रविवार से इस कुंड की सफाई करने के लिए आ रही हूं। सफाई करने के बाद भी लोग यहां पूजन सामग्री के साथ अन्य कचरा फेंकते हैं। जलस्रोत में गंदगी करेंगे तो बीमारी फैलेगी। इस लिए जलस्रोतों को बचाएं। इससे हमारा स्वास्थ्य ठीक रहेगा।
रितिका वर्मा : सार्वजनिक स्थल पर कचरा नहीं फेंके। कचरे का संग्रहण अच्छे से करें। जिससे हम और हमारा समाज स्वस्थ रहे। पर्यावरण दूषित होने से बचाने के लिए लोगों को जलस्रोतों की बजाए कचरे को व्यवस्थित जगह पर एकत्रित करें।