
मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल के ओपीडी काउंटर सुबह 9 बजे से ही फुल रहे। चार काउंटरों के सामने मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। महिलाओं की भीड़ अधिक होने से दो लाइन लगाई गई थी। इसके बाद भी यहां दोपहर करीब 1.30 बजे तक भीड़ कम नहीं हुई। इधर मेडिकल विभाग और शिशू रोग विभाग में भी डॉक्टरों के सामने मरीज को लेकर परिजन लाइन लगाकर खड़े रहे। दरअलस मौसम में दिन और रात के तापमान के बीच अंतर बढ़ने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी महसूस होती है, वहीं शाम और रात में हल्की ठंडक से मौसम बदल जाता है। ऐसे में सर्दी, खांसी, गले में खराश और बुखार की शिकायतें सामने आ रही हैं।
बच्चों को संक्रमण से बचाने स्वच्छता और आराम जरूरी
शिशु रोग विशेषज्ञ, एमडी (पीडियाट्रिक्स) डॉ. गरिमा अग्रवाल ने बताया कि बदलते मौसम में बच्चों को वायरल सर्दी-खांसी से बचाने के लिए स्वच्छता, पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ देना जरूरी है। अधिकांश वायरल संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं। इसलिए हर बुखार या खांसी में एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती। अभिभावकों को बिना चिकित्सकीय सलाह के बच्चों को कफ सिरप या एंटीबायोटिक नहीं देना चाहिए। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों में सांस लेने में परेशानी, तेज सांस चलना, छाती धंसना, अत्यधिक सुस्ती, दूध-पानी कम पीना या होंठ नीले पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
हाथों की सफाई और टीकाकरण पर दें ध्यान
चिकित्सकों के अनुसार, मौसमी संक्रमण से बचाव के लिए नियमित रूप से हाथ धोना, घर में हवा का उचित आवागमन बनाए रखना और बीमार व्यक्ति से दूरी रखना जरूरी है। बच्चों का समय पर टीकाकरण भी महत्वपूर्ण है। मौसम में बदलाव के दौरान खानपान और दिनचर्या का ध्यान रखने के साथ ही पर्याप्त आराम करना चाहिए। बुखार लगातार बना रहने या परेशानी बढ़ने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
मौसम में हुए इस बदलाव का असर
एमडी मेडिसिन डॉक्टर रणजीत बड़ोले का कहना है कि कुछ दिनों से वायरल बुखार, सर्दी और खांसी के मरीज बढ़े हैं। उपचार कराने वालों में बुजुर्गों की संख्या अधिक हैं। उनकी सेहत पर मौसम में हुए इस बदलाव का असर पड़ा है। उपचार करने के साथ ही उन्हें संक्रमण से बचाव की सलाह भी दे रहे हैं। डेंगू रोग को लेकर भी समझाइश दी जा रही है।