खंडवा

6 साल से बंद नर्सिंग कॉलेज में नहीं हुआ एक भी एडमिशन

एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ बढ़ाने के दावे कर रही है, वहीं जिले का एक मात्र सरकारी नर्सिंग कॉलेज छह साल से बदहाली का शिकार बना हुआ है। हालात इतने खराब हैं कि कॉलेज में एक भी छात्र का प्रवेश नहीं हो पाया। भवन की व्यवस्था तक नहीं होने से नर्सिंग शिक्षा ठप है, वहीं दूसरी तरफ निजी संस्थानों को खुली छूट देकर सरकारी व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस पर जिले की यह तस्वीर स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर कर रही है।
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May 12, 2026
The dilapidated government nursing college located in the hospital premises.

जिला अस्पताल परिसर में नर्स होस्टल के पीछे शासकीय नर्सिंग कॉलेज है। कॉलेज में वर्ष 2022 तक एडमिशन हुए। इसके बाद प्रवेश प्रक्रिया बंद कर दी गई। इसे बंद हुए छह साल हो गए हैं, तब से लेकर अब तक एक भी एडमिशन नहीं हो सका। कारण सिर्फ एक कॉलेज भवन गाइडलाइन के अनुसार नहीं हैं। भवन के कमरे, हॉल व स्टाफ रूम छोटा है। नर्सिंग कॉलेज बंद होने से युवाओं को अवसर नहीं मिल रहा है। वहीं जिले में चार नर्सिंग कॉलेज खुले हुए हैं। इनकों अनुमति और सुविधाएं मिलने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी

मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है। जिला अस्पताल में करीब 100 और मेडिकल कॉलेज में 120 से अधिक नर्सिंग स्टाफ कम है। मेडिकल कॉलेज का खुद का अस्पताल अब तक नहीं बन पाया है। अस्पताल परिसर में बने ए और बी ब्लॉक में उनका अस्पताल संचालित हैं लेकिन स्टाफ को लेकर कॉलेज प्रशासन लापरवाही कर रहा है। अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ के सहारे कॉलेज अपने अस्पताल का संचालन कर रहा है। अब तक न तो भर्ती की जा रही है और न ही नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में रुचि दिखा रहा है।

मानक अनुरूप नहीं व्यवस्था

अस्पताल के सभी वार्ड ओवर लोड हैं। हर एक वार्ड में 50 से 60 मरीज हर समय भर्ती रहते हैं। उनकी देखरेख के लिए एक शिफ्ट में केवल दो नर्सिंग स्टाफ है। नियमानुसार पांच बेड पर एक नर्स होना चाहिए लेकिन 50 मरीजों पर एक समय में दो ही नर्स हैं। इससे स्टाफ पर अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ता जा रहा है।

व्यवस्थाएं हो रही प्रभावित

जिला अस्पताल की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। यहां 20 नर्सिंग अधिकारी, 7 मैट्रन, 11 सीनियर नर्सिंग अधिकारी और 30 एनआरएचएम स्टाफ की कमी बनी हुई है। इधर मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में केवल 19 सीनियर नर्सिंग अधिकारी और 61 स्टाफ नर्स कार्यरत हैं, जबकि जिला अस्पताल में 224 नर्सिंग स्टाफ के भरोसे पूरी व्यवस्था संचालित हो रही है।

कॉलेज स्टाफ को मिल रहा वेतन

बंद कॉलेज में प्राचार्य, शिक्षक सहित अन्य सभी पद भरे हुए हैं। यहां 14 का स्टाफ हैं, जिसमें 6 शिक्षक व प्रभारी हैं जो दिन भर कॉलेज में रहते हैं। वहीं 8 कर्मचारियों को जिला अस्पताल में अटैच कर उनसे काम लिया जा रहा है।

जिला अस्पताल में कमी

20 - नर्सिंग अधिकारी

7 - मैट्रन

11 - सीनियर नर्सिंग अधिकारी

30 - एनआरएचएम

मेडिकल कॉलेज का मौजूद स्टाफ

19 - सीनियर नर्सिंग अधिकारी

61 - स्टाफ नर्स।

जिला अस्पताल का मौजूद स्टाफ

224 - नर्सिंग स्टाफ।

- जिला अस्पताल में 224 का नर्सिंग स्टाफ हैं, जिसमें कुछ नर्स मातृत्व अवकाश पर है तो कुछ छुट्टी पर हैं। कम स्टाफ में नर्सें काम करने का मजबूर हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे िस्थति खराब होती जा रही है। वरिष्ठ स्टाफ जिन्हें 30 से 35 साल हो गए हैं उन्हें वरियता नहीं दी जा रही है। - रेणुका मेलूंदे, प्रदेश उपाध्यक्ष नर्सिंग एसोसिएशन।

- नर्सिंग कॉलेज को लेकर शासन स्तर से ही मान्यता नहीं मिली है। जिससे कॉलेज में 6 साल से एडमिशन नहीं हो रहे हैं। नया भवन बनने के बाद ही कॉलेज शुरू हो पाऐगा। -ओपी जुगतावत, सीएमएचओ।

Updated on:
12 May 2026 11:49 am
Published on:
12 May 2026 11:48 am