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Mothers Day: डॉक्टर बोला- ‘आपके बच्चे नहीं बन पाएंगे ‘डॉक्टर-इंजीनियर’, मां की तपस्या बनी मिसाल

Mothers Day Special: मदर्स डे के मौके पर जानें उस मां के संघर्ष की कहानी जो बच्चों को सामान्य जीवन देने में संघर्षरत हैं....

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Mothers Day Special:

Mothers Day Special: (Photo Source - Patrika)

राजेश पटेल, खंडवा: हर मां अपने बच्चों के लिए संघर्ष करती है, लेकिन कुछ माताओं की तपस्या मिसाल बन जाती है। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की शिक्षिका मनीषा पाटिल ने अपनी मंदबुद्धि बेटी पूर्णिमा और बेटे कान्हा को सामान्य जीवन देने में 23 साल झोंक दिए हैं। बता दें कि उत्कृष्ट कन्या हॉस्टल में मनीषा पाटिल अधीक्षक हैं।

मनीषा पाटिल बच्चों के जन्म से ही उन्हें सामान्य जीवन देने में संघर्षरत हैं। बेटी पूर्णिमा को दसवीं तक खुद स्कूल ले जाना और लाना मनीषा पाटिल के लिए चुनौती रहा। पूर्णिमा ने 12 वीं की परीक्षा स्वाध्यायी के रूप में उत्तीर्ण की। बच्चों की देखभाल कर नौकरी पर जाना और उन्हें पारिवारिक माहौल में ढालने के प्रयास मनीषा पाटिल का अटूट संकल्प दर्शाते हैं। वह चाहती हैं कि बच्चे परिवार का अहम हिस्सा महसूस करें।

मंदबुद्धि बच्चों को समाज में जगह दिलाने का प्रयास

शहर के महेश नगर निवासी मनीषा पाटिल को पति हेमंत पाटिल का पूरा सहयोग मिला। कोर्ट में लिपिक हेमंत पाटिल ने रीढ़ की सर्जरी कराई है, इसके बावजूद बच्चों का भविष्य संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह दंपति अपनी मेहनत और त्याग से मंदबुद्धि बच्चों को समाज में सामान्य जगह दिलाने के लिए प्रयासरत है। वे हर उस प्रयास को लगन के साथ कर रहे हैं , जिससे बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सकें।

मां का प्रयास रंग ला रहा, विकसित हो रहीं भावनाएं

डॉक्टरों ने मनीषा पाटिल को बताया था कि दोनों बच्चे सामान्य बच्चों की तरह डॉक्टर, इंजीनियर नहीं बन पाएंगे। पर मनीषा ने हिम्मत नहीं हारी। उनका लक्ष्य बच्चों को डॉक्टर इंजीनियर बनाना नहीं, बल्कि मानवता के लिए अच्छा इंसान बनाना है। 23 साल के संघर्ष का परिणाम अब दिख रहा है। 23 वर्षीय बेटी पूर्णिमा में अब फीलिंग आने लगी है और वह घर के कामों में हाथ बंटाने की कोशिश करती है। 16 वर्षीय बेटा अंश कान्हा की भी समझ बढ़ी है। इन प्रयासों से बच्चों में मानवीय भावनाएं विकसित हो रही हैं। वे आम लोगों की तरह की व्यवहार कर रहे हैं।

मां का प्रेरणादायी संघर्ष

पाटिल ने 23 सालों से अपनी मंदबुद्धि बेटी पूर्णिमा (23) और बेटे अंश कान्हा (16) को सामान्य जीवन देने के लिए संघर्ष किया है। डॉक्टर ने कहा था कि बच्चे डॉक्टर-इंजीनियर नहीं बन पाएंगे, पर मनीषा का लक्ष्य उन्हें मानवता के लिए अच्छा इंसान बनाना रहा। उनकी बेटी पूर्णिमा ने 12 वीं पास की है और घर के कामों में हाथ बंटाती है। यह त्याग सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।