खंडवा

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : बीमारी ने बनाया योग गुरू… शुगर, थायराइड, मोटापा, मानसिक तनाव से मिली मुक्ति

आधुनिक जीवनशैली के कारण शुगर, ब्लड प्रेशर, थायराइड, मोटापा और मानसिक तनाव जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग न केवल एक व्यायाम, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की कला बनकर सामने आया है। पत्रिका ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कुछ महिलाओं ने योग को लेकर उनके अनुभव को जाना।

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Jun 21, 2026
international yoga day
खंडवा : अंतरराष्ट्रीय योग पर सामूहिक योग करते बुजुर्ग

आधुनिक जीवनशैली के कारण शुगर, ब्लड प्रेशर, थायराइड, मोटापा और मानसिक तनाव जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग न केवल एक व्यायाम, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की कला बनकर सामने आया है। पत्रिका ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कुछ महिलाओं ने योग को लेकर उनके अनुभव को जाना। जिनमें योग ने उनकी जिंदगी को नई दिशा दी।

योग से जिंदगी को मिल रही संजीवनी

योग महिलाओं को नई जिंदगी दे रहा है। किसी को वर्षों पुरानी बीमारी से राहत मिली तो कुछ को मां बनने में मदद मिली। एक महिला ने तो इलाज लेने के बाद कैंसर को योग से मात दे दिया। इन महिलाओं का कहना है कि योग ने न केवल शरीर को स्वस्थ बनाया, बल्कि आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति भी बढ़ाई।

योग ने लौटाई सेहत, दूसरी की जिंदगी को दे रहीं प्रेरणा

वरिष्ठ योग शिक्षिका आशा उपाध्याय बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब वे थायराइड, माइग्रेन, ब्लड प्रेशर, शोल्डर, स्पॉन्डिलाइटिस और कमर दर्द जैसी कई बीमारियों से जूझ रही थीं। प्रसव के बाद स्वास्थ्य लगातार गिरता गया। वर्ष 2006 में योग को अपनाया और नियमित अभ्यास शुरू किया। बीमारियों पर नियंत्रण होने लगा। आज 67 वर्ष की उम्र में भी रोज सुबह योग कक्षाएं संचालित कर रही हैं। उनका कहना है कि बीमारी से सबक लेकर योग सीखा और दूसरी को योग के लिए प्रेरित कर रही हूं।

त्वचा में सुधार, पुराने दाग कम हो गए

बड़बम महिला मंडल की योग शिक्षिका कुसुम तिवारी लंबे समय से चर्म रोग और सफेद दाग की समस्या से परेशान थीं। उन्होंने नियमित रूप से सूर्य नमस्कार के साथ अनुलोम-विलोम का अभ्यास शुरू किया। कुसुम बताती हैं कि धीरे-धीरे त्वचा में सुधार होने लगा, पुराने दाग कम हो गए और नए दाग बनने बंद हो गए। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और आज वे अन्य महिलाओं को भी योग अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

योग से सेहत बदली, मां बनने में मिली मदद

सोनम गेलानी लंबे समय तक पीसीओडी और हार्मोंस के असंतुलन से परेशान थीं। उन्होंने पहले चिकित्सीय उपाय किए। फिर नियमित योग शुरू किया। आयुर्वेद दवाओं के साथ तितली आसन, भद्रासन, गोमुख आयोग को दिनचर्या में शामिल कर लिया। धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार आने लगा। दो साल बाद उन्होंने एक पुत्री को जन्म दिया। सोनम कहती हैं कि वह घर में दस से पंद्रह मिनट नियमित योग करती हूं।

नियमित योग से बढ़ी प्रजनन क्षमता

शहर की रिया चांदनी योग से जुड़ीं। उन्होंने पतंजलि योग में प्रशिक्षण लिया। रिया चांदनी को सात साल के लंबे इंतजार के बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। रिया को गर्भधारण नहीं हो रहा था। नियमित योग में भद्रासन, योगमुद्रदा, तितली व गोमुख आसान के साथ आयुर्वेद दवाओं का उपयोग करने से हार्मोंस संतुलन और गर्भधारण की क्षमता मजबूत हुई। रिया घर में ही हर रोज नियमित योग करती हैं। रिया नियमित योग से अपने जीवन में बदलाव को मानती हैं।

पहले इलाज लिया, फिर प्रणायाम से कैंसर को हराया

रेखा सरवर कहती हैं कि 20 वर्षों से ब्यूटीशियन हैं। 2022 में उन्हें पता चला कि थायराइड कैंसर है। कैंसर का नाम आते ही डर गई। हिम्मत जुटाई और डॉक्टर से मिलीं। डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी। रेखा कहती हैं कि ऑपरेशन कराया। एक हफ्ते बाद चेकअप में पता चला कि बीमारी ठीक नहीं हुई। हिम्मत नहीं हारी। 15 दिन बाद जलगांव में कैंसर सेंटर पर दूसरा ऑपरेशन हुआ। डॉक्टर की सलाह से ऑपरेशन के कुछ दिन बाद योगा शुरु किया। नियमित प्राणायाम से स्वस्थ हूं। यह सब योग से ही हो पाया है।

विशेषज्ञ : सीमा श्रीबाथो, योग शिक्षक, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सूरजकुंड

अनियमित दिनचर्या ने लोगों को बीमारियां, तनाव, अनियमित दिनचर्या और भागदौड़ भरी जिंदगी ने शरीर और मन दोनों को प्रभावित किया है। योग हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायता करता है। नियमित योग से तनाव कम और मन एकाग्र रहता है। हृदय, फेफड़े व जोड़ों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। दैनिक जीवन में ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन तथा अनुलोम-विलोम, भ्रामरी जैसे योगाभ्यास को शामिल करना चाहिए। प्रतिदिन केवल 20-30 मिनट का योग भी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

Published on:
21 Jun 2026 12:16 pm