खरगोन. समीप ग्राम छालपा में शावकों के साथ मादा तेंदुए की मुवमेंट देखी गई है। ग्रामीण दहशत में है। पग मार्क मिलने के बाद वन विभाग तेंदुए को पकडऩे के लिए कड़ी मशक्कत कर रहा है। क्षेत्र में पिंजरा लगाया। तेंदुए को रिझाने के लिए मुर्गा रखा मगर मुर्गा गायब है। अब दूसरे जानवर को रखने की तैयारी विभाग ने की है।
खरगोन. जिला मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर ग्राम छालपा व इसके आसपास के रहवासी उस समय चिंता से घिर गए जब उन्हें पता चला कि क्षेत्र में तेंदुए का मुवमेंट है। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। क्षेत्र में मिले पगमार्क ने भी क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी पर मुहर लगाई है। एक खेत में विभाग ने पिंजरा लगाया है, हालांकि अब तक तेंदुआ पकड़ से दूर है।
छालपा निवासी गोपाल पाटीदार ने बताया क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी चार-पांच माह से बनी हुई है। सबसे पहले यहां मजदूरी करने वाले मोतीराम ने दो शावकों के साथ तेंदुए को देखा था, मगर उसकी बात पर किसी ने भरोसा नहीं किया। दो दिन पूर्व अशोक पाटीदार के खेत में लगे अमरूद के बगीचे में मजदूरों सहित परिवार सदस्यों ने भी तेंदुए को देखा। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। टीम मौके पर पहुंची और सर्चिंग शुरू की।
वन रेंजर राजेश रंधावे ने बताया ग्रामीणों की सूचना पर क्षेत्र में सर्चिंग की है। तेंदुए के साथ लकड़बग्घे के पगमार्क भी मिले हैं। इससे स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में तेंदुए का मुवमेंट है। सतर्कता के चलते शनिवार शाम को राजेश पाटीदार क खेत के पास पिंजरा लगाया था। तेंदुए को रिझाने के लिए उसमें मुर्गा छोड़ा। रविवार सुबह पिंजरे से मुर्गा गायब था। पिंजरे के आसपास लकड़बग्घे के ताजा पग मार्क मिले हैं। टीम ने अब पिंजरे में कुत्ता बांधने की तैयारी की है। टीम लगातार सर्चिंग में जुटी है।
गोपाल पाटीदार ने बताया कुछ लोगों का कहना है कि क्षेत्र में तेंदुआ नहीं शेर है। जबकि वन विभाग ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। पाटीदार ने बताया बीते करीब 10 साल से क्षेत्र में 60 से अधिक बगीचे किसानों ने लगाए हैं। यहीं कारण है कि जंगली जानवरों का बसेरा यहां होने लगा है। कई मजदूर परिवार अब तक खेतों में ही टपरी बनाकर रहते थे, मगर दो दिन से किसानों ने उन्हें भी अपने बाड़ों में रुकवाया है।
-ग्रामीणों की सूचना पर क्षेत्र में सर्चिंग की है। तेंदुए के साथ लकड़बग्घे के पगमार्क मिले हैं। तेंदुए को पकडऩे के लिए छालपा में पिंजरा लगाया है। अभी वह पकड़ मे नहीं आया है। -राजेश रंधावे, वन रेंजर, खरगोन