दो साल से बाउंड्रीवॉल तक सिमटे मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मोड पर बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके संकेत हाल ही में धार में हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और सीएम डॉ. मोहन यादव के एक कार्यक्रम से मिले हैं। धार में बनने वाले मेडिकल कॉलेज को लेकर भूमिपूजन किया है। यह निर्माण पीपीपी मॉडल पर होगा। इसी तर्ज पर खरगोन कॉलेज को भी दिशा मिलने की उम्मीद है।
खरगोन. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और सीएम डॉ. मोहन यादव ने धार में बनने वाले मेडिकल कॉलेज को लेकर भूमिपूजन किया। यह निर्माण पीपीपी (पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर तैयार होगा। इस आयोजन में यह संकेत भी मिले हैं कि इसी मॉडल पर प्रदेश के अन्य 14 कॉलेज भी तैयार होंगे। इस फेहरिश्त में खरगोन में बनने वाला मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं। फिलहाल कॉलेज के नाम पर निर्माण दो साल से बाउंड्रीवॉल तक सिमटा है। उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले वर्ष में शिक्षा व स्वास्थ्य की दृष्टि से इस महत्वपूर्ण सौपान को गति मिलेगी। हालांकि प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि कॉलेज निर्माण से जुड़ी तमाम कार्ययोजना व कागजी खानापूर्ति भोपाल स्तर से होगी।
गौरतलब है कि 29 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने मेडिकल कॉलेज की बाउंड्रीवॉल का शुभारंभ किया था। शहर के 10 किमी दूर ग्राम टेमला में 12 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई है। जहां मध्यप्रदेश बिल्डिंग डेवलेपमेंट कार्पोरेशन के माध्यम से 378 लाख रुपए की लागत से बाउंड्रीवॉल तैयार हो चुकी है। इसकी लंबाई दो किमी है। ऊंचाई 2.1 मीटर है। चार दीवारी निर्माण के बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में है। इससे मेडिकल की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को दूसरे नगरों में जाना पड़ रहा है। आदिवासी बहुल जिला होने से यहां स्वास्थ्य सेवाओं की ज्यादा जरूरत है। धार में हुए कार्यक्रम के बाद शहरवासियों में उम्मीद जगी है कि पीपीपी मॉडल पर ही सही मगर खरगोन में बनने वाले मेडिकल कॉलेज को अब गति मिल सकती है।
मेडिकल कॉलेज के लिए जिला अस्पताल मजबूत होना जरूरी है। मगर विडंबना कहेे कि जिला अस्पताल में संसाधनों और स्टॉफ की कमी है। 22 लाख की आबादी वाले जिले के हिसाब से जिला अस्पताल का विस्तार नहीं हो पाया है। तीन सौ बिस्तरों वाले जिला अस्पताल का उन्नयन 400 बेड में होने वाला है। नए मेटरनिटी वार्ड के ऊपर 100 बेड का अतिरिक्त वार्ड बनकर तैयार भी हो गया है, लोकापूर्ण, उद्घाटन के बावजूद यह शुरू नहीं हो पाया है।
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज का संचालन पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप मोड से होगा। इसके लिए प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। हालांकि इस प्रक्रिया की स्थानीय स्तर पर विभाग को अधिकृत जानकारी नहीं है। बावजूद इसके अगर पीपीपी मोड से कॉलेज का संचालन किया जाता है तो यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जाना चाहिए।
अभी जिला मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज नहीं है। इसके अभाव में स्थानीय विद्यार्थियों को बड़े शहरों इंदौर, भोपाल की दौड़ लगाना पड़ रही है। यहां सुविधा मिलने से घर रहते हुए विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे। यह संसदीय क्षेत्र बड़वानी, खरगोन में आता है। लिहाजा, मेडिकल कॉलेज शुरू होने से दोनों जिलों के मेडिकल छात्रों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा।
मेडिकल कॉलेज निर्माण की तमाम प्रक्रिया भोपाल स्तर से होगी। फिलहाल अधिकारिक रूप से कोई आदेश नहीं मिले हैं। टेंडर प्रक्रिया व अन्य कागजी कार्रवाई भोपाल लेवल से ही चलेगी। -भव्या मित्तल, कलेक्टर खरगोन