खरगोन. गरीबों को मुत इलाज के लिए सरकार अरबों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन इसका लाभ गरीबों को नहीं मिल रहा है। पिछले दस दिन से सरकारी अस्पताल में भर्ती पत्नी के इलाज के लिए जब रुपए नहीं बचे तो पति को अपना खून बेचना पड़ा।
दरअसल अस्पताल में इंजेक्शन नहीं होने से बाजार की दवाई लिखी जा रही थी थी। पीडि़त पति ने बताया उसके घर में अब खाने के लिए पैसे नहीं है दवाई कहां से लेकर आता, किसी ने सलाह दी कि अपना खून बेच दो रुपए मिल जाएंगे।
दस दिन पूर्व जिले आदिवासी बहुल गांव मेरघाटी निवासी रमीला को प्रसव पीड़ा होने के बाद पति गोरेलाल उसे जिला अस्पताल खरगोन ले आया।
खरगोन अस्पताल में पत्नी रमीला का तभी से इलाज चल रहा था। ज्यादा दिन अस्पताल में होने के बाद डॉक्टरों से जब पूछा कि साहब डिलीवरी कब होगी तो हर बार यही कहा जाता कि एक घंटे बाद ऑपरेशन कर देंगे, यह सिलसिला शनिवार तक जारी रहा। शनिवार को गोरेलाल से कहा गया कि पत्नी को इंजेक्शन लगेगा यह बाजार से ले आओ।
80 रुपए के इंजेक्शन लाने के बाद गोरेलाल के पास एक रुपया भी नहीं बचा। रविवार को भी जब गोरेलाल ने डॉक्टरों से जिद की तो उसे पत्नी के साथ वार्ड से बाहर निकाल दिया गया और कहा गया कि जब दर्द उठे तब लेकर आना। रुपयों से तंग हो चुके गोरेलाल को किसी ने बताया किया अस्पताल में ही खून बेचकर उसे पैसे रुपए मिल सकते हैं। इस मामले में बात करने के लिए न ही सिविल सर्जन और न सीएचएमओ उपलब्ध हो पाए।
अस्पताल में ही बेचा खून
गोरेलाल को यह सलाह जम गई और उसने खून बेचने का मन बना लिया। गरीबी से तंग गोरेलाल को अस्पताल में ही एक ऐसे मरीज के परिजन मिल जिन्हें खून की जरूरत थी। दोनों में पांच सौ रुपए में सौदा तय हुआ और गोरेलाल ने अस्पताल में ही रक्तदान कर दिया। यह रक्त जरूरतमंद मरीज को मिल गया और गोरेलाल को रुपए।
अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार गोरेलाल ने रविवार को रक्तदान किया है। हालांकि इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायतों की लंबी है फेहरिस्त
जिला अस्पताल में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। अस्पताल में भर्ती चैनपुर थाना हरियामान से बारकी को पति केसरिया दो दिन पहले अस्पताल लेकर आए थे। केसरिया ने बताया इलाज सही ढंग से नहीं हो रहा है। नर्सो को बोलो तो वो अभद्र व्यवहार करती हैं। हीरापुर की रिना पति बबलू को सोनोग्राफी कराने के लिए खरगोन लाया गया था। रिना को 16 सितबंर भर्ती कर लिया और आशा कार्यकर्ता को बार बार फोन लगाने पर भी नहीं आ रही है।