
खरगोन. खरगोन तहसील के ग्राम लिक्खी में 4 अप्रैल की रात उपार्जन केंद्र से गेहूं चोरी के बाद उपजे विवाद के मामले में ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को भारतीय किसान संघ के बैनर तले दर्जनों किसान एसपी कार्यालय पहुंचे। ऊन थाना प्रभारी ज्ञानू जायसवाल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया। हंगामे की स्थिति को भांपते हुए टीआई को एक दिन पहले ही लाइन अटैच कर दिया। दरअसल, 4 अप्रैल को लिक्खी के शराफत पिता बाबू को गांव के ही किसानों ने उपार्जन केंद्र से गेहूं चोरी करते पकड़ा था। कुछ देर बाद गांव के हकीम पिता बाबू, सलीम उर्फ सला पिता मेहबूब, साहिल पिता स्वाला, अरबाज उर्फ शाहबाज पिता मुकीम, रईश पिता कमु ने आकर किसानों से मारपीट कर शराफत को अपने साथ ले गए। 5 अप्रैल को थाने पर मामले की सूचना देने पर टीआई ज्ञानू जायसवाल व एसआई खान गांव पहुंचे। किसानों ने कहा कि पुलिस ने गांव में किसानों से मारपीट कर शिकायतकर्ता और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया।
किसानों को परिसर में घुसने से रोका
गुरुवार सुबह करीब ११ बजे से कलेक्ट्रेट गेट के समीप किसान एकजुट होने लगे। लिक्खी सहित आसपास के गांव के किसान यहां पहुंचे। दोपहर करीब 12.30 बजे किसान नारेबाजी कर एसपी कार्यालय जाने लगे, लेकिन परिसर के गेट पर ही एसडीओपी दिलीपसिंह बिलवाल और कोतवाली टीआई संजय द्विवेदी ने किसानों को रोक लिया। पुलिस अफसरों ने परिसर में धारा 144 लागू होने का हवाला देकर प्रतिनिधिमंडल को प्रवेश देने की बात कहीं। यहां भाकिसं जिला उपाध्यक्ष कैलाश पाटीदार, गोपाल पाटीदार, पारस पाटीदार सहित अन्य किसान परिसर में जाने देने और एसपी से मिलने की मांग करने लगे। आक्रोशित किसान पुलिस प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे तो टीआई द्विवेदी ने उन्हें समझाइश दी। कुछ देर बाद अफसरों की सहमति पर किसानों को परिसर के भीतर जाने दिया गया। यहां एएसपी अंतरसिंह कनेश किसानों से मिले। भारतीय किसान संघ ने गेहूं चोरी और विवाद के मामले की निष्पक्ष जांच कराने और टीआई जायसवाल और एसआई खान को निलंबित कर किसानों के झूठे प्रकरणों वापस लेने की मांग रखी।
जुआ-सट्टा और अवैध शराब का गढ़ बना क्षेत्र
टीआई के खिलाफ मोर्चा खोलकर एसपी कार्यालय पहुंचे किसानों ने क्षेत्र की अवैध गतिविधियों की पोल खोली। उन्होंने क्षेत्र में जुआ-सट्टा और अवैध शराब की बढ़ती गतिविधियों के बारे में बताया। किसानों ने कहा कि पुलिस को जुएं-सट्टे की शिकायत करने पर कार्रवाई तो नहीं होती, लेकिन अगले दिन अवैध गतिविधियों के संचालक शिकायतकर्ता पर दबाव बनाना शुरू कर देते हैं।
पहले स्थानांतरण, फिर लाइन अटैच
इधर विवादों के बीच बुधवार को ऊन थाना प्रभारी ज्ञानू जायसवाल को लाइन अटैच किया गया। इस त्वरित कार्रवाई को लिक्खी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि एएसपी कनेश का कहना है कि जायसवाल का पूर्व में अन्य थाने पर स्थानांतरण हो चुका है। लाइन अटैच की बात स्वीकारते हुए कनेश ने इसका कारण नहीं बताया।जायसवाल के स्थान पर अब काकड़दा चौकी के प्रभारी राजेंद्र सिरसाठ को ऊन थाने का प्रभार सौंपा गया है।
विवादों से घिरा रहा कार्यकाल
थाना प्रभारी जायसवाल का कार्यकाल पिछले कुछ महीनों से लगातार विवादों से घिरा रहा। दरअसल क्षेत्र के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष के लापता होने के मामले में भी पुलिस अब तक खाली हाथ रही है। वहीं थाना परिसर में एक युवक के फांसी के फंदे पर झूलने के मामले में भी परिजनों ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए थे।
जांच करवा रहे
- लिक्खी के किसान शिकायत लेकर आए थे। भीकनगांव एसडीओपी को मामले की जांच सौंपी है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। - अंतरसिंह कनेश, एएसपी, खरगोन।