खरगोन. वन्य जीवों का सुरक्षा दायरा मजबूत करने के लिए वन विभाग का दल जंगलों की खाक छानेगा। जिले में वन क्षेत्र में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 चलेगा। इस विशेष अभियान में जिले की तमाम 127 वन बीट में टीमें दस्तक देगी और जंगलों की खाक छानेगी। तय गाइडलाइन के मुताबिक गश्ती के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र की बागड़, फैंसिंग में सर्चिंग होगी।
खरगोन. जिले में फैले वनक्षेत्र में वन्य जीवों का सुरक्षा दायरा मजबूत करने व शिकार की घटनाओं पर रोकथाम के लिए वन विभाग जिले में ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 अभियान चलाएगा। इसकी शुरुआत 10 जनवरी से होगी। 15 फरवरी तक चलने वाले इस विशेष अभियान में जिले की तमाम 127 वन बीट में टीमें दस्तक देगी और जंगलों की खाक छानेगी। तय गाइडलाइन के मुताबिक गश्ती के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र की बागड़, फैंसिंग में सर्चिंग होगी।
गौरतलब है कि नर्मदा पट्टी में बीते कुछ माह में तेंदुए के जाल व फंदों में फंसे मिले थे। संभावना जताई जा रही थी कि शिकार की दृष्टि से यह जाल बिछाया था। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ही ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 चलाया जाएगा, ताकि वन्य-जीवों के अवैध शिकार के शिकारियों व मांस के शौकीन व्यक्तियों द्वारा अपनाए जाने वाले फंदे, विद्युत करंट, खटका जैसे साधन से शिकार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। गौरतलब है पत्रिका ने बीते माह ही नर्मदा पट्टी में बढ़ रहे तेंदुओं की संख्या व सुरक्षा व्यवस्था कमजोर शिक्षक से खबर प्रकाशित की थी।
इस ऑपरेशन में वन भूमि या वन्यप्राणी विचरित क्षेत्र से जाने वाली विद्युत लाइन के नीचे या उसके पास भी गश्ती होगी। आवश्यकता अनुसार स्थानीय विद्युत विभाग के अमले को भी साथ में रखा जाएगा। शिकार के लिए लगाए फंदे, फैलाए विद्युत करंट वायर, वन भूमि व वन्य.प्राणी विचरित क्षेत्र पर मिलने पर प्रकरण में आए साक्ष्यों के आधार पर विधिवत जब्ती कर अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया जाएगा। अपराध में संलिप्त अपराधी का पता लगाकर कार्रवाई करेंगे।
ऑपरेशन वाइल्ड लाइफ ट्रैक में प्रदेश के प्रत्येक वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल इकाई में एक उप वन मंडल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त है। जो ऑपरेशन से संबंधित निर्धारित प्रारूप में जानकारी एक सप्ताह में ऑनलाइन दर्ज करेंगे। ऑपरेशन वाइल्ड लाइफ ट्रैप की अवधि एक माह 5 दिन की होगी। गश्ती के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों एवं शिकारी, घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की चेकिंग, सर्चिंग होगी। इस दौरान निकटतम डॉग स्क्वॉड दस्ता भी साथ रहेगा। मेटल डिटेक्टर उपकरण का भी उपयोग होगा।
केस 1
16 अप्रेल को कसरावद वन परिक्षेत्र के ग्राम मथड़ाय स्थित खेत में तार फेंसिंग पर लगे शिकंजे में तेंदुआ फंसा था। पैर जख्मी हो गया। दहाड़ सुनकर ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी थी। घटना में अब तक शिकारी नहीं पकड़े गए हैं।
केस 2
20 मई को कसरावद वन परिक्षेत्र के अमलाथा में झाडिय़ों के पास तेंदुआ शिकंजे में फंसा मिला। रालामंडल अभ्यारण्य इंदौर की टीम ने ट्रेंकुलाइज कर तेंदुए को ओंकारेश्वर के जंगल में छोड़ा था। इस मामले में भी शिकारी नहीं पकड़े गए हैं।
जिले में वन्य जीवों की गणना का काम तीसरे चरण में चल रहा है। जिले में स्थापित 127 वन बीट में 127 बिट प्रभारी वन ग्राम समिति सदस्यों के साथ मिलकर वन्य जीवों की गणना में जुट हैं। पहले तीन दिन पांच, छह व सात जनवरी को मांसीहारी वन्य जीवों की पड़ताल की है। अगले तीन दिन यानी 8, 9 व 10 जनवरी को शाकाहारी जीवों का पता लगाया जा रहा है।
जिले के वन क्षेत्र में ऑपरेशन वॉइल्ड ट्रैप अभियान की शुरुआत 10 जनवरी से होगी। इसकी तैयारियां की है। इस ऑपरेशन के तहत शिकार के लिए वनों में लगाए फंदे आदि की सर्चिंग की जाएगी। वन दायरों को सुरक्षित करेंगे। -रमेश राठौड़, डीएफओ, खरगोन