किड्स

नन्हे कहानीकारों की अनोखी दुनिया, बचपन के रंग, कहानियों के संग!

किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 70 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (18 मार्च 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 70 में भेजी गई कहानियों में रुद्रप्रिया सोनी, निमिषा पाटीदार, शनाया सितलानी क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय विजेता रहे। इनके साथ सराहनीय कहानियां भी दी जा रही हैं।

26 min read
Mar 24, 2026
kids corner

चित्र देखो , कहानी लिखो- 70 की रोचक कहानियां


तनवी मीणा
उम्र:- 13 वर्ष
मेहनत का फल
गुंजन और तनवी दोनों बहने अपने गांव में बनें, महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ती थी। गुंजन कक्षा चार में तथा तनवी कक्षा छः में थी। तनवी बड़ी थी और साथ ही पढ़ाई में भी होशियार थी वहीं छोटी बहन गुंजन अपने आलस और खेलने कूदने में ज्यादा ध्यान देने के कारण पढ़ाई में कमजोर रह जाती थीं। मार्च का महीना चल रहा था और स्कूल में वार्षिक परीक्षा चल रही थी। तनवी देर रात तक पढ़ाई करती और सुबह अलार्म बजते ही फिर से पढ़ने बैठ जाती, उसके सारे पेपर अच्छे गए। गुंजन रात को जल्दी ही सो जाती और सुबह बार बार अलार्म बजने के बाद भी देर तक सोती रहती। पढ़ने में तो उसका रत्ती भर भी मन नहीं लगता था।
परीक्षा के परिणाम आए तो तनवी अच्छे नंबरों से पास हुई वहीं दूसरी और गुंजन फेल होते होते बची। स्कूल के प्रिंसिपल सर से गुंजन को डांट पड़ी और उन्होंने तनवी को शाबाशी दी। आखिर उसे उसकी मेहनत का फल जो मिल गया था। इसके बाद गुंजन ने अपने आलसी स्वभाव को छोड़ दिया और पांचवीं कक्षा में सर्वप्रथम स्थान प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ अपनी पढ़ाई में जुट गई।
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नाम- समायरा गोठवाल
उम्र- 10 वर्ष
मन्नू और चार्वी
दो बहनें थीं। दोनों एक ही कमरे में सोती थीं। रात को सोने से पहले बड़ी बहन मोनू ने अलार्म लगाया सुबह छह बजे का।सुबह जैसे ही अलार्म बजा, ट्रिन-ट्रिन-ट्रिन! मोनू की आंखें फट गईं। वह घबराकर उठ बैठी और हाथ हिलाने लगी, उठो! उठो! स्कूल का टाइम हो गया!लेकिन छोटी बहन सोनू? वह अभी भी रजाई में घुसी, गहरी नींद में सो रही थी। उसके मुँह से धीरे-धीरे zzz… zzz… की आवाज़ें आ रही थीं।
मोनू ने आवाज लगाई — “सोनू, उठ जा! देर हो जाएगी! सोनू ने करवट बदली और फिर सो गई।मोनू ने सोचा , एक ही उपाय है। वह रसोई में गई और एक गिलास ठंडा पानी ले आई।सोनू… उठती है या…?सोनू ने एक आँख खोली, मोनू का इरादा भाँप लिया और झट से उठकर बोली ,उठ गई! उठ गई भई!
दोनों बहनें खिलखिलाकर हंस पड़ीं। मां ने आवाज़ लगाई कि नाश्ता तैयार है आओ!उस दिन दोनों समय पर स्कूल पहुंचीं। सोनू ने रात को सोने से पहले कहा दीदी, कल से मैं खुद उठूंगी, मोनू मुस्कुराई , पक्का?
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नाम- आदित्य राणा
उम्र- 7 वर्ष
सुबह की नींद और आलस
सुबह का समय था। कमरे में खिड़की से हल्की धूप आ रही थी। अलार्म घड़ी जोर-जोर से बज रही थी – ट्रिन-ट्रिन! लेकिन रीना अभी भी अपने बिस्तर पर गहरी नींद में सो रही थी।दूसरे बिस्तर पर उसका भाई मोहन भी सो रहा था। वह आराम से कंबल ओढ़कर चैन की नींद ले रहा था।
अचानक रीना की नींद खुली। उसने जम्हाई ली और अलार्म की तरफ देखा। उसे याद आया कि आज स्कूल में टेस्ट है। वह घबरा गई और तुरंत उठ बैठी।रीना ने अपने भाई मोहन को जगाया, उठो मोहन! देर हो जाएगी।मोहन ने नींद में कहा, दीदी, थोड़ा और सोने दो…
लेकिन रीना ने उसे बार-बार हिलाकर जगा दिया।दोनों जल्दी-जल्दी तैयार हुए। मम्मी ने नाश्ता दिया और कहा, “समय पर उठना बहुत जरूरी है।उस दिन के बाद दोनों ने तय किया कि वे रोज समय पर उठेंगे और आलस नहीं करेंगे।
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नाम - गाथा जैन
उम्र - 13 वर्ष
सपनों की अलार्म घड़ी

रोहन और उसकी छोटी बहन रिया की दुनिया उनके बिस्तर तक ही सिमटी थी। रोहन को लगता था कि नींद ही सबसे बड़ा सुख है, इसलिए वह अलार्म बजते ही उसे दुश्मन समझकर बंद कर देता। वहीं रिया अपनी रजाई में दुबकी सपनों की दुनिया में खोई रहती।
एक सुबह, जब रोहन ने रोज़ की तरह अलार्म बंद किया, तो उसे खिड़की के बाहर चहचहाते पक्षियों और पास के मैदान में दौड़ते बच्चों की आवाज़ सुनाई दी। उसने देखा कि सूरज की किरणें रिया के चेहरे पर पड़ रही थीं, पर वह गहरी नींद में थी। रोहन को अचानक अहसास हुआ कि जब वे सो रहे होते हैं, तो दुनिया कितनी आगे निकल जाती है।
उसने रिया को जगाया और कहा, "उठो रिया! असली सपने बंद आँखों से नहीं, बल्कि जागती आँखों से पूरे होते हैं।" उस दिन दोनों ने तय किया कि वे सूरज को जगाएंगे, सूरज उन्हें नहीं। उन्होंने आलस को त्याग कर समय की कद्र करना सीखा।
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नाम- तेजस शर्मा
उम्र - 11 वर्ष
सुबह की नई शुरुआत

एक छोटे से कमरे में दो बहनें सो रही थीं। खिड़की से हल्की-हल्की धूप अंदर आ रही थी और बाहर पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी। तभी अचानक घड़ी ट्रिंग-ट्रिंग बजने लगी। बड़ी बहन रीमा की आंख खुल गई। उसने अंगड़ाई लेते हुए कहा, ओह! सुबह हो गई, अब हमें स्कूल के लिए तैयार होना चाहिए।
रीमा जल्दी से उठकर बैठ गई, लेकिन उसकी छोटी बहन नेहा अभी भी गहरी नींद में थी। वह आराम से कंबल ओढ़े सो रही थी। रीमा ने उसे प्यार से आवाज दी, नेहा, उठो! देर हो जाएगी। लेकिन नेहा ने कोई जवाब नहीं दिया और करवट बदलकर फिर सो गई।
रीमा ने सोचा कि अगर वह ऐसे ही सोती रही तो स्कूल के लिए देर हो जाएगी। वह उसके पास गई और धीरे से बोली, अगर तुम रोज देर से उठोगी, तो तुम्हारा सारा काम भी देर से होगा। जल्दी उठने से हम ताजगी महसूस करते हैं और दिन भर अच्छा लगता है।
नेहा ने धीरे-धीरे आंखें खोलीं और बोली, “ठीक है दीदी, आज से मैं भी जल्दी उठने की कोशिश करूंगी।” यह सुनकर रीमा मुस्कुराई और दोनों बहनों ने मिलकर अपना बिस्तर ठीक किया।कुछ ही देर में दोनों तैयार होकर स्कूल के लिए निकल गईं। रास्ते में वे हंसते-खेलते जा रही थीं।
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नाम- कोमल अचारा
उम्र- 13 वर्ष
एकता ओर साहस
एक समय की बात है एक प्यारा सा गांव था ' हंसपुर ', जो ऊंची पहाड़ियों की गोद में बसा था| उसी गांव में दो घड़े दोस्त रहते थे - चिंटू और संगीता| दोनों के बीच ऐसी पक्की दोस्ती थी कि गांव वाले उन्हें राम लखन की जोड़ी कहते थे|
एक बार गर्मियों के मौसम में गांव का मुख्य क्या सुख गया और सारे पेड़ पौधे सूखने लगे| हो लोग पानी भरने गांव के एक पुराने बगीचे में स्थित एक चट्टान पर बने हुए कुएं पर जाते | एक दिन चिंटू और संगीता भी उस बगीचे म गए तो उन्होंने रस्ते में कई पेड़ पौधों किलो देखा जिंगल पानी की बहुत ज्यादा जरूरत थी| तो चिंटू अपने घर से एक बाल्टी लाया ओर दोनों ने कुएं से पानी निकाला| बाल्टी में वजन ज्यादा होने के कारण दोनों ने बाल्टी का एक एक सिरा पकड़ लिया और रास्ता पथरीला और कठिन था धूप भी तेज थी लेकिन दोनों के हौसले उनसे भी ऊंचे थे| और उन्होंने पेड़ पौधों में पानी देने लगे| उस दिन के बाद वे रोज उस बगीचे में आते और रोज पेड़ पौधों में पानी देते धीरे धीरे पौधे हरे भरे हो गए उनमें नई पत्तियां आ गई, नए फूल आ गए ओर कुछ पेड़ो के फल भी लग गए जो चिंटू और संगीता मजे से खाते| चिंटू और संगीता तो बस पेड़ पौधों में न केवल पानी डालते उन्होंने यह भी साबित भी करा दिया कि अलग एकता ओर साहस तो कोई भी मुश्किल आसानी से ताली जा सकती है|
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नाम- दिपांशी
उम्र- 12 वर्ष
दो बहनें
एक छोटे से गांव में दो बहनें रहती थीं—रीना और मीना। दोनों एक ही कमरे में सोती थीं, लेकिन उनकी आदतें बिल्कुल अलग थीं। रीना बहुत जल्दी उठने वाली लड़की थी, जबकि मीना को देर तक सोना बहुत पसंद था।
हर सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही रीना उठ जाती। वह खिड़की खोलती, ताजी हवा लेती और अपने कामों में लग जाती। दूसरी ओर, मीना गहरी नींद में होती और उसे उठाना किसी युद्ध से कम नहीं था।
एक दिन रीना ने सोचा कि आज वह मीना को जल्दी उठाकर दिखाएगी। जैसे ही सुबह हुई, अलार्म घड़ी ज़ोर-ज़ोर से बजने लगी। रीना उठकर खिंचाई करने लगी, लेकिन मीना ने करवट बदली और फिर से सो गई। रीना ने उसे आवाज़ दी, मीना, उठो! सुबह हो गई है।” लेकिन मीना ने आँखें तक नहीं खोलीं।तब रीना ने एक नया तरीका अपनाया। उसने परदे हटाए, धूप अंदर आने दी और धीरे-धीरे मीना को हिलाने लगी। आखिरकार मीना की नींद खुली। उसने आँखें मलते हुए कहा, “इतनी सुबह क्यों उठा रही हो?”
रीना मुस्कुराई और बोली, “सुबह जल्दी उठने से दिन लंबा और अच्छा होता है। हम ज्यादा काम कर सकते हैं और खेल भी सकते हैं।”
मीना ने सोचा और फिर धीरे-धीरे उठ बैठी। उस दिन दोनों बहनों ने मिलकर सुबह की ठंडी हवा का आनंद लिया, खेला और अपने काम भी समय पर पूरे किए।उस दिन के बाद मीना ने भी कोशिश की कि वह जल्दी उठे। उसे समझ आ गया था कि अच्छी आदतें जीवन को बेहतर बनाती हैं।
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नाम- अन्नया बिजौलिया
उम्र- 9 वर्ष
​समय का मोल: दो सहेलियां
​एक छोटे से शहर में दो सहेलियां रहती थीं, और टीना। दोनों एक ही कमरे में रहती थीं, लेकिन उनके स्वभाव में ज़मीन-
आसमान का अंतर था। मीना समय की बहुत पाबंद थी, जबकि टीना को थोड़ी देर और" सोने की आदत थी।
​एक दिन दोनों को स्कूल की एक महत्वपूर्ण पिकनिक पर जाना था। बस ठीक सुबह 8:00 बजे निकलने वाली थी। रात को सोने से पहले मीना ने सुबह 6:00 बजे का अलार्म लगाया।
​जैसे ही सुबह के 6:00 बजे और घड़ी की सुई ने शोर मचाया, मीना तुरंत बिस्तर से उछल पड़ी। उसने अंगड़ाई ली और ताजी हवा का आनंद लिया। उसकी आँखों में पिकनिक का उत्साह साफ़ चमक रहा था। दूसरी ओर, टीना ने अलार्म की आवाज़ को अनसुना कर दिया और चादर तानकर गहरी नींद में सोई रही।
​मीना ने टीना को जगाने की बहुत कोशिश की, टीना, जल्दी उठो! वरना बस छूट जाएगी।" पर टीना ने नींद में ही उत्तर दिया, "बस पांच मिनट और मीना, अभी तो बहुत समय है।नतीजा यह हुआ कि मीना समय पर तैयार होकर बस स्टैंड पहुंच गई, लेकिन जब तक टीना की नींद खुली, बस निकल चुकी थी। उस दिन टीना ने सीखा कि जो समय पर जागता है, वही सुनहरे अवसरों का आनंद ले पाता है। चित्र में दिख रही मीना की मुस्कान उसकी स्फूर्ति को दर्शाती है, जबकि टीना का बेफिक्र होकर सोना आलस का प्रतीक है।
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सुबह की मीठी सीख
नाम- वंश जैन
उम्र- 10 वर्ष
एक दिन की बात है। सुबह-सुबह अलार्म घड़ी जोर-जोर से बजने लगी। कमरे में खिड़की से हल्की-हल्की धूप अंदर आ रही थी। बिस्तर पर सोई छोटी रिया ने आँखें मलते हुए अंगड़ाई ली और उठने लगी। उसे याद आया कि आज स्कूल में खेल प्रतियोगिता है, इसलिए वह जल्दी उठकर तैयार होना चाहती थी।रिया के पास ही दूसरे बिस्तर पर उसकी बड़ी बहन मीना गहरी नींद में सो रही थी। अलार्म की आवाज़ से भी उसकी नींद नहीं खुल रही थी। रिया ने मुस्कुराते हुए बहन को धीरे-धीरे हिलाया और बोली, “दीदी, उठो ना… सुबह हो गई है!” लेकिन मीना ने चादर और सिर तक खींच ली और फिर से सोने लगी।
रिया जल्दी से उठी, अपना बिस्तर ठीक किया और खिड़की के पास जाकर ताजी हवा लेने लगी। बाहर चिड़ियाँ चहचहा रही थीं और सूरज धीरे-धीरे आसमान में ऊपर आ रहा था। यह सुंदर नज़ारा देखकर रिया बहुत खुश हुई। उसने सोचा कि जो लोग सुबह जल्दी उठते हैं, वे दिन की शुरुआत अच्छे से कर पाते हैं।
थोड़ी देर बाद माँ कमरे में आईं और मीना को अभी भी सोता देखकर बोलीं, “देखो रिया को, वह कितनी जल्दी उठ गई और तैयार भी हो रही है।” यह सुनकर मीना को थोड़ी शर्म आई। वह तुरंत उठ बैठी और बोली, “अब से मैं भी जल्दी उठूंगी।उस दिन से दोनों बहनें रोज़ सुबह समय पर उठने लगीं। वे साथ-साथ पढ़ाई करतीं, खेलतीं और पूरे दिन खुश रहतीं। उन्हें समझ आ गया कि जल्दी उठने से दिन अच्छा और काम आसान हो जाता है।
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सुहानी सुबह और नींद
नाम- द्रोनांश वगावत
गोलू और मुन्नी दोनों सो रहे थे, तभी अलार्म की घंटी बजी गोलू अलार्म के के साथ उठ गया । किंतु मुन्नी अभी भी सो रही थी,
गोलू को समय की कीमत का अंदाजा था इस कारण बहुत गया किंतु मुन्नी को इसका अंदाजा नहीं था।
हर सुबह अपने साथ नहीं उमंग को जोश ले आती है और यह हम बच्चों के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है।
इसलिए हमें भी जल्दी उठना चाहिए और सुबह के आनंद
का मजा लेना चाहिए।
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रिंकी की आदत
नाम-कृति
उम्र-11 वर्ष
एक शहर में दो बहिनें रहती थी। एक का नाम पिंकी था और दूसरी बहन का नाम रिंकी , दोनों पढ़ने में बहुत होशियार थी। पिंकी बहुत मेहनती थी परंतु रिंकी आलसी थी। पिंकी रोज सुबह जल्दी उठकर योग करती थी इससे उसका दिमाग तेज बनता था। लेकिन रिंकी समय पर नहीं उठती थी। ऐसे करते-करते उसका संतुलन बिगड़ गया, वह खाना खाने की जगह काम करती थी, तो कभी-कभी सोने की जगह फोन चलाती थी। इससे उसके परीक्षा में कम अंक आने लगे। वह परेशान हो गई थी। यह देख कर पिंकी को बहुत बुरा लगा, इसलिए पिंकी ने रिंकी को समझाया कि हमें जल्दी उठना चाहिए और पिंकी ने रिंकी का संतुलन भी सही करवाया। और तब से रिंकी समय पर उठने लगी और वह रोज सुबह योग करने लगी। इससे उसकी कक्षा में सबसे अधिक अंक आए, और सही समय पर खाना खाती थी। यह देखकर उसके माता-पिता की बहुत खुश हुए।
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समय का सदुपयोग
नाम- अनन्या पिचुनिया
उम्र- 9 वर्ष

एक गांव में रिया और मीना दो बहनें रहती थीं, दोनों बहुत आलसी थीं। हर रोज़ स्कूल जाने के लिए अलार्म बजता लेकिन रिया उसे बंद करके फिर सो जाती। एक दिन उनकी परीक्षा थी और उनकी स्कूल बस छूट गई क्योंकि वह समय पर नहीं उठीं। फिर जैसे-तैसे उनके पिताजी उन्हें स्कूल छोड़ कर आए, तो अध्यापक से भी उन्हें बहुत डाँट पड़ी। फिर अगले दिन उन्होंने फैसला किया कि अब वह कभी आलस नहीं करेंगी और समय का सदुपयोग करेंगी।
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सही समय सही काम
नाम- अक्षर चौहान
उम्र- 9 वर्ष
रीना और वर्षा दो बहने थी । रोज सवेरे अलार्म बजते ही वर्षा अपने पलंग से उठ जाती और विद्यालय जाने के लिए तैयार हो जाती । पर रीना अपने पलंग में नींद के लिए लेटी रहती । एक बार जब अलार्म बजा और वर्षा उठ गई तो कुछ देर बाद बाल वाहिनी आ गई और वर्षा तैयार होकर विद्यालय चली गई। एक घंटे बाद रीना की आंख खुली पर वर्षा उसे दिखाई नहीं दी।तभी उसे पता चला कि वह तो विद्यालय चली गई। रीना को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने कहा कि अब वह जल्दी उठने का प्रयास करेगी ।कुछ दिनों बाद रीना अपनी बहन की तरह जल्दी उठती और अब उसकी भी बाल वाहिनी नहीं छुटती l
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समय का सही उपयोग
नाम- लभवंश दवे
उम्र- 9 वर्ष

एक छोटे से गाँव में मोहन और सोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन उनकी आदतें बिल्कुल अलग थीं। सोहन रोज सुबह जल्दी उठता, अपना काम समय पर करता और पढ़ाई भी मन लगाकर करता था। वहीं मोहन बहुत आलसी था। वह देर तक सोता रहता और अक्सर अपना होमवर्क भी अधूरा छोड़ देता।
एक दिन स्कूल में परीक्षा होने वाली थी। सोहन ने पहले से ही अच्छी तैयारी कर ली थी, लेकिन मोहन ने सोचा कि अभी बहुत समय है और वह खेलता रहा। परीक्षा वाले दिन सुबह अलार्म बजा, लेकिन मोहन ने उसे बंद करके फिर से सो गया। जब उसकी आंख खुली, तब बहुत देर हो चुकी थी।
वह जल्दी-जल्दी तैयार होकर स्कूल पहुँचा, लेकिन तब तक परीक्षा शुरू हो चुकी थी। उसे बहुत घबराहट हुई और वह पेपर भी अच्छे से नहीं कर पाया। दूसरी तरफ सोहन ने शांति से परीक्षा दी और अच्छे अंक प्राप्त किए।
उस दिन मोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझ लिया कि समय बहुत कीमती होता है और उसे यूँ ही बर्बाद नहीं करना चाहिए। उसने तय किया कि अब वह भी समय पर उठेगा और मेहनत करेगा।
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आलस्य का अंत
नाम- भावना कसवान
उम्र- 7 वर्ष
एक शहर में दो बहनें रहती थीं, दोनों का ही डॉक्टर बनने का सपना था। एक बहन, टीना, रोज सात बजे उठकर पढ़ने लगती, जबकि दूसरी बहन रीना आलस्य के कारण सोती रहती और पढ़ नहीं पाती। जब पेपर का समय आया, रीना का पेपर अच्छा नहीं हुआ, लेकिन टीना का अच्छा गया और वह जल्द ही डॉक्टर बन गई।
रीना दुखी हो गई, लेकिन फिर उसने आलस्य छोड़कर मेहनत करने का फैसला किया। उसने खूब पढ़ाई की और आखिरकार डॉक्टर बन गई। इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि आलस्य का त्याग करके मेहनत करने से हम अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।
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समय का मूल्य
नाम- आराध्या शर्मा
उम्र-8 वर्ष

​एक छोटे से शहर में दो बहनें रहती थीं, रिया और जिया। दोनों एक ही कमरे में साथ रहती थीं, लेकिन उनके स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर था। रिया समय की पाबंद थी और अनुशासन को महत्व देती थी, जबकि जिया को देर तक सोना और आलस करना पसंद था।
​एक दिन दोनों को स्कूल में होने वाली एक महत्वपूर्ण प्रतियोगिता के लिए जल्दी तैयार होना था। रिया ने रात को ही सुबह 6:00 बजे का अलार्म लगा दिया था। जब सुबह घड़ी की घंटी बजी, तो रिया तुरंत जाग गई। उसने अपनी नींद पूरी कर ली थी और एक गहरी अंगड़ाई लेते हुए बिस्तर से उठ खड़ी हुई। वह समय पर उठने के कारण बहुत ताज़ा महसूस कर रही थी।
​दूसरी ओर, जिया अपनी चादर ओढ़कर गहरी नींद में सो रही थी। उसे अलार्म की आवाज़ भी सुनाई नहीं दी। रिया ने उसे जगाने की कोशिश की, लेकिन जिया ने सोते हुए ही कह दिया, अभी तो बहुत वक्त है, थोड़ा और सोने दो।
​नतीजा यह हुआ कि रिया समय पर तैयार होकर स्कूल पहुंच गई और उसने प्रतियोगिता में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। जिया जब बहुत देर से उठी, तो उसके पास तैयार होने का भी समय नहीं बचा था। वह जल्दबाजी में स्कूल पहुँची, जिससे उसका पूरा दिन तनाव में बीता और वह प्रतियोगिता में भी पीछे रह गई।
​उस दिन जिया को अहसास हुआ कि जो व्यक्ति समय का सम्मान नहीं करता, समय भी उसका साथ छोड़ देता है। उसने रिया से वादा किया कि अब से वह भी सुबह जल्दी उठेगी और अपने हर काम को समय पर पूरा करेगी।
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विवान शर्मा
उम्र- 7 वर्ष
एक सुंदर सुबह थी। सूरज की किरणें खिड़की से अंदर झाँक रही थीं। कमरे में दो बहनें, भवी और लवी , गहरी नींद में सो रही थीं। अचानक, मेज पर रखे अलार्म घड़ी ने ज़ोर-ज़ोर से बजना शुरू कर दिया।
बड़ी बहन भवी की नींद तुरंत खुल गई। उसने एक लंबी जम्हाई ली और अपने हाथ फैलाकर शरीर को ढीला किया। वह जागकर बहुत तरोताजा महसूस कर रही थी। दूसरी ओर, छोटी बहन लवी अभी भी अपने सपनों की दुनिया में खोई हुई थी और चैन से सो रही थी।
भवी ने सोचा कि आज का दिन बहुत खास है, आज नववर्ष विक्रम संवत 2083 का पहला दिन हैं . इसलिए वह जल्दी उठकर अपने कामों में लग गई। भवी जानती थी कि सुबह जल्दी उठने से न केवल हम स्वस्थ रहते हैं, बल्कि अपने पूरे दिन के कार्यों को समय पर पूरा भी कर सकते हैं।
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पिंकी का संतुलन
नाम –जाह्नवी
उम्र–11 वर्ष
एक शहर में दो बहने रहती थी। एक का नाम था पिंकी और दूसरी का नाम था रीना। वह दोनों पढ़ाई में भी अच्छी थी। वह दोनों रोज सुबह जल्दी उठकर जल्दी तैयार हो जाती जिससे उनका पूरा दिन अच्छा जाता। परंतु एक दिन पिंकी सुबह अपनी अलार्म पर नहीं उठी फिर वह लेट हो गई। रीना जल्दी उठकर अपनी बस में बैठ गई। बल्कि पिंकी को डांट भी पड़ी और वह रोज लेते हो जाती ऐसे करते-करते उसका संतुलन बिगड़ गया अब उसकी कक्षा में भी पढ़ने का मन नहीं करता उसे नींद आती थकान होती। वह पढ़ाई में भी आप अच्छी नहीं थी। फिर उसके माता-पिता में उसे समझाया कि अगर वह ऐसे लेट होती जाएगी तो वह पढ़ने में भी पीछे चली जाएगी। पिंकी ने सोचा कि माताजी और पिताजी से ही कह रहे हैं। उसके बाद पिंकी हमेशा जल्दी तैयार होने लगी और अपना काम समय पर करती।इस तरह करने से वह कक्षा में सबसे अच्छी और सबसे सिंसेरे लड़की बन गई। उसने कक्षा में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किए।
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नाम- गर्वराज सिंह शेखावत
उम्र- 11 वर्ष
एक दिन की बात है, रिया और रोहन अपने घर मे सो रहे थे रिया का अलार्म बज गया और वह उठने की कोशिश करने लगी। उसने अपने भाई रोहन को जगाने की कोशिश की, लेकिन वह अभी भी गहरी नींद मे सो रहा था
रिया ने अपने आप से सोचा, आज मुझे स्कुल जाना। है, लेकिन रोहन अभी भी सो रहा है।" उसने फिर से अलार्म बजाया और रोहन को जगाने की कोशिश की रोहन ने अपनी आँखे खोली और कहा, इस बार क्या हुआ क्यो इतना शोर कर रही हो र रिया ने कहा, अरे. आज हमे स्कुल जाना है। तुम्हे भी उठना चाहिए। रोहन ने कहा,मैं उठ रहा हूं। दोनो भाई बहन ने अपने बिस्तर से उठकर -तैयार होना शुरू किया। जब वे तैयार हो गए, तो उन्होने नाश्ता किया और स्कुल जाने के लिए तैयार हो गए। रिया ने कहा, आज का दिन बहुत अच्छा होगा, हमे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।" रोहन ने कहा, हाँ में भी उत्साहित हूं। दोनो भाई बहन खुशी-खुशी स्कुल जाने। के लिए निकल पड़े।
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(सुबह की पुकार)
नाम - प्रवीण कुमार
उम्र - 10
सुबह के सात बज रहे थे। अलार्म घड़ी ज़ोर-ज़ोर से बजने लगी, जिससे मीनू की नींद अचानक खुल गई। उसने एक लंबी जम्हाई ली और अंगड़ाई भरते हुए बिस्तर से उठने की कोशिश करने लगी। सूरज की किरणें खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे में आ रही थीं।
दूसरी ओर, उसकी छोटी बहन पिंकी अभी भी अपनी गहरी नींद में खोई हुई थी। अलार्म का शोर भी उसे जगा नहीं पाया। मीनू ने मुस्कुराते हुए सोचा कि आज स्कूल के लिए देर हो रही है, इसलिए अब पिंकी को भी जगाना ही पड़ेगा। एक नई सुबह की शुरुआत हो चुकी थी।
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वंशिका सिंह
9 वर्ष
सुबह का समय था ।सोनम बहुत जल्दी उठ गई थीं ।उसने दरवाजा बन्द कर दिया क्योंकि उसे लगा कि सिया नाश्ता करने चली गई हैं। लेकिन जब वो नाश्ता करने गई तब मम्मी नाश्ता बना रही थी । सोनम ने पूछा कि- " मम्मी सिया किधर है ? वो हमारे कमरे में तो नहीं है ।"
सिया उसके कमरे में ही थी लेकिन अंधेरे मे सोनम उसे देख नही पाई । सिया के पापा काम पे चले गए थे लेकिन अभी तक सिया नही मिली थी । मम्मी ने सोनम को बोला कि - " सोनम तुम नहाने के स्थान पे देख लो ,मैं आंगन में देख लेती हूं ।" उन दोनों ने हर जगह देखा । अब वो दोनों बहुत परेशान थे क्योंकि सिया कहीं नही दिख रही थी । और जब सोनम और मम्मी बैठे थे तभी सिया कमरे से नीचे आई । तब मम्मी ने पूछा - "सिया बेटा ,तुम इतनी देर से किधर थी ? " सिया ने बोला - " मम्मी मैं तो कमरे में ही थी ।" मम्मी ने समझाया कि हमे देर से नहीं उठना चाहिए । फिर सबने जूस के साथ लजीज नाश्ता किया ।
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प्यारी सुबह के मीठे सपने
नाम --कृष्णा माहेश्वरी
उम्र --11वर्ष
दो बहने थी-- मीना और टीना। मीना को सुबह जल्दी उठना पसंद नहीं था।तभी अलार्म बजा मीना ने उबासी ली और उठकर बैठ गई।लेकिन टीना अभी भी मीठी नींद में सो रही थी। मीना ने सोचा, "चलो,मैं जल्दी से तैयार होकर टीना को जगाती हूं "।उसी दिन मीना समय पर स्कूल पहुंची और बहुत खुश हुई ।
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शीर्षक नजरिया और नया सवेरा
नाम- नैन्सी
उम्र- 11 वर्ष
सुबह का अलार्म एक जैसा था लेकिन दो बहनों का उसे सुनने का अंदाज अलग आस्था ने जैसे अलार्म सुना वह मुस्कुराहट के साथ अंगड़ाई लेकर उठ गई इसके लिए यह नया अवसर था वही अनमोल अपना चेहरा तकिया में छुपाए सोती रही जो जागते हैं वह अवसरों को जीते हैं जो सोते रहते हैं वह सपनों को देखते रह जाते हैं।
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आलस सबसे बड़ा दुश्मन
नाम: आध्या
उम्र: 8 वर्ष
एक बार की बात है दो बहनें थीं सिया और रिया। सिया बहुत मेहनती थी पर रिया बहुत आलसी थी। एक दिन दोनों बहनों को पिकनिक जाना था। सिया सुबह जल्दी उठकर तैयार हो गई। उसने चिप्स, चॉकलेट से अपना बैग पैक कर लिया और रिया को उठाने चली गई पर रिया उठी ही नहीं और तभी अचानक से वैन आ गई और सिया जल्दी में पिकनिक चली गई।
2 घंटे बाद रिया जागी और उसने इधर-उधर देखा तो उसे कुछ नहीं दिखा तो वह रोने लग गई।
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आलस का परिणाम
नाम- मिष्ठी
उम्र- 10 वर्ष

एक सुबह की बात है। कमरे में दो बहनें सो रही थीं। तभी अचानक अलार्म घड़ी बजने लगी। बड़ी बहन नींद से उठी, अंगड़ाई ली और घड़ी की ओर देखा। वह समझ गई कि स्कूल जाने का समय हो गया है। उसने जल्दी से उठकर अपनी चादर ठीक की और तैयार होने की सोचने लगी। किन छोटी बहन अभी भी गहरी नींद में सो रही थी। बड़ी बहन ने उसे कई बार आवाज़ दी, “उठो, देर हो जाएगी!” पर वह उठने का नाम ही नहीं ले रही थी। अंत में बड़ी बहन तैयार होकर स्कूल चली गई।
कुछ देर बाद छोटी बहन की आंख खुली। उसने घड़ी देखी तो घबरा गई, बहुत देर कर चुकी थी। जल्दी-जल्दी तैयार होकर वह स्कूल पहुंची, लेकिन तब तक उसकी कक्षा शुरू हो चुकी थी। अध्यापक ने उसे देर से आने के लिए डांट लगाई।
छोटी बहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सोचा कि अगर वह समय पर उठ जाती, तो यह सब नहीं होता। उस दिन के बाद उसने तय किया कि वह कभी आलस नहीं करेगी और समय का पालन करेगी।
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सपनों की उड़ान
नाम- खुशी राठौड़
उम्र- 9वर्ष
छोटी सी लड़की थी, उसका नाम मीनू था। मीनू का घर छोटा था। लेकिन उसके सपने बहुत बडे थे। वह अक्सर अपनी खिड़की के पास बैठकर बाहर की दुनिया को निहारती रहती थी। एक रात, जब वह सोने की कोशिश कर रही थी, उसने अपनी आंखें बंद की कि और कल्पना की उसे एक सपना आया उसने पाया कि वह जादुई दुनिया में आ गई है उसने देखा चंद्रमा उसके बहुत करीब है। बहुत सुंदर पेड़-पौधे और वह चमक रहे हैं। जब सुबह वह उठी तब उसे रात का सपना याद आया। उसने अपनी बहन रिया आपको बताया तब उसे समझ आ गया कि हम मेहनत और लगन से अपने सपने पूरा करना चाहे तब वह जरूर पूरे होते हैं।
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आलसी बहने और जादुई अलार्म घड़ी
नाम- पर्णिका मेवाड़ा
उम्र-12 वर्ष
दिया और जिया दो बहने थी, वह बहुत आलसी थी। वह देर रात तक टीवी देखती और सुबह देरी से उठकर स्कूल जाती, इस कारण उनकी पढ़ाई भी खराब हो जाती और परीक्षा में कम अंक प्राप्त करती। उनके जन्म दिवस पर उन्हें एक उपहार मिला, जैसे ही उन्होंने उपहार खोला उन्हें एक अलार्म घड़ी मिली उसमें से आवाज आई। "मैं कोई साधारण अलार्म घड़ी नहीं बल्कि एक जादुई अलार्म घड़ी हूं और मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं, मुझे पता है तुम देर रात तक टीवी देखते हो और सुबह देरी से उठती हो परंतु अब मैं तुम्हारी अच्छी मित्र बनकर तुम्हें सवेरे जल्दी उठा दूंगी लेकिन अगर तुम रात भर टीवी ना देखो तो ही मैं तुम्हारी मदद करूंगी। दोनों बहने समझ गई और अपनी जादुई मित्र के कारण जल्दी उठती और पढ़ाई में दोनों हमेशा प्रथम आती।
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सुबह को आलस भरी कहानी
नाम - प्रियल चौधरी
उम्र - 11 वर्ष
सुबह का समय था। खिड़की से हल्की- हल्की धूप कमरे मे आ रही थी। अलार्म घडी जोर-जोर से बज रही थी। रिया ने अंगड़ाई लेते हुए आँखे खोली और जम्हाई ली। उसने देखा कि सुबह हो चुकी है।
रिया जल्दी उठ गई क्योंकि उसे स्कूल जाना था । उसने घडी की तरफ देखा और घबराकर बोली "अरे ! देर हो रही है।" वह तुरंत बिस्तर से उठ गई। उसी कमरे मे उसकी छोटी बहन पायल अभी भी गहरी नींद में सो रही थी। रिया ने उसे उठाने की कोशिश की, "पायल उठो। स्कूल जाना है।" लेकिन पायल ने करवट बदली और फिर से सो गई।
रिया को थोड़ा गुस्सा आया, लेकिन फिर उसने प्यार से उसे हिलाया। आखिरकार पायल की आँखे खुली। वह बोली, "मुझे और सोना है।" रिया हँसते हुए बोली, "अगर तुम नहीं उठी तो स्कूल के लिए देर हो जाएगी।"
यह सुनकर पायल जल्दी से उठ बैठी। दोनो बहनों ने मिलकर जल्दी-जल्दी तैयार होना शुरू किया। कुछ ही देर में वे दोनों स्कूल जाने के लिए तैयार थीं। इस तरह, थोड़ी आलस के बावजूद दोनो ने समय पर काम पूरा किया।
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नाम- पूर्वी पालीवाल
उम्र- 11 वर्ष
सुबह का समय था। खिड़की से हल्की-हल्की धूप कमरे में आ रही थी। बाहर पक्षियों की मधुर चहचहाहट गूंज रही थी। कमरे के अंदर दो छोटी बहनें अपने-अपने बिस्तर पर सो रही थीं। बड़ी बहन का नाम रानी था और छोटी बहन का नाम गुड़िया।
रानी की नींद अलार्म घड़ी की तेज आवाज से खुल गई। घड़ी लगातार “ट्रिंग-ट्रिंग” कर रही थी। रानी ने आँखें मलते हुए अंगड़ाई ली और उठने की कोशिश की। उसने धीरे-धीरे अपने हाथ-पैर फैलाए और जम्हाई ली। उसे याद आया कि आज स्कूल में उसकी परीक्षा है। इसलिए उसे जल्दी उठना जरूरी था।
लेकिन दूसरी ओर गुड़िया अभी भी गहरी नींद में थी। वह अपने बिस्तर पर आराम से सो रही थी, जैसे उसे दुनिया की कोई चिंता ही नहीं हो। रानी ने मुस्कुराते हुए उसे देखा और सोचा, “गुड़िया तो अभी भी सो रही है, इसे उठाना पड़ेगा।”
रानी धीरे-धीरे अपने बिस्तर से उठी और गुड़िया के पास गई। उसने प्यार से कहा, “गुड़िया, उठो! सुबह हो गई है। स्कूल के लिए देर हो जाएगी।”
लेकिन गुड़िया ने कोई जवाब नहीं दिया। वह बस करवट बदलकर फिर से सो गई।
रानी ने थोड़ा जोर से कहा, “गुड़िया, जल्दी उठो! देखो, सूरज भी निकल आया है।”
फिर भी गुड़िया नहीं उठी। अब रानी को थोड़ी चिंता होने लगी। उसने सोचा कि अगर गुड़िया देर तक सोती रही तो वह स्कूल के लिए देर कर देगी।
रानी ने एक छोटा सा उपाय सोचा। वह खिड़की के पास गई और पर्दे हटा दिए। अब सूरज की तेज रोशनी सीधे कमरे में आने लगी। धूप की किरणें गुड़िया के चेहरे पर पड़ीं। गुड़िया ने आँखें थोड़ी-थोड़ी खोलीं और फिर बंद कर लीं।
अब रानी ने हँसते हुए कहा, “अगर तुम नहीं उठोगी तो मैं तुम्हारा टिफिन भी खा जाऊँगी!”
यह सुनते ही गुड़िया अचानक उठ बैठी और बोली, “नहीं दीदी! मेरा टिफिन मत खाना!”
रानी हँस पड़ी। उसने कहा, “तो फिर जल्दी उठो और तैयार हो जाओ।”
गुड़िया ने नींद भरी आवाज में कहा, “ठीक है दीदी, मैं उठ गई।”
दोनों बहनें अब जल्दी-जल्दी अपने बिस्तर से उठ गईं। उन्होंने अपना बिस्तर ठीक किया और फिर बाथरूम में जाकर तैयार होने लगीं। मम्मी ने रसोई से आवाज लगाई, “बच्चों, जल्दी आओ! नाश्ता तैयार है।”
रानी और गुड़िया जल्दी से तैयार होकर रसोई में पहुँचीं। मम्मी ने उन्हें गरम-गरम पराठे और दूध दिया। दोनों ने खुशी-खुशी नाश्ता किया। गुड़िया ने मम्मी से कहा, “आज मैं जल्दी उठ गई, अब मैं रोज समय पर उठूंगी।”
मम्मी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “बहुत अच्छा! समय पर उठना और अपने काम समय पर करना बहुत जरूरी होता है।”
नाश्ता करने के बाद दोनों बहनों ने अपना स्कूल बैग उठाया। रानी ने अपनी किताबें चेक कीं और गुड़िया ने अपना टिफिन संभाला। पापा उन्हें स्कूल छोड़ने के लिए तैयार खड़े थे।
रास्ते में गुड़िया ने रानी से कहा, “दीदी, आज अगर आप मुझे नहीं उठातीं, तो मैं देर से उठती और स्कूल भी लेट पहुँचती।”
रानी ने मुस्कुराते हुए कहा, “इसलिए हमें समय की कीमत समझनी चाहिए। सुबह जल्दी उठने से हमारा दिन अच्छा शुरू होता है।”
गुड़िया ने सिर हिलाते हुए कहा, “अब मैं रोज जल्दी उठूंगी और आपको परेशान नहीं करूंगी।”
दोनों बहनें हँसते-हँसते स्कूल पहुँच गईं। आज गुड़िया को भी अच्छा लग रहा था कि वह समय पर उठी और बिना किसी भाग-दौड़ के स्कूल आ गई।
शाम को जब वे घर लौटीं, तो गुड़िया ने खुद ही अपना होमवर्क समय पर पूरा किया और रात को जल्दी सोने चली गई। सोने से पहले उसने रानी से कहा, “दीदी, आज का दिन बहुत अच्छा था। मैं कल भी जल्दी उठूंगी।”
रानी ने कहा, “हाँ, यही अच्छी आदत है। जो बच्चे समय का सही उपयोग करते हैं, वे हमेशा सफल होते हैं।”
उस दिन से गुड़िया ने एक नई आदत अपना ली — वह रोज सुबह समय पर उठने लगी। अब न तो उसे देर होती थी और न ही उसे किसी की डांट सुननी पड़ती थी।
…………………………………………………………………………………………………..भाई-बहन का प्यार”
नाम – कनिष्का मीणा
उम्र – 9 वर्ष 6 माह

चिंकी और रोहन दो भाई-बहन थे जो एक ही कमरे में सोते थे।
एक दिन, जब चिंकी गहरी नींद में सो रही थी, तब रोहन अचानक अलार्म घड़ी की आवाज सुनकर जोर से चिल्लाने लगा। चिंकी की नींद खुल गई और उसने रोहन से पूछा, “क्या हुआ? क्यों चिल्ला रहे हो?”

रोहन ने कहा, “चिंकी मुझे एक भयानक सपना आया है। मैं डर गया हूँ।”
चिंकी ने उसे समझाया, “अरे, यह तो सिर्फ एक सपना था। कुछ नहीं हुआ है। तुम फिर से सो जाओ।”

लेकिन रोहन को नींद नहीं आ रही थी। वह बार-बार कह रहा था, “चिंकी, मुझे डर लग रहा है।”
चिंकी ने उसे अपने पास बुलाया और कहा, “आओ, मेरे पास बैठ जाओ। मैं तुम्हें एक कहानी सुनाती हूँ।”

रोहन चिंकी के पास बैठ गया और चिंकी ने उसे एक मजेदार कहानी सुनाई। धीरे-धीरे रोहन की आँखें बंद होने लगी और वह सो गया।
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दो बहनें
नाम- शिखा
उम्र- 11 वर्ष
दोनों बहनें शांति से सो रही थीं जब शिखा अचानक अलार्म घड़ी की आवाज़ सुनकर जाग गई। सुबह के 7:00 बज रहे थे। उसे याद आया कि मिहिका की गायन/तैराकी क्लास है। उसने उसे जगाने की कोशिश की, लेकिन मिहिका गहरी नींद में सो रही थी। कुछ देर बाद, शिखा को प्यास लगी और वह एक गिलास पानी लेने रसोई में गई। जब वह पानी पी रही थी, तो उसे एहसास हुआ कि उसके चारों ओर की दुनिया घूम रही थी। इससे पहले कि वह कुछ कर पाती, उसने देखा कि वह पूरी तरह से एक समानांतर ब्रह्मांड में थी। लोग पहले मिठाई खा रहे थे और फिर अंत में स्टार्टर्स खा रहे थे। परीक्षाओं में नकल करना अनिवार्य था। दिन बाईं ओर था और बायां जूता दाहिने पैर में और दाहिना जूता बाएं पैर में पहना जाता था। यह कितना अच्छा था! शिखा हैरान थी। वह खोजबीन करती रही, तभी उसे अपने चेहरे पर कुछ महसूस हुआ। बहुत दर्द हुआ। फिर उसने अपनी कूदती आँखें खोलीं और महसूस किया कि उसकी बहन उसके साथ थी। जब उसे एहसास हुआ कि यह सब एक सपना था, तो वह दुखी हो गई।
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खुदका काम खुद करें
नाम- दिव्यांश
उम्र- 9 वर्ष
राम नाम का लड़का था। वो अलार्म सुनकर उठ गया। उसने अपना गद्दा समेत दिया और उसने अपनी बहन यशी को भी उठा दिया। उसकी बहन ने कहा कि "भईया आप मेरा गद्दा भी समेत दीजिए।" ऐसे पांच दिन तक चलता रहा । छठे दिन राम ने कहा कि "मैं तुम्हारा गद्दा मैं नहीं समेटूगा।" यशी अपना गद्दा समेत नहीं पाई क्योंकी असकी आदत छूट गई थी। याशी ने राम से कहा "भईया आप मेरी मदद कर दीजिए।" राम ने कहा "ठीक है मैं तुम्हारी मदद करदूगा पर तुम मेरे से वादा करो कि तुम अपना काम खुद करो गी।" याशी ने कहा "ठीक है भईया अब से मैं अपना काम खुद करूंगी।
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वक्त का महत्व
नाम समृद्धि शर्मा,
उम्र 9 वर्ष
एक शहर में एक छोटा-सा घर था।जिसमें दो बहिने रहती थी। बड़ी बहन का नाम लक्ष्मी और छोटी का नाम था गौरी।लक्ष्मी बहुत ही दयालू, सच्ची और मद्‌द‌गार थी एवं वह वक्त-की कीमत समझती थी। वहीं गौरी बहुत घमंडी, झूठी, और बहुत बुरी थी और वक्त कीमत नहीं समझती थी। लक्ष्मी हमेशा सुबह जल्दी उठ जाती थी लेकिन गौरी तो 10:00 बजे उठती थी।
लक्ष्मी रोज अपना और अपनी बहिन का टिफिन बनाकर तैयार रखती थी उसके बाद दोंनो बहिनें साथ में स्कूल जाती थी। गौरी के हमेशा देर से उठने के कारण, एक बार लक्ष्मी और गौरी में झगड़ा हो गया। बात इतनी बढ़ गई की लक्ष्मी घर छोड़कर चली गई।
अगले दिन जब गौरीको सुबह कोई उठाने वाला नहीं था तो गौरी रोज की तरह 10 बजे उठी। जल्दी से तैयार होकर उसने टिफिन बनाया लेकिन देर होने के कारण 11:30 बज चुके थे। उसकी स्कूल की बस छूट गई थी। वह स्कूल जाने में असमर्थ रही।
तब गोरी को वक्त की कीमत समझ में आई। जब 2 महीने बीत गए तब लक्ष्मी लौट कर आई तब गौरी ने लक्ष्मी से माफी मांगी।
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नाम- अपूर्वी शर्मा
उम्र- 10 वर्ष
एक गांव में एक परिवार में दो बहनें रहती थीं—ताशु और हर्षिता। ताशु तीसरी कक्षा में थी और हर्षिता नौवीं में। दोनों की वार्षिक परीक्षाएँ खत्म हुईं। अगले ही दिन हर्षिता की दसवीं कक्षा शुरू हो गई, जबकि ताशु को छुट्टियाँ मिल गईं।
रोज सुबह जल्दी उठना हर्षिता को अच्छा नहीं लगता था। वह ताशु को आराम करते देख स्कूल जाना छोड़ने लगी। इस वजह से उसकी पढ़ाई कमजोर हो गई और उसे रात में जागकर काम पूरा करना पड़ा।
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नाम- शानवी सोनी
उम्र - 10 वर्ष
सुबह का समय था। कमरे मे हलकी हलकी धूप आ रही थी। बड़ी बहन अपने बिस्तर पर लेटी जमाई ले रही थी। पास में रखी अलाम घडी लगातार बज रही थी। लेकिन वह उठने का नाम ही नहीं ले रही थी। उसे अभी और सोना था। दूसरी तरफ छोटी बहन आराम से सो रही थी।
कुछ देर बाद छोटी बहन की आख खुली ‌। उसने देखा कि, दीदी अभी तक सो रही है। अलार्म घड़ी बजती जा रही है। वह उठी और बोली "दीदी उठ जाओ सकूल के लिए देर हो रही है।" लेकिन बड़ी बहन फिर चादर ओढ़ कर सोने लगी। तब छोटी बहन ने खिड़की के परदे खोल दिए। अब बड़ी बहन को मजबूरी में उठना पड़ा। वह जल्दी- जल्दी तैयार होने लगी। पर देर हो चुकी थी‌। उसे बिना नाश्ता किए ही स्कूल के लिए भागना पड़ा। उनहे स्कूल में ड़ाट भी पड़ी। शाम को उसने सोचा कि उसकी गलती आलस की वजह से है। उसने निश्चय किया कि अब वह समय पर सोएगी और सुबह जल्दी उठेगी।
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नाम- चारु
उम्र- 10 वर्ष
एक गांव में एक छोटा सा परिवार रहता था। परिवार में दो बच्चे थे। एक लड़का और एक लड़की, लड़की का नाम अंशु और लड़के का नाम वीर था। अंशु आलसी थी और वीर फुर्तीला था। सुबह जब अलार्म बजता तो वीर उठ जाता था और अंशु सोती रहती थी और वे दोनों हमेशा देरी से विद्यालय पहुंचते थे और मैडम से डांट पड़ती थी। एक दिन दोनों साथ में उठ गये और समय पर विद्यालय पहुंच गये। उस दिन उन्हें अंशु के देर से उठने की वजह से डांट नहीं पड़ी। फिर अंशु को एहसास हुआ कि हमें आलस नहीं करना चाहिए और समय पर उठना चाहिए।
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नाम- आरणा माथुर
उम्र- 10 वर्ष
गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो चुकी थी और सब बच्चे अपने पसंदीदा खेल खेलने का मन बना चुके थे। इसी बात को सोच सोच कर नाम्या और उसकी बहन रिद्धिमा ने भी छुट्टियों में जल्दी उठकर खेलने का सोचा। दोनों बहनों ने अपनी सभी सहेलियों को भी सुबह जल्दी उठकर खेलने के लिए तैयार कर लिया था। उन दोनों ने अपनी सभी सहेलियों को बताया था की हम सुबह जल्दी उठकर अपने दादाजी के साथ सुबह 5 बजे सेंट्रल पार्क जाएंगे और वहां खूब सारे खेल खेलेंगे और झूले भी झूलेंगे।वो दोनों सुबह दादाजी के साथ घूमने जाने की बात से इतनी खुश थी कि उन्होंने अपने सब दोस्तों को कई बार बताया था कि वो सुबह पार्क जाएंगे। उनकी इन बातों से कुछ दोस्तों को ईर्ष्या भी होने लगी। जब उनको लगा कि उनके कुछ दोस्त इस बात से उनसे जलन महसूस कर रहे है तो उन्होंने और उनको जलने के लिए बोला कि दादाजी हमे वहां से आते वक्त बहुत सारे स्वादिष्ट पकवान भीं खिलाएंगे और हमे वहां पर घोड़े की सवारी भी करेंगे। उनके कुछ दोस्तों ने कहा तो हमें भी सुबह अपने साथ पार्क ले चलना,पर उन्होंने साफ मना कर दिया और ये कहा दादाजी अपने नियम के बहुत पक्के है और वो हर हालत में सुबह 5 बजे पार्क के लिए निकल जाते है और किसी के लिए इंतजार नहीं करते।उनकी इन सब बातों से उनकी सब दोस्त उदास हो गई और अपने अपने घर चली गई। उन दो बहनों ने रात को अपनी मम्मी से कह दिया कि वो सुबह जल्दी उठेंगी और दादाजी को आश्चर्यचकित कर देंगी,क्योंकि वो जल्दी उठकर तैयार हो जाएंगी इसलिए दादाजी को उन्हें साथ पार्क लेकर जाना ही पड़ेगा। उन दोनों ने रात को ही अपने सारे खेल के समान जैसे चिड़ी बल्ला,डिस्क, बेट बॉल आदि को अपने पास रख लिया कि सुबह वो जल्दी से सब सामान साथ ले जाएंगे।उन्होंने सुबह घूमने जाने के लिए अपने जूते भी अपने पलंग के पास ही रख लिए। दोनों बहनों ने अपनी ने ये सारी तैयारी गुप्त रखी क्योंकि उनको लगता था कि दादाजी उनको अपने साथ पार्क नहीं ले जाएंगे इसलिए उन्होंने अपनी सारी बाते घर मैं किसी को नहीं बताई। दोनों खाना खाकर जल्दी से बिस्तर में सोने चली गई। पापा ने जब दोनों के पास आकर देखा तो उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ कि आज दोनों इतनी जल्दी सोने कैसे चली गई,रोज तो सबके सोने के बाद भी दोनों की मस्ती चलती रहती है। वो दोनों अपने बिस्तर पर लेट तो गई पर उन्हें नींद नहीं आ रही थी वो बस सुबह घूमने जाने के बारे में सोचे जा रही थी,इस चक्कर में दोनों बस करवट बदलती रही, दोनों बहुत देर तक जागती रही और सुबह घूमने,खेलने,खाने के बारे में सोचती रही। इस तरह सोचते सोचते कब उन्हें नींद आ गई और वो अपनी घड़ी में अलार्म लगाना भी भूल गए थी और दोनों एसी की ठंडी हवाओं का आनंद लेते हुए मुंह तक चादर ओढ़कर सो गई।सुबह दादाजी अपने नियम अनुसार सुबह 5 बजे घूमने के लिए घर से निकल गए पर वो दोनों अपने कमरे में सोती रही। सुबह 7 बजे नम्या ने पक्षियों की आवाज सुनी तो उसने घड़ी की तरफ देखा।घड़ी मै सुबह के 7 बज रहे थे और मम्मी लगातार दोनों बहनों को आवाज लगा रही थी कि उठ जाओ और अपना अपना दूध पियो,पर दोनों सुन नहीं रही थी और सो रही थी। नाम्या ने जल्दी से रिद्धिमा को उठाने की कोशिश की पर वो उठ ही नहीं रही थी और उसे भी सो जाने के लिए कह रही थी। तभी घर के बाहर से उनकी सहेली मोनिका को उनको बुलाने लगी वो जब बाहर गई तो उन्होंने देखा उनकी सब सहेलियां अपनी साइकिल के कर खड़ी हुई है और उन दोनों को चिढ़ाते हुए बता रही है कि वो सुबह जल्दी उठकर पार्क घूम कर आ चुकी है। ये सुन के वो दोनों बहुत दुखी हुई और अपनी गलती पर पछता रही थी,तभी पापा को उनके घूमने जाने की बात को सुनकर उन्हें घूमने चलने के लिए बोला ये सुनकर दोनों बहुत खुश हुई और अपने मम्मी पापा के साथ सेंट्रल पार्क घूमने चले गए।
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आलसी और परीश्रमी"
हियाशा व्यास
उम्र 10 साल
दो बहने थी। एक बड़ी और एक छोटी। बड़ी वाली का नाम था मीरा और छोटी वाली का नाम टीना। मीरा परिश्रमी थी और टीना आलसी। एक दिन दोनों में झगड़ा हो गया कि कौन ज्यादा मेहनत करने वाला है। इस झगड़े को देखकर उनकी मां परेशान हो गई। तो मां ने फैसला किया कि उन दोनों में से जो सुबह जल्दी उठेगा वह परीश्रमी और जो नहीं उठा वह आलसी। दोनों ने मां की बात मान ली। सुबह के 7:00 बजे डिंग डिंग घडी की घंटी बजी। मीरा उठ गई पर टीना सपनों की दुनिया में खोई हुई थी। 15 मिनट के बाद मीरा ने तीन को उठाने की बहुत कोशिश करी पर वह नहीं उठे। थोड़ी देर बाद मां ने उठाया, टीना उठ गई और उसने पूछा कौन जीता? 'मीरा' मां ने जवाब दिया, तो टीना फूट फूट कर रोने लगी, तो मां ने कहा दोनों को" टॉफी मिलेगी" क्योंकि दोनों ने परिश्रम किया। दोनों बहनों को सबक मिला।
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टीना का सपना
लतिका चतुर्वेदी
उम्र 11
टीना और मीना दोनों बहिनें थी। टीना को रात में एक सपना आया जिससे एकदम डरते हुए चिल्लाई और नींद खुल गई और उठकर बिस्तर पर बैठ गई उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर पास में सो रही उसकी बहिन मीना भी उठ गई और टीना से पूछा कि तुम इतनी रात में क्यों बैठी हो तब टीना ने अपने सपने के बारे में बताते कहा कि मुझे बहुत बुरा सपना आया तो मेरी नींद खुल गई जिससे मुझे बहुत डर लग रहा है मीना ने कहा कि तुम मेरे पास आकर सो जाओ फिर वह अपनी बहन के पास जाकर सो गई । सुबह होने पर मीना ने टीना को जगाकर जल्दी से तैयार होकर पिकनिक पर चलने की बात कही।जिससे टीना बहुत खुश हुई।
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आज संडे हैं
नाम- रिद्धीमा
उम्र- 12 वर्ष
एक बार की बात है दो बहन-भाई थे और भाई ने गलती से अलाएम लगा दिया सुबह सुबह है बजे का अलारम बजते ही भाई झूठ गया लेकिन भ्रबहन अभी-भी सो रही फिर भाई ने मुहँ हाथ घोया और फिर ब्रश करने चला गया थोडी देर बाद ने गण्वेश भी यहन लिया था। लेकिन बहन अभी भी सो रही थी भाई ने बहन नजर अनदरास करके ब्रेकफास्ट करने चला गया तभी बहन की आवाज आई की हतनी सुबह कौन आ रहा है जो ढँ तियार हो रहा है। यह सुन कर भाई को बहन के पास जाकर बोला की स्कूल नहीं जाना है क्या तभी बहना सोनी बुधू आज सन डे है तभी अभाई सिन्दा हटाकर देखा की कोई भी आज स्कूल निता जा रहा है। तभी सीधा बेड पर लेटकर भाने सो गया।
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समय का महत्त्व
कदमवीर सिंह
उम्र -12 वर्ष
पंकज और रिया अपने माता-पिता के साथ शहर में रहते थे। उनके माता-पिता बच्चों के उठने से पहले ही ऑफिस के लिए निकल जाते थे। घर में दादाजी बहुत वृद्ध थे, इसलिए दोनों बच्चों को उठने के लिए अलार्म घड़ी का सहारा लेना पड़ता। पंकज रोज समय से पहले स्कूल के लिए तैयार हो जाता लेकिन रिया रोज देरी से उठती। जिससे उनकी स्कूल बस को रोज रिया के लिए इंतजार करना पड़ता। बस-कंडक्टर रोज रिया को समझाता कि आप भी अपने भाई की तरह समय पर आया करो।
एक दिन रिया को कुछ ज्यादा ही देरी हो गई जिससे कंडक्टर ने गुस्से में जाकर उसके पिता के पास फोन पर रिया की शिकायत कर दी। पिता को रिया के देरी से जाने की बात अभी पता चली थी। उन्हें रिया पर गुस्सा आया लेकिन फिर सोचा कि अगर उन्होंने रिया को डांटा तो वह सोचेगी कि पापा मुझसे नफरत करते हैं। इसलिए उन्होंने उसे घर पर जाकर प्यार से समझाया कि समय अनमोल है। तुम इसका सदुपयोग करके अपने जीवन को सुनहरी बना सकते हो।अब रिया को अपनी गलती का एहसास हुआ एवं उसने अपने पिता से वादा किया कि वह कभी देरी से नहीं उठेगी। अब दोनों भाई बहनों ने समय का सदुपयोग करना सीख लिया और आगे चलकर जीवन में कामयाब हुए।
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