किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 76 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (29 अप्रेल 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 76 में भेजी गई कहानियों में यशस्विनी नरूका, दिशिता जैन, संयम जैन क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय विजेता रहे। इनके साथ सराहनीय कहानियां भी दी जा रही हैं।
आलिंद अग्रवाल, 08 वर्ष
एक दिन तीन बच्चे पार्क में पौधा लगा रहे थे। एक गड्ढा खोद रहा था, दूसरा पौधा पकड़ रहा था और तीसरी बच्ची उसे पानी दे रही थी। पास खड़ी दो महिलाएं यह देखकर खुश हो रही थीं। बच्चों ने सीखा था कि पेड़ हमें शुद्ध हवा और छाया देते हैं। इसलिए उन्होंने हर महीने एक पौधा लगाने का संकल्प लिया। पौधा लगाने के बाद उन्होंने उसे अच्छे से पानी दिया और उसकी देखभाल करने का वादा किया। इस छोटी कोशिश से बच्चों ने बड़ा संदेश दिया कि पेड़ लगाना बहुत जरूरी है।
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विवान अग्रवाल, 07 वर्ष
गर्मी की छुट्टियों में रवि, मीना और सोनू नानी के घर आए। पार्क में खेलते समय उन्हें एक सूखा पौधा दिखा और वे आगे बढ़ गए। तभी मम्मी ने कहा, “बेटा, अगर हम प्रकृति का ध्यान नहीं रखेंगे, तो ये हमें कैसे खुश रखेगी?” नानी ने समझाया, “पेड़-पौधे हमें हवा, छाया और जीवन देते हैं, हमें भी उनकी देखभाल करनी चाहिए।” बच्चों को अपनी गलती समझ आई। वे तुरंत लौटे। मीना पानी लाई, सोनू ने मिट्टी ठीक की और रवि ने पौधे को सीधा किया। कुछ दिनों में वह पौधा हरा-भरा हो गया। बच्चे बहुत खुश हुए। नानी मुस्कुराकर बोलीं, “देखा, प्रकृति को थोड़ा प्यार दो, वो तुम्हें दोगुना लौटाती है।”
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सनाया सिंह गहलोत, 13 साल
एक सुंदर रविवार की सुबह थी। आसमान साफ था और हल्की ठंडी हवा चल रही थी। रामू अपने परिवार के साथ पास के बगीचे में घूमने गया। उसके साथ उसकी मां, पिता और छोटी बहन भी थे। बगीचे में हर तरफ हरियाली थी और फूलों की खुशबू मन को खुश कर रही थी। रामू और उसकी बहन दौड़ते-भागते खेल रहे थे। उनके पास एक प्यारा सा कुत्ता भी था, जो उनके साथ इधर-उधर भाग रहा था। थोड़ी दूर पर एक लड़का पतंग उड़ा रहा था। पतंग आसमान में ऊंची उड़ रही थी और उसे देखकर रामू बहुत खुश हुआ। रामू के पिता एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम कर रहे थे और मां उनसे बातें कर रही थीं। मां ने घर से स्वादिष्ट खाना लाया था। खाना खाने के बाद रामू ने अपने पिता से पतंग उड़ाना सीखा। थोड़ी कोशिश के बाद उसकी पतंग भी आसमान में उड़ने लगी। रामू ने सोचा कि परिवार के साथ बिताया समय ही सबसे बड़ी खुशी होती है।
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अयान माथुर, 09 वर्ष
उस शाम का माहौल सामान्य से कुछ अलग था। सुजाता के घर में सभी बहुत उत्साहित थे। सुजाता, उसके दो बच्चे - राहुल और पिंकी, और सुजाता की मां - सरला जी, सभी आज कुछ खास करने की तैयारी कर रहे थे। वे अपने नए घर के बगीचे में एक पौधा लगाने जा रहे थे। सरला जी बहुत खुश थीं। वह चाहती थीं कि उनके बच्चे भी पर्यावरण के प्रति जागरूक हों और उन्हें प्रकृति से प्यार हो। राहुल और पिंकी भी बहुत उत्साहित थे। जब वे बगीचे में पहुंचे, तो उन्हें एक बड़ा सा पौधा मिला। राहुल और पिंकी ने मिल कर पौधे को गड्ढे में रखा और फिर उसे मिट्टी से भर दिया। पिंकी ने पौधे को पानी दिया और फिर सभी ने मिल कर पौधे की देखभाल करने का वादा किया। सरला जी ने कहा, "यह पौधा हमारे नए घर की शुरुआत है।"
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सुरेंद्र सैनी, 18 वर्ष
एक दिन स्कूल के कुछ बच्चे अपनी शिक्षिका के साथ पास के एक सुंदर बगीचे में गए। वहां चारों ओर हरियाली थी और हल्की-हल्की हवा चल रही थी। तभी एक बच्चे ने पौधा लगाने का सुझाव दिया, जिसे सबने खुशी-खुशी मान लिया। दो बच्चे मिलकर जमीन में गड्ढा खोदने लगे। एक बच्चा छोटे पौधे को सावधानी से पकड़कर खड़ा था। पास में खड़ी एक लड़की पानी से भरी बाल्टी लेकर तैयार थी। तभी उनकी शिक्षिका और एक बुजुर्ग महिला उनके पास आईं और बच्चों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने समझाया कि पेड़-पौधे हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी होते हैं। बच्चों ने मिलकर पौधा लगाया और उसे पानी दिया। समय बीतता गया और बच्चों की मेहनत रंग लाई। वह छोटा सा पौधा धीरे-धीरे बड़ा होकर एक हरा-भरा पेड़ बन गया। अब वहां पक्षी आकर बैठते और लोग उसकी छाया में आराम करते।
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हैरी पॉटर, 10 साल
साहिल और रजत नाम के दो दोस्त थे। वे एक दिन गार्डन में खेल रहे थे। वहां पर उन्होंने देखा कि पेड़ पौधे कम होने की वजह से गर्मी बहुत हो रही है। उन्होंने सोचा कि यहां पर पेड़ पौधे लगाए जाएं। वे एक-एक करके पौधे लाए और उन्हें लगाने लगे। वहीं पास से रिया और उसकी मम्मी और दादी गुजर रही थीं। रिया को भी यह काम करने की इच्छा हुई। उसने भी रजत और साहिल के साथ मिलकर पौधे लगाना चालू किया। बच्चों की इतनी अच्छी सोच को देखकर रिया और उसकी दादी और मम्मी को बहुत खुशी हुई। उनके पौधे लगाने से गार्डन पहले से ज्यादा आकर्षक हो गया। साहिल, रिया और रजत को यह सब करके बहुत खुशी मिली और सभी ने हर साल गर्मी के समय पर बहुत सारे पौधे लगाने का प्रण लिया!
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लक्षिता चौधरी, 10 वर्ष
एक दिन कुछ बच्चे अपनी टीचर और दादी के साथ पार्क गए। वहां उन्होंने देखा कि जमीन खाली पड़ी है। टीचर ने बच्चों से कहा, “अगर हम यहां एक पौधा लगाएंगे, तो यह बड़ा होकर पेड़ बनेगा और सबको छाया देगा।” बच्चों ने मिलकर एक छोटा सा पौधा लगा दिया। बच्चों ने तय किया कि वे रोज उस पौधे को पानी देंगे। शुरुआत में उन्हें थोड़ी परेशानी हुई। कभी बहुत गर्मी होती थी, तो कभी पानी लाना मुश्किल हो जाता था। एक दिन एक बच्चा थक गया और बोला कि अब वह नहीं आएगा। तब दादी ने उसे समझाया कि हर बड़ा काम समय और मेहनत से ही पूरा होता है। दादी की बात सुनकर बच्चे फिर से तैयार हो गए। धीरे-धीरे वह पौधा बड़ा होने लगा और कुछ समय बाद एक पेड़ बन गया। इससे हमें सीख मिलती है कि मेहनत और धैर्य से हम कोई भी काम सफल बना सकते हैं।
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नीति बजाज, 11 वर्ष
एक दिन स्कूल से लौटते समय नीति अपनी मां के साथ पास के बगीचे में गई। बगीचा तो सुंदर था, लेकिन कुछ जगहों पर कचरा फैला हुआ था। नीति ने कहा, “मां, अगर हम इसे साफ कर दें, तो बगीचा फिर से सुंदर हो जाएगा ना?” मां मुस्कुराई और बोली, “बिलकुल बेटा… हर बड़ा बदलाव एक छोटी शुरुआत से ही होता है।” बस फिर क्या था… नीति ने तुरंत सफाई शुरू कर दी। किसी ने कचरा उठाया, किसी ने सूखी पत्तियां हटाईं, और किसी ने पौधों में पानी डाला। नीति की मेहनत देखकर वहां आए कुछ और लोग भी प्रेरित हुए और उन्होंने भी सफाई में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में पूरा बगीचा चमक उठा। मां ने गर्व से कहा, “जब हम जिम्मेदारी लेते हैं, तो हम सिर्फ बदलाव नहीं लाते… बल्कि दूसरों के लिए मिसाल बन जाते हैं।”
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स्नेहा पारीक, 09 वर्ष
एक दिन अध्यापिका बच्चों के कहने पर पूरी कक्षा को बगीचे में लेकर गईं। बगीचे का वातावरण बहुत सुंदर था, पेड़ों पर पक्षी चहचहा रहे थे और घास पर नंगे पांव चलने में बहुत आनंद आ रहा था। फिर सभी बच्चों ने अध्यापिका के कहने पर एक-एक पौधा लगाया। सबको पौधा लगाने के बाद बहुत अच्छा लगा। फिर वे हर दिन आकर अपने-अपने पौधों को पानी देते और उनकी देखभाल करते।
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दीपेश कुमार पटेल, 07 वर्ष
तीन दोस्त थे - वेद प्रकाश, योगिता और आदित्य। तीनों बगीचे में घूमने गए। बच्चों के साथ उनकी मम्मी और दादी भी गई थीं। आदित्य ने पूछा, "मम्मी आज इतनी गर्मी क्यों है?" मम्मी ने कहा, "रोज कोई ना कोई पेड़ काटता रहता है, इसलिए धूप और गर्मी ज्यादा रहती है।" वेद प्रकाश ने कहा, "हम तीनों मिलकर पेड़ लगाते हैं, तब गर्मी नहीं लगेगी और वायु प्रदूषण भी नहीं होगा।" तीनों बच्चों की मम्मी और दादी ने बच्चों की प्रशंसा की। तीनों दोस्त पेड़ लगाने लगे। बच्चों की मम्मी और दादी ने भी उनकी सहायता की।
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पार्थ खरे, 12 वर्ष
रोहन, अजय और विनीता दोस्त थे। एक दिन सब ने फैसला किया कि वे अजय के घर पढ़ने जाएंगे। उनके पास दादी मां बैठी थीं। विनीता ने दादी से पूछा, "दादी, पेड़ हमें क्या देते हैं?" दादी मां ने कहा, "पेड़ हमें फल, सब्जियां व छाया देते हैं, वे वातावरण को शुद्ध करते हैं और हमें ऑक्सीजन देते हैं।" बच्चों ने कहा, "अगर पेड़ इतने जरूरी हैं तो हम भी अपनी तरफ से एक-एक पेड़ लगाएंगे।" अगले दिन उन्होंने अजय के बगीचे में पौधे लगा दिए और उनकी रोज देखभाल करने लगे।
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प्रिशा पारख, 11 वर्ष
एक दिन आर्यन और अनन्या ने अपने घर के पास एक खाली मैदान देखा। उन्होंने सोचा कि क्यों ना इसे सुंदर बनाया जाए। दोनों अपने घर से नन्हे पौधे और पानी का जग लेकर आए। आर्यन ने सावधानी से मिट्टी हटाई और अनन्या ने उसमें पौधा लगाकर चारों तरफ से मिट्टी भर दी। उन्हें पता था कि बड़े होकर ये पेड़ सभी को ताजी हवा और छांव देंगे। कुछ दिनों बाद गर्मी बढ़ने की वजह से सारे पेड़ सूख गए। आर्यन और अनन्या उदास हो गए। तभी उन्हें याद आया कि उनकी शिक्षिका ने बताया था कि जब हम पेड़-पौधे काट देते हैं, तो गर्मी बढ़ती है और बारिश नहीं होती। इसलिए हमें पर्यावरण और पेड़ों की रक्षा करनी चाहिए।
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प्रिंस गुर्जर, 10 वर्ष
दो भाई अपने परिवार के साथ अपनी नानी के घर गए। नानी का घर बहुत ही सुंदर और हरियाली से भरा हुआ था। सुबह-सुबह नानी ने बच्चों को बगीचे में बुलाया और कहा, “बच्चों, आज हम सब मिलकर एक नया पौधा लगाएंगे।” सभी ने मिलकर एक गड्ढा खोदा। नानी ने प्यार से एक छोटा सा पौधा उसमें रखा और बच्चों से कहा कि उसे अच्छे से मिट्टी से ढक दें। बड़े भाई ने मिट्टी डाली, छोटे भाई ने पानी डाला और उनकी बहन ने पौधे के पास सजावट की। नानी ने समझाया, “पेड़-पौधे हमें शुद्ध हवा, छाया और फल देते हैं, इसलिए हमें इनकी देखभाल करनी चाहिए।” बच्चों ने वादा किया कि वे रोज इस पौधे को पानी देंगे।
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विहान अग्रवाल, 07 वर्ष
गर्मी की छुट्टियों में बच्चे नानी के घर आए थे। एक दिन नानी और मम्मी उन्हें बगीचे में ले गईं। वहां बच्चों ने मिलकर एक छोटा सा पौधा लगाया। नानी बोलीं, “जैसे तुम प्यार से इसे पानी दोगे, ये बड़ा होकर तुम्हें छाया और फल देगा।” बच्चों ने रोज उस पौधे को पानी देना शुरू किया। कुछ ही दिनों में पौधा हरा-भरा हो गया। मम्मी ने समझाया, “पेड़ हमें साफ हवा देते हैं, इसलिए हमें हर साल नए पौधे लगाने चाहिए और उन्हें कभी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।”
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मोनिशा प्रजापत, 07 वर्ष
राम और श्याम दोनों भाई थे। एक दिन वे दोनों अपनी मां व दादी के साथ सुबह की सैर करने निकले। उन्होंने देखा कि एक बगीचे में एक लड़की पौधों का रोपण कर रही है और उन्हें पानी पिला रही है। उनकी मां व दादी ने बताया कि पेड़-पौधे हमारे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। फिर उन दोनों ने कहा कि हम भी यहां पर पेड़-पौधे लगाएंगे और उनकी सेवा करेंगे।
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तनिष्का खारोल, 07 वर्ष
गांव शोली में तनिष्का अपने दोनों भाइयों—राम और लक्ष्मण, मां और दादी के साथ खेत पर पहुंची। दादी बोलीं, “क्यों न यहां हम सब मिलकर बागवानी करें?” राम ने मिट्टी खोदी, लक्ष्मण ने पौधे लाकर रखे और तनिष्का ने उन्हें मिट्टी में लगाया। दादी ने समझाया, “बेटा, पौधे भी हमारी तरह जीवित होते हैं, इन्हें प्यार चाहिए।” हर दिन स्कूल के बाद तीनों भाई-बहन अपने छोटे से बाग में जाते। धीरे-धीरे वहां रंग-बिरंगे फूल खिलने लगे। तनिष्का मुस्कुराते हुए बोली, “अगर हम सब मिलकर पेड़-पौधे लगाएं, तो हमारा गांव और भी सुंदर बन सकता है।”
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अनाहिता शर्मा, 07 वर्ष
मिष्टी, रोहन और भावेश तीनों भाई-बहन थे। उनकी गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी थीं। दादी ने उनसे कहा, “बच्चों, क्यों न इस बार खूब सारे पेड़ लगाओ?” उनकी मम्मी ने बताया कि घर के पीछे खाली जगह है, वहां हम पेड़ लगा सकते हैं। तीनों बच्चे खुशी-खुशी शाम के समय पौधे लेकर वहां पहुंचे और मिलकर पौधे लगाए। उन्होंने एक-दूसरे से वादा किया कि वे रोजाना उन पौधों को पानी देंगे। कुछ दिनों बाद उन्होंने देखा कि उनके लगाए हुए पौधे बड़े होने लगे हैं।
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निमिषा पाटीदार, 08 वर्ष
एक सुनहरी सुबह, रोहन, रिया और उनके मित्र बगीचे में इकट्ठा हुए। वे पर्यावरण दिवस मनाने के लिए एक नन्हा पौधा लगाने जा रहे थे। रोहन ने सावधानी से मिट्टी खोदी और उसमें एक छोटा सा पौधा रखा। दादी मां मुस्कुराते हुए बोलीं, "देखो, ये बच्चे आज सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए उम्मीद बो रहे हैं।" बच्चों ने पौधे को मिट्टी से ढका और उसमें पानी डाला। दादी मां ने समझाया कि जैसे हम पौधों का ध्यान रखते हैं, वैसे ही पौधे भी फल और छाया देकर हमारा ध्यान रखते हैं।
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दिव्यांश शर्मा, 09 वर्ष
स्कूल में बच्चों को पेड़ लगाने का महत्व सिखाया गया। घर आकर अंशु और उसकी बहन खुशी व एंजल ने अपनी मां के साथ मिलकर बगीचे में एक छोटा पौधा लगाया। मां ने बताया कि पेड़ हमें ऑक्सीजन और स्वच्छ पर्यावरण देते हैं। बच्चों ने रोज उस पौधे को पानी देने का वादा किया। कुछ महीनों बाद पौधा बड़ा होकर हरा-भरा हो गया। इस तरह बच्चों ने प्रकृति की रक्षा करना और पेड़ों से प्यार करना सीखा।
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प्रियांशु, 10 वर्ष
प्रियांशु, गौरव और प्रियांची तीन दोस्त थे। प्रियांशु की आदत थी कि वह हमेशा पेड़-पौधों को तोड़ता रहता था। एक दिन उसके दोस्तों ने उसे बगीचे में ले जाकर सुंदर फूल और पेड़-पौधे दिखाए। उन्होंने उसे बताया कि पेड़-पौधे हमारे लिए कितने उपयोगी होते हैं। यह सब जानकर प्रियांशु को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने दोस्तों के साथ मिलकर बगीचे में नए-नए पौधे लगाए। उसकी यह नई आदत देखकर उसकी मां और दादी बहुत खुश हुईं।
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गार्गी चौधरी, 08 वर्ष
पूनम के तीन शरारती बच्चे थे। एक दिन उन्होंने बगीचे में बहुत सारे पेड़-पौधे बोए। लेकिन बच्चे रोज उन पौधों को उखाड़ देते थे। जब पूनम और नानी को यह पता चला, तो उन्होंने बच्चों को समझाया कि ऐसा करना बुरी बात है, पेड़ हमें सांस देते हैं। बच्चों ने उनकी बात मान ली और ठान लिया कि वे कभी पेड़-पौधे नहीं उखाड़ेंगे और उनकी देखभाल करेंगे।
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उदय शर्मा, 12 वर्ष
सुनीता और उसकी सास ने बच्चों को पेड़-पौधों का महत्व समझाया कि इनसे पर्यावरण हरा-भरा रहता है और हमें ऑक्सीजन मिलती है। एक दिन जब वे शाम को बगीचे में टहलने गईं, तो देखा कि बच्चे पौधे लगा रहे थे। यह देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई कि बच्चों को पेड़-पौधों का महत्व समझ में आ गया है।
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जियांश व्यास, 08 वर्ष
अनुज, प्रियंका और जियांश अच्छे दोस्त हैं। एक बार वे नानी के घर गए, वहां बहुत गर्मी थी। नानी उन्हें एक पेड़ के नीचे ले गईं, जहां बच्चों ने ठंडक महसूस की। नानी ने समझाया कि पेड़ों से ही वातावरण ठंडा और शुद्ध रहता है। अगले दिन वे तीनों नानी के साथ गए और वहां कुछ पौधे लगाकर आए। अब उन्होंने निश्चय कर लिया था कि वे ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएंगे और पर्यावरण को बचाएंगे।
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अड्विका गुप्ता, 07 वर्ष
रवि, सोनू और रीना पार्क में खेलने गए। वहां तेज धूप और सूखी जमीन देखकर रवि उदास हो गया। तभी दादी ने कहा, “बेटा, अगर तुम चाहो, तो इस जमीन को फिर से हरा-भरा बना सकते हो।” अगले ही दिन वे छोटे-छोटे पौधे लेकर आए और उन्हें बड़े प्यार से लगाया। रीना बोली, “ये सिर्फ पौधे नहीं, हमारी उम्मीद हैं।” धीरे-धीरे वह पार्क फिर से हरा-भरा हो गया और वहां चिड़ियों की चहचहाहट लौट आई।
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माधव उपाध्याय, 05 वर्ष
रवि और उसके दोस्त रोज पार्क में खेलने जाते थे। एक दिन उन्होंने देखा कि एक छोटा सा पौधा लोगों के पैरों से दब रहा है। सभी दोस्तों ने मिलकर उस पौधे के चारों तरफ छोटे-छोटे पत्थर लगा दिए और रोज उसे पानी देने लगे। कुछ दिनों बाद वह पौधा मजबूत हो गया। पास खड़ी एक दादी ने मुस्कुराकर कहा, “तुम बच्चे बहुत अच्छे हो, तुमने प्रकृति की मदद की है।”
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