लवे ट्रेक के ऊपर से गुजर रहे ब्रिज से डामर सडक़ हटाई,भुजा हटाने में लगेंगे दो माह, - कई बार लेना होगा रेलवे से ब्लॉक, ब्रिज को 1.5 मीटर ऊंचा करने का लक्ष्य
मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर). डेडिकेटेड फे्रट कॉरिडोर (डीएफसीसी) के तहत दिल्ली से मुम्बई के बीच मालगाडिय़ों के लिए अलग से रेलवे ट्रेक बिछाया जा रहा है। करीब छह माह में ट्रेक पर छह माह बाद डबल डेकर ट्रेनें दौड़ सकेंगी। नोएडा से मदार तक ट्रेक बिछाने का कार्य पहले ही पूरा हो गया है। डबल डेकर ट्रेन की आवाजाही सुगम बनाने के लिए एनएच-आठ पर बने ब्रिज को ऊंचा करने के लिए तोड़ा जा रहा है।
डीएफसीसी ट्रेक पर बनी भुजा को तोड़ा जा चुका है। अब रेलवे ट्रेक पर बनी भुजा को तोडऩे के काम शुरू हुआ है। इसमें में करीब दो माह लगेंगे। इसके लिए कई बार रेलवे से ब्लॉक लेना पड़ेगा। हालांकि ब्रिज के ऊपर से डामर की सडक़ आदि हटाई जा चुकी है।
डेढ़ मीटर किया जाना है ऊंचा
जानकारों की मानें तो भुजा को तोडऩे में करीब दो माह का समय लगने की उम्मीद है। ब्रिज की भुजा कंकरीट की बनी हुई है। भुजा के नीचे से ट्रेनों की २४ घंटे आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में ब्रिज की भुजा को तोडऩे के लिए रेलवे से बार-बार ब्लॉक लेना पड़ेगा। इसके बाद ही ब्रिज की भुजा को तोडऩे का कार्य हो सकेगा। इसके चलते इसे तोडऩे में काफी समय लगेगा।
नई बनने वाली भुजा में स्टील के गर्डर रखे जाएंगे। इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। उल्लेखनीय है कि उक्त ब्रिज की भुजा को १.५ मीटर ऊंचा किया जाना है। इससे डीएफसीसी ट्रेक पर डबल डेकर ट्रेनों की आवाजाही आसानी से हो सकेगी। हालांकि उक्त कार्य को पूरा होने में करीब छह माह का समय लगने की उम्मीद है।
निर्माण कार्य होगा शीघ्र शुरू
एनएच-८ पर डीएफसीसी ट्रेक के ऊपर से ब्रिज की भुजा हटाने के बाद अब भुजा के पास से मिट्टी आदि हटाने का कार्य किया जा रहा है। अब शीघ्र ब्रिज को ऊंचा करने के लिए निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।