आज 411 साल का हुआ किशनगढ़वर्ष 1611 में बसंत पंचमीं को हुई थी स्थापनाबणी-ठणी के कारण चित्रशैली और उद्यमिता के लिए प्रसिद्ध है किशनगढ़
कालीचरण
मदनगंज-किशनगढ़ ञ्च पत्रिका.
अपनी कला-संस्कृति और उद्यमिता के लिए प्रसिद्ध किशनगढ़ बसंत पंचमीं के दिन शनिवार को 411 वर्ष का होगा। विक्रम संवत 1668 (सन् 1611) बंसत पंचमीं को तत्कालीन शासक रहे किशनसिंह ने किशनगढ़ की नींव रखी थी। किशनगढ़ अब विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। गौरवशाली अतीत के साथ किशनगढ़ एयरपोर्ट के माध्यम से यह सीधे वैश्विक उड़ान नक्शे पर भी आ चु़का है। यहां से दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, इंदौर एवं मुम्बई समेत अन्य बड़े शहरों के लिए हवाई सफर के रास्ते भी खुले हुए है। आगामी कुछ वर्षों में एयरपोर्ट का विस्तार होने पर यहां बड़े विमान भी उतर सकेंगे और देशभर के लिए विमान सेवाएं उपलब्ध रहेगी। इतिहास में संत नागरीदास और बणी-ठणी चित्र शैली (राधा स्वरूप) के लिए प्रसिद्ध किशनगढ़ वर्तमान में मार्बल नगरी के रूप मेंं पहचाने जाने लगा है। यहां एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी है। वर्तमान में यहां तेजी से ग्रेनाइट उद्योग भी विकसीत हो चुका हुआ है और ग्रेनाइट हब के रूप में उभरा है।
बसंत पंचमी पर रखी नींव
इतिहासकारों के अनुसार किशनगढ़ के संस्थापक तत्कालीन शासक किशनसिंह ने विक्रम संवत 1668 की माघ सुदी पंचमी (बसंत पंचमी) को गुंदोलाव झील के किनारे कृष्णगढ़ की स्थापना की थी। किशनसिंह का जन्म विक्रम संवत 1632 में कार्तिक सुदी अष्टमी को जोधपुर में हुआ था। किशनगढ़ की चार दीवारी के भीतर का हिस्सा पुराना शहर और काफी समय बाद निकट के बाहरी क्षेत्र की बसावट नया शहर के रूप में हुई। इस दुर्ग को किशनगढ़ और हरिदुर्ग के नाम से भी पुकारा गया है। यहां के तत्कालीन शासकों ने अपनी कुशलता से मुगल राज और ब्रिटिश शासन में अपना महत्व बनाए रखा। इस रियासत में 210 गांव शामिल रहे। महत्वपूर्ण स्थान पर होने के कारण यह व्यापारिक केंद्र के रूप में भी विकसित हुआ। वर्तमान मदनगंज की स्थापना लगभग सौ वर्ष पूर्व रेलवे लाइन के निकट की गई थी। किशनगढ़ स्वामी विवेकानंद के जीवन से भी जुड़ा हुआ है। यहां स्वामी विवेकानंद अपने जीवनकाल में दो बार आए और रामकृष्ण मिशन के माध्यम से सेवा कार्य भी किए।
मौखम विलास का कायाकल्प
किशनगढ़ के गुंदोलाव झील के बीच बीच स्थित मौखम विलास की कायाकल्प यहां राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण ने संत नागरीदास पैनोरमा का विकसित किया। इससे मौखम विलास के साथ ही गुंदोलाव झील के स्वरूप में भी निखार आया। पुराना शहर में प्राचीन नवग्रह मंदिर भी है और इसका जीर्णोद्धार भी किया जा चुका है।
प्रखर उद्यमिता के धनी
किशनगढ़ के निवासी उद्यमिता और व्यापार की प्रतिभा के धनी है। यहां के उद्यमियों और व्यापारियों को प्रोत्साहित किया जाए तो क्षेत्र के विकास में तेजी आएगी और हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। इसके साथ ही वर्तमान में सिलोरा स्थित रीको एरिया काफी विकसित हो चुका है। इसके साथ ही पावरलूम उद्योग और अन्य उद्योग भी यहां संचालित है। यहां नई मिलों और फूड प्रोसेसिंग यूनिटों की स्थापना एवं नए गोदामों का निर्माण किया जाए तो किसानों को उपज के अच्छे दाम मिल सकेंगे जिससे उनकी आर्थिक हालत में सुधार होगा। किशनगढ़ चांदी, जीरा एवं टमाटर के कारोबार में भी प्रदेश का केंद्र बिन्दू रहा है।
शिक्षा केंद्र के रूप में विशेष स्थान
यहां शिक्षा का भी पर्याप्त विकास हो रहा है। बांदरसिंदरी में वर्ष 2009 में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। यहां देशभर के छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए आते है। आरके पाटनी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के साथ ही अजमेर रोड पर आरके पाटनी गल्र्स कॉलेज एवं अग्रवाल गल्र्स कॉलेज भी संचालित है। यहीं नहीं राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में ही केंद्रीय विद्यालय भी संचालित है।