पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार बनने के बाद से किसी वरिष्ठ राजनेता को पश्चिम बंगाल का अगल राज्यपाल बनाए जाने की अटकले लगाई जा रही थीं। लेकिन इस दौर में सेवनानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना का नाम आया है। इस दौर में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी का भी नाम आया है। उक्त पद के लिए बंगाल कैडर के दो सेवानिवृत्त आईपीएस के नाम पर भी विचार किया गया है। लेकिन सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार पूर्व आईपीएस अस्थाना को बंगाल का नया राज्यपाल बनाया जा सकता है।
मोदी-शाह के करीबी पूर्व नौकरशाह बन सकते हैं बंगाल के अगले
राज्यपाल
सीबीआई के विशेष निर्देशक सहित अनेक महत्वपूर्ण पदों पर
रह चुके हैं अस्थाना
कोलकाता
पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार बनने के बाद से किसी वरिष्ठ राजनेता को पश्चिम बंगाल का अगल राज्यपाल बनाए जाने की अटकले लगाई जा रही थीं। लेकिन इस दौर में सेवनानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना का नाम आया है। इस दौर में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी का भी नाम आया है। उक्त पद के लिए बंगाल कैडर के दो सेवानिवृत्त आईपीएस के नाम पर भी विचार किया गया है। लेकिन सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार पूर्व आईपीएस अस्थाना को बंगाल का नया
राज्यपाल बनाया जा सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के विश्वासपात्र होने के कारण उनका पलरा सबसे भारी हैं।
बंगाल के चिटफंड घोटाले की जांच में अस्थाना की भूमिका गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी अस्थाना पिछले 31 जुलाई को दिल्ली पुलिस आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए। वे बीएसएफ सहित विभिन्न फोर्स और संस्थान में महत्वपूर्ण पद रहे हैं। नरेंद्र मोदी के प्रधान मंत्री बनने के बाद उन्हें पहली बार सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किया गया था। बाद में उन्होंने सीबीआइ के दूसरे सर्वोच्च पद, विशेष निदेशक के रूप में कार्य किया। अस्थाना ने बंगाल के रोज वैली, सारदा चिटफंड घोटाले जैसे वित्तीय संस्थाओं के घोटाले की जांच में भी विशेष भूमिका
निभाई थी।
ये भी हैं दौर में
बंगाल के अगले राज्यपाल बनने के दौर में हालही में केन्द्रीय मंत्रिमंडल से हटाए गए मुख्तार अब्बास नकवी और रविशंकर प्रसाद के भी नाम आए थे। लेकिन सरकारी सूत्रों के अनुसार पहले से ही किसी पूर्व आईएएस या आईपीएस अधिकारी को बंगाल का राज्यपाल बनाने के बारे में विचार चल रहा है।
राज्य सरकार को अपत्ति नहीं
सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार के शीर्ष स्तर पर अस्थाना को राज्यपाल बनाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। तृणमूल कांग्रेस शिकायत करती रही थी कि केंद्र ने राज्यपाल धनखड़ को सामने रखकर राज्य सरकार को परेशान कर रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अस्थाना के राज्यपाल बनने पर बंगाल में मोदी सरकार की पहले वाली रणनीति जारी रहेगी।