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ममता बनर्जी पर FIR दर्ज करवाने वाले तुषार कांति ने बताया, इतने दिन क्यों थे चुप

Tushar Kanti Das: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सिलीगुड़ी के एक पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एफआईआर कोलकाता सेंट्रल डिवीजन के हरे स्ट्रीट में दर्ज की गई थी।

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Tushar Kanti Das mamata banerjee

ममता बनर्जी और शिकायतकर्ता तुषार कांति दास

Complainant Tushar Kanti Das Statement: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार एक एफआईआर दर्ज की है। शिकायतकर्ता तुषार कांति दास ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने जो कहा वह हर चैनल पर प्रसारित हुआ और उसकी निंदा हुई। लोग पूछते हैं कि मैंने टीएमसी के सत्ता में रहते हुए शिकायत क्यों नहीं की? यह समय की बात है।

ममता बनर्जी और शिकायतकर्ता तुषार कांति दास

तुषार कांति दास ने कहा कि मुझे उम्मीद थी कि भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) इस मामले का संज्ञान लेगा और जांच करेगा कि उन्होंने ऐसी टिप्पणी क्यों की। लेकिन जब मैंने देखा कि कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसी बीच चुनाव परिणाम घोषित हो गए, तो मुझे लगा कि अगर कोई और शिकायत नहीं कर रहा है, तो मुझे खुद ही करना चाहिए। उनकी टिप्पणियां बेहद निंदनीय थीं, क्योंकि वे दो धार्मिक समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव भड़का सकती थीं।

ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सिलीगुड़ी के एक पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एफआईआर कोलकाता सेंट्रल डिवीजन के हरे स्ट्रीट में दर्ज की गई थी। न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196(1), धारा 351(2) और धारा 352 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

शिकायकर्ता तुषार ने लगाए ये आरोप

शिकायतकर्ता तुषार कांति दास ने आरोप लगाया कि 09/03/2026 को, आरोपी ने कोलकाता में मेट्रो चैनल के सामने एस्प्लेनेड (धर्मतला) में धरना मंच पर शांति भंग करने, सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने, सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने और राज्य की लोकतांत्रिक संरचना को खतरे में डालने के इरादे से भ्रामक भाषण दिया।

चुनाव के बाद दर्ज हुआ मामला

पश्चिम बंगाल में पहले से ही उथल-पुथल भरे चुनावी माहौल के बाद एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। शिकायतकर्ता ने सामाजिक सद्भाव पर बयानबाजी के प्रभाव का हवाला देते हुए पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि चुनावी मर्यादा और संवैधानिक मानकों के उल्लंघन के मामले को सुलझाया जा सके।

जांच में जुटे अधिकारी

कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमें शिकायत प्राप्त हुई है और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मामला दर्ज कर लिया गया है। भाषण के सभी पहलुओं और जिस संदर्भ में यह दिया गया था, उसकी गहन जांच की जा रही है।'