- महानगर में गुणवत्ता हीन बोतल बंद पानी का गोरखधंधा चमकता जा रहा है। शहर व आसपास के इलाकों में आरओ प्लांट लगाकर बोतल बंद पानी के कारखाने खोल दिए गए हैं।
कोलकाता. महानगर में गुणवत्ता हीन बोतल बंद पानी का गोरखधंधा चमकता जा रहा है। शहर व आसपास के इलाकों में आरओ प्लांट लगाकर बोतल बंद पानी के कारखाने खोल दिए गए हैं। नामी गिरामी कंपनियों के 20 लीटर के जार 70 से 80 रुपये के हैं वहीं लोकल जार 20-25 रुपये में मिल जाता है। कम कीमत के कारण इनकी मांग अधिक है, जिसकी वजह से गोरखधंधे के मालिक मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। उपभोक्ता जल संक्रमित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
- शिकायत मिलते ही होगी कार्रवाई :-
गत वर्ष इससे जुड़ी कई शिकायतें मिली थी जिसके बाद नगर निगम ने ईबी के साथ मिलकर अभियान चलाया था। कई अवैध बोतल बंद पेयजल कारखानों में छापे मारे गए और नोटिस भी दिया गया था। इस वर्ष फिलहाल इससे जुड़ी कोई शिकायत व समस्या सामने नहीं आई है। निगम कि ओर से शहरभर में नजर रखी जा रही है। किसी तरह की कोई शिकायत या गड़बड़ी सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। - अतिन घोष, उपमेयर, कोलकाता नगर निगम
- बढ रही है बोतल बंद पानी की मांग :-
बढ़ती गर्मी के साथ ही बोतल बंद पेयजल की मांग भी बढ़ती जा रही है। ज्यादातर शहरवासी अभी निगम की ओर से सप्लाई किए जाने वाले पेयजल की जगह बोतल बंद पानी पर ही निर्भर हैं। लोगों को निगम के पेयजल से अधिक स्वच्छ और निर्मल बोतल बंद पानी लगता है।
- बोतलों से हो सकता है संक्रमण :-
विशेषज्ञों के मुताबिक पानी के 90 फीसदी जार संक्रमित हो जाते हैं। इनमें प्लास्टिक के सूक्ष्म कण और मनुष्य के लिए अन्य हानिकारक तत्व मौजूद रहते हैं।
- क्या कहते हैं डॉक्टर ?
नलों से मिलने वाले पेयजल की तुलना में बोतल बंद पेयजल ज्यादा सुरक्षित है। अत्याधुनिक तरीके से शुद्धीकरण किए जाने की वजह से इनमें बैक्टेरिया नहीं पाए जाते, बशर्ते शुद्धीकरण सही तकनीक से किया गया हो। शुद्धिकरण किए बिना बोतल बंद पानी का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए खुले पानी से अधिक खतरनाक होता है। इसके अलावा बोतल में बंद पानी को एक बार खोलने के बाद जल्द से जल्द इस्तेमाल कर लेना चाहिए। - डॉ.आशीष कुमार प्रधान