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TMC पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर कीर्ति आजाद का बड़ा बयान, बोले- इन्हें बागी कहना शब्द का अपमान

TMC में बढ़ती नाराजगी के बीच Kirti Azad ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें 'बागी' कहना शब्द का अपमान है, जबकि विपक्ष ने BJP पर दबाव की राजनीति का आरोप लगाया।

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Kirti Azad

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद (IANS Photo)

Kirti Azad Statement: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती नाराजगी और असंतुष्ट नेताओं की गतिविधियों ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस बीच TMC सांसद कीर्ति आजाद ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें 'बागी' कहना इस शब्द का अपमान है। वहीं कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने BJP पर राजनीतिक दबाव, डर और लालच के जरिए विपक्षी दलों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

'बागी शब्द' पर कीर्ति आजाद का बड़ा बयान

कीर्ति आजाद ने कहा मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि 'बागी' कहना इस शब्द का अपमान है, क्योंकि हमारे स्वतंत्रता सेनानी जिनमें मेरे पिता भी शामिल थे, वे 'बागी' थे जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचने वाले नेताओं को यदि पार्टी से असहमति थी तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए था। उन्होंने याद दिलाया कि तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसद पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं। कीर्ति आजाद ने कहा कि जिन नेताओं ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और सत्ता का लाभ उठाया, उन्हें पार्टी छोड़ने से पहले जनता के प्रति जवाबदेही दिखानी चाहिए थी।

दबाव और लालच में बदला पक्ष- कीर्ति आजाद

कीर्ति आजाद ने असंतुष्ट नेताओं के रुख को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में उन्होंने एक अलग विपक्षी गुट बनाने का दावा किया, जबकि लोकसभा में वे NDA को समर्थन देने की बात कर रहे हैं। उनके बीच कोई आम सहमति नहीं है। उन्होंने दबाव, धमकी और पैसे के लालच में आकर अपना पक्ष बदला है।

BJP पर लगाया नैतिकता खत्म करने का आरोप

कीर्ति आजाद ने BJP पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद राजनीति में नैतिकता खत्म हो गई है। वहीं कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने भी BJP पर TMC को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा 'यह भारतीय जनता पार्टी की तृणमूल को तोड़ने और कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा है। लगातार हो रही छापेमारी और जिस तरह से अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी को निशाना बनाया जा रहा है, उसे देखा जा सकता है। उनके विधायकों और सांसदों पर दबाव डाला जा रहा है और उन्हें जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।