आमतौर पर पिता के बच्चों के प्रति प्रेम और समर्पण को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। पिता कड़ी मेहनत और लगन से बच्चों की परवरिश करते हैं। बच्चों की हर जायज मांग पूरी करने की कोशिश करते हैं। बच्चे के सपने को पूरा करने के लिए पिता दिन रात कठिन परिश्रम करते हैं। एक बच्चे के लालन-पालन से लेकर जिंदगी में उसे एक सफल इंसान बनाने में मां-बाप दोनों का होना बहुत जरूरी होता है। जिस बच्चे के सिर पर पिता का साया नहीं रहता वह गलत दिशा में भटक जाता है। बिन मां के बच्चे का जीवन कठिन परिस्थितियों से गुजरता है। पिता के प्यार और बलिदान के चलते आज कई बच्चों ने जीवन में अहम मुकाम हासिल किया।
आमतौर पर पिता के बच्चों के प्रति प्रेम और समर्पण को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। पिता कड़ी मेहनत और लगन से बच्चों की परवरिश करते हैं। बच्चों की हर जायज मांग पूरी करने की कोशिश करते हैं। बच्चे के सपने को पूरा करने के लिए पिता दिन रात कठिन परिश्रम करते हैं। एक बच्चे के लालन-पालन से लेकर जिंदगी में उसे एक सफल इंसान बनाने में मां-बाप दोनों का होना बहुत जरूरी होता है। जिस बच्चे के सिर पर पिता का साया नहीं रहता वह गलत दिशा में भटक जाता है। बिन मां के बच्चे का जीवन कठिन परिस्थितियों से गुजरता है। पिता के प्यार और बलिदान के चलते आज कई बच्चों ने जीवन में अहम मुकाम हासिल किया। इन्हीं में से एक है पश्चिम बंगाल के रानीगंज की रीचा गुप्ता, जो आज जिजा जज के तौर पर अपनी सेवा दे रही है। जबकि कई बार एक पिता अपने बच्चे के लिए मां का प्यार का फर्ज भी निभाते है। ऐसा ही एक मामला उत्तर 24 परगना जिले के टीटागढ़ में है। एक दूसरी तस्वीर पश्चिम मिदनापुर के खडग़पुर से आई है, जहां एक क्लब के सदस्य जरूरतमंद बेटियों का सामूहिक विवाह कराकर पिता की भूमिका निभा रहे हैं।
रानीगंज. मेरे पिता ने मुझे हर समय प्रेरित किया। शुरू से मेरी पढ़ाई पर ध्यान दिया। अन्य क्षेत्रों में भी महारत हासिल करवाई। मेरे पिता किशोर गुप्ता का सपना था कि बेटी एक दिन परिवार का नाम पूरे शहर में रोशन करे। मैंने अपनी मेहनत के बल पर सफलता हासिल की। जिले में एलएलबी में टॉपर हुई, उसके बाद ज्यूडिशियल परीक्षा में सफलता हासिल की। आज मैं जिला जज के रूप में अपनी सेवा दे रही हूं।
रीचा गुप्ता, रानीगंज, पश्चिम बंगाल
बैरकपुर. मेरे पिता गत 4 साल से मां का भी फर्ज निभा रहे हैं। परिवार में कलह के चलते मेरी मां जैनब कुलसुम उर्फ मुस्कान मेरी परवाह किए बिना घर छोड़ कर अपनी मां के साथ चली गई। मेरे पिता मोहम्मद शमीम उर्फ सोनू मेरा लालन-पालन कर रहे हैं। कभी भी मां की ममता की कमी महसूस नहीं होने दी। वे अच्छी शिक्षा और संस्कार देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मेरे लिए एक मिसाल कायम की।
मोहम्मद मुजाहिद उर्फ बिट्टू, टीटागढ़
खडग़पुर. शहर के तालबगीचा स्थित वोलकॉन क्लब के सदस्य 6 वर्ष से जरूरतमंद बेटियों का सामूहिक विवाह कराकर पिता की भूमिका निभा रहे हैं। 6 वर्षो में 74 जरूरतमंद बेटियों का विवाह अब तक धूमधाम से कराया। फादर्स डे पर वोलकॉन क्लब के प्रेसिडेंट दीपंकर दास और महासचिव पलाश घोष, सुब्रत टपानी ने पत्रिका को बताया कि उन्होंने 2017 में सामूहिक विवाह का आयोजन शुरू किया था। कोरोना काल में 2 वर्ष सामूहिक विवाह नहीं हो सका। दीपावली व कालीपूजा के दिन सामूहिक विवाह कराने की तारीख की घोषणा होती है। हर वर्ष 3 फरवरी को सामूहिक विवाह का आयोजन करते हैं। कालीपूजा के बाद से ही विवाह योग्य जरूरतमंद बेटियों की तलाश में वे जुट जाते हैं। कई बेटियों के परिजन खुद आकर उनसे सम्पर्क करते हंै। सामूहिक विवाह में मेंहदी की रस्म से लेकर शाही भोज का आयोजन किया जाता है, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल होते हंै। विवाह के दौरान सोने-चांदी के आभूषणों सहित घरेलू जीवन में काम आने वाली तमाम वस्तुएं भेंट की जाती हैं। विवाह के बाद भी क्लब के सदस्य बेटियों की सुरक्षा पर ध्यान बनाए रखते हैं। घोष का कहना है कि हर बेटी का संसार बसे इससे बड़ी खुशी और क्या होगी।