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West Bengal SIR: ‘असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे’, यह कहकर बंगाल में चुनाव अधिकारी ने दिया इस्तीफा, खड़ा हुआ नया विवाद!

पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में एक असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश हो रही है।

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SIR Update: सोर्स- पत्रिका न्यूज

SIR Update: सोर्स- (पत्रिका न्यूज)

पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में लगे एक असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) के इस्तीफे के बाद विवाद खड़ा हो गया है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि कई असली वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश की जा रही है, उन्हें बेवजह 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' मामलों में डाला जा रहा है।

क्या है लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी?

लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी मामले उन वोटरों से जुड़े हैं, जिनकी फैमिली ट्री मैपिंग के दौरान अजीब फैमिली डेटा पाया गया था। अधिकारी ने आरोप लगाया कि ये लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी देश की बड़ी आबादी को बाहर करने की साजिश है।

ERO को सौंपा इस्तीफा

बागनान विधानसभा क्षेत्र के AERO मौसम सरकार ने ERO अचिंत्य कुमार मंडल को अपना इस्तीफा सौंपा। साथ ही SIR से जुड़े अपने कामों से छुट्टी देने का अनुरोध किया।

उन्होंने गुरुवार को यह पत्र सौंपा और यह मामला शुक्रवार रात को तब सामने आया जब ERO अचिंत्य कुमार मंडल ने पत्र मिलने की बात स्वीकार की और कहा कि उन्होंने इसे उच्च अधिकारियों को भेज दिया है।

14 जनवरी से शुरू होगी सुनवाई

मौसम सरकार बागनान ब्लॉक नंबर II के ब्लॉक आपदा प्रबंधन विभाग में एक अधिकारी हैं। बागनान ब्लॉक नंबर II में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी पर सुनवाई 14 जनवरी को शुरू होने वाली है। उस ब्लॉक में ऐसे मामलों की संख्या लगभग 24,000 है।

मौसम सरकार ने इस सुनवाई से पहले AERO के पद से छुट्टी मांगी है। उन्होंने अपने पत्र में बताया कि लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में बताए गए नामों में स्पेलिंग की गलतियां 2002 की वोटर लिस्ट में थीं, लेकिन बाद में, आम नागरिकों ने भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार फॉर्म 8 भरकर उन्हें ठीक कर लिया था। यही कारण है कि नामों की स्पेलिंग में गड़बड़ी पाई जा रही है। यही बात उम्र की गलतियों पर भी लागू होती है।

क्या बोले इस्तीफा देने वाले चुनाव अधिकारी?

इस मामले में मौसम बाबू ने स्थानीय पत्रकारों से कहा- एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर, मेरा मानना ​​है कि इस तरह की लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी का कोई मतलब नहीं है। यह बड़ी संख्या में लोगों और हाशिए पर पड़े समुदायों के लोगों के वोट रद्द करने के इरादे से किया गया है।

सरकार ने आगे कहा- उनके पास लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी को ठीक करने के लिए जरूरी 12 दस्तावेज नहीं हैं। उनके पास वोटर कार्ड, आधार कार्ड और राशन कार्ड हैं, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा- इससे एक खास वर्ग के लोगों और हाशिए पर पड़े समुदायों के कई लोगों को परेशानी होगी। इस बीच, हावड़ा की डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट पी. दीपा प्रिया ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।