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Bengal SIR Row: विधानसभा चुनाव से पहले सीएम ममता ने CEC को लिखा पत्र, BLO की मौत सहित ये मुद्दे उठाए

सीएम ममता बनर्जी ने लिखा, “दो दशकों से अधिक समय में अपनाए गए अपने ही तंत्र और निर्णयों को नकारना मनमाना, अतार्किक और भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ है।”

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CM ममता ने CEC ज्ञानेश कुमार को लिखा पक्ष (Photo-IANS)

Bengal SIR Row: पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले प्रदेश में एसआईआर को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। सोमवार को सीएम ममता बनर्जी ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पांचवां पत्र लिखा है। उन्होंने इस प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताया है। साथ ही दावा किया कि 2002 की मतदाता सूची का AI आधारित डिजिटलीकरण बड़े पैमाने पर डेटा मिसमैच पैदा कर रहा है, जिससे वास्तविक मतदाताओं को गलत तरीके से “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” की श्रेणी में डाला जा रहा है।

सीएम बनर्जी ने लगाया ये आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पिछले दो दशकों से अपनाई जा रही अपनी वैधानिक प्रक्रियाओं को ही नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं की पहचान पहले ही अर्ध-न्यायिक सुनवाई के बाद सही की जा चुकी थी, उनसे दोबारा अपनी पहचान साबित करने को कहा जा रहा है।

पत्र में सीएम ममता बनर्जी ने लिखा, “दो दशकों से अधिक समय में अपनाए गए अपने ही तंत्र और निर्णयों को नकारना मनमाना, अतार्किक और भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ है।”

‘नहीं दी जा रही रसीद’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि SIR के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की कोई उचित रसीद नहीं दी जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया और अधिक संदिग्ध बन जाती है। 

बता दें कि इससे पहले अपने पत्रों में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से राज्य में SIR को तुरंत रोकने की मांग की थी और इसे “अव्यवस्थित, मनमाना और तदर्थ अभ्यास” करार दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि SIR से जुड़े अत्यधिक कार्यभार, तनाव और मानसिक दबाव के कारण बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की मौतें, यहां तक कि आत्महत्याएं भी हुई हैं।

सीएम ने SIR को बताया घोटाला

बता दें कि सीएम ममता बनर्जी पहले भी SIR को “AI की मदद से किया जा रहा एक बड़ा घोटाला” बता चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग इस प्रक्रिया में बीजेपी की आईटी सेल द्वारा विकसित मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा है।

गौरतलब है कि 16 दिसंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में SIR के शुरुआती चरण के बाद 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए।


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