अधिकारियों ने बताया कि दोपहर तक निर्वाचन आयोग को मतदान से जुड़ी करीब 500 शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि सीविजिल ऐप के माध्यम से 375 अन्य शिकायतें दर्ज की गईं। तृणमूल कांग्रेस ने दोपहर तक 700 से अधिक शिकायतें दर्ज कराने का दावा किया, जिनमें से कई ईवीएम में कथित खराबी और केंद्रीय बलों के आचरण से संबंधित थीं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रेकॉर्ड वोट पड़े। गुरुवार शाम 6 बजे तक 91.78% प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला। आजादी के बाद से अब तक का सबसे ज़्यादा वोटिंग पार्टिसिपेशन रिकॉर्ड किया गया। इस दौरान हिंसा, मतदाताओं को डराने-धमकाने और तीन उम्मीदवारों पर हमले की छिटपुट घटनाएं भी हुईं। विश्लेषकों का कहना है कि मतदान में लोगों की भारी भागीदारी बढ़ी हुई राजनीतिक गोलबंदी और एसआईआर के सांख्यिकीय प्रभाव दोनों को दर्शाती है। एसआईआर के तहत राज्य भर में मतदाता सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे।मतदान शाम छह बजे चला। अधिकारियों ने बताया कि निर्धारित समय से पहले मतदान केंद्रों पर पहुंचने वाले मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई। इस कारण मतदान प्रतिशत और बढ़ सकता है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में नाम काटे जाने को लेकर विवाद के बीच राज्य के 16 जिलों में मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में 167 महिलाओं सहित 1,478 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला हुआ।
भारत के चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आज़ादी के बाद से पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज़्यादा पोलिंग परसेंटेज है। चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के हर वोटर को सलाम करता है। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में कतारों में खड़े नजर आए और जैसे-जैसे समय बीतता गया, मतदान की गति तेज होती गई। मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें इस बात का संकेत थीं कि मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच महत्वपूर्ण मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।
पहले चरण के लिए प्रचार में खान-पान की आदतों, सीमा पार से घुसपैठ, समान नागरिक संहिता और संशोधित मतदाता सूची जैसे मुद्दे छाए रहे। दो बड़े प्रतिद्वंद्वियों तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने मतदान से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए कई वादे किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि राज्य में राजनीतिक हिंसा, अराजकता और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार देखने को मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य की बागडोर उनके हाथों में रहने का समय अब समाप्त हो गया है। इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में आसानी से सत्ता में वापसी करेगी और दावा किया कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार 2026 के बाद नहीं टिक पाएगी। जबकि भाजपा पर निशाना साधते हुए तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पार्टी का झूठे वादे करने का एक लंबा इतिहास रहा है, क्योंकि उसने हर बैंक खाते में 15 लाख रुपए और हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का अपना वादा पूरा नहीं किया।
निर्वाचन आयोग ने पर्याप्त संख्या में केंद्रीय बलों को तैनात किया है। आयोग ने विधानसभा चुनावों के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की रेकॉर्ड 2,450 कंपनियों को तैनात किया है, जिनमें लगभग 2.5 लाख कर्मी शामिल हैं। आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए पहले चरण के लिए 8,000 से अधिक मतदान केंद्रों को अत्यधिक संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया है। आयोग ने मालदह, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, कूचबिहार, बीरभूम और बर्धमान जैसे कुछ जिलों को विशेष रूप से संवेदनशील के तौर पर चिह्नित किया है और इन क्षेत्रों के सभी निर्वाचन क्षेत्रों को कड़ी निगरानी में रखा है। सुरक्षा कर्मियों को निगरानी टीम और 2,193 त्वरित प्रतिक्रिया टीम का सहयोग प्राप्त है।
पहले चरण में चुनाव लड़ रहे प्रमुख उम्मीदवारों में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी (भाजपा, नंदीग्राम), पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक (भाजपा, माथाभांगा), राज्य के मंत्री उदयन गुहा (तृणमूल, दिनहाटा), गौतम देब (तृणमूल, सिलीगुड़ी) और अधीर रंजन चौधरी (कांग्रेस, बहरमपुर), मौसम नूर (कांग्रेस, मालतीपुर) शामिल हैं। इस चरण में चुनाव लड़ रहे अन्य प्रमुख उम्मीदवारों में पश्चिम मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर सदर सीट से तृणमूल के प्रदीप सरकार के खिलाफ भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष शामिल हैं।