पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार कड़े मुकाबले के आसार नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग की सख्ती, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और पुख्ता सुरक्षा इंतजामों ने चुनावी जंग को बेहद दिलचस्प बना दिया है। मतदाता लोकतंत्र के उत्सव में हिस्सा लेने के लिए मानस बनाने लगे हैं। आने वाले दिनों […]
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार कड़े मुकाबले के आसार नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग की सख्ती, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और पुख्ता सुरक्षा इंतजामों ने चुनावी जंग को बेहद दिलचस्प बना दिया है। मतदाता लोकतंत्र के उत्सव में हिस्सा लेने के लिए मानस बनाने लगे हैं। आने वाले दिनों में राज्य में चुनावी सरगर्मी और बढ़ेगी। सभी की निगाहें राज्य में पहले चरण के मतदान पर टिक गई हैं। पहले चरण में जहां राज्य के ज्यादा ग्रामीण इलाके हैं तो दूसरे चरण में ज्यादा शहरी इलाके हैं।
एक तरफ तृणमूल कांग्रेस की ओर से सीएम ममता बनर्जी और पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी ने मोर्चा संभाला हैं तो दूसरी तरफ भाजपा की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, हिंदी भाषी राज्यों के सीएम व वरिष्ठ नेता तथा राज्य के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी धुआंधार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। अमित शाह 21 से 27 अप्रैल तक राज्य में ही डेरा डालकर चुनाव रणनीति को अगले स्तर तक ले जाएंगे। तेज होती चुनावी सरगर्मी के बीच पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने गुरुवार को कोलकाता में जन-गण-मन यात्रा के तहत विधानसभा चुनाव के विभिन्न पहलुओं पर राजनेताओं से चर्चा की, चर्चा में मतदाताओं के दिल का हाल टटोला।
प्रदेश भाजपा की महामंत्री शशि अग्निहोत्री का कहना है कि इस बार पार्टी राज्य में कमल खिला सकती है। आम लोगों का झुकाव पार्टी की ओर लगातार बढ़ रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह के अलावा राज्य के तमाम बड़े नेता सुनियोजित तरीके से चुनाव प्रचार कर रहे हैं। चुनाव की तारीख नजदीक आते ही भाजपा और आक्रामक तरीके से तृणमूल के सवालों के जवाब देगी। उनका दावा है कि हम जनकल्याणकारी योजनाएं हर हाल में लागू करेंगे। एक तरफ तृणमूल की लक्ष्मी भंडार और युवा साथी योजना है तो दूसरी तरफ भाजपा की मातृ शक्ति और युवा शक्ति योजना है। इसके अलावा मोदी की गारंटी भी है। भाजपा सरकार बनते ही राज्य में सुशासन कायम किया जाएगा।
औद्योगिक विधि विशेषज्ञ पार्थ सारथी सेनगुप्ता का कहना है कि राज्य में इस बार मुकाबला आसान नहीं नजर आ रहा है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रही है। हालांकि चुनाव नतीजे इस बात पर ज्यादा निर्भर करेंगे कि वोटरों का चुनाव मशीनरी के प्रति कितना विश्वास बन पाता है। पहले चरण के मतदान के बाद चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ होगी। पता चलेगा कि दूसरे चरण में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के लिए क्या हालात बनते हैं। उनका दावा है कि लेफ्ट और कांग्रेस के लिए ज्यादा संभावनाएं नजर नहीं आ रही हैं। दोनों दल कुछ सीटें जीत सकते हैं। इससे ज्यादा की उम्मीद नहीं है। जहां तक भाजपा का सवाल है, पार्टी इस बार उत्तर बंगाल में बेहतर स्थिति में दिख रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए अच्छा काम हुआ। उनका नाम इस प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में जुड़ गया।