राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर हलचल बढ़ गई है। उनके बंगाल दौरे की तारीख बदल कर सात फरवरी की जगह 11 फरवरी कर दी गई है। उनके दौरे की तारीख में परिवर्तन के साथ ही उनके दौरे की अवधि भी घटाकर सिर्फ चार दिन कर दी गई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत तीन दिन राज्य में आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ अतिरिक्त बैठकें करेंगे। ये बैठक पश्चिम बंगाल के दक्षिण के जिलों में संगठन की गतिविधियों पर केंद्रित होंगी। बैठकों पर मंथन किया जाएगा कि क्षेत्र में संघ विशेषकर मौजूदा राजनीतिक स्थिति में अपना प्रभाव और संगठन कैसे मजबूत करेगा। संघ के सूत्रों के अनुसार 13 फरवरी को भागवत बंगाल के नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। बैठक में सामाजिक मुद्दों, शासन और राज्य में जनमत को आकार देने में आरएसएस की भूमिका से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
संघ प्रमुख तब बंगाल दौरे पर आ रहे हैं, जब उनके हाल के विवादित बयान को लेकर आरएसएस राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। भागवत के बयान को लेकर आरएसएस और बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने है। 22 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी और आरएसएस के बीच राजनीतिक और वैचारिक फर्क को उजागर करते हुए अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को भारत का वास्तविक स्वतंत्रता दिवस कहने की कड़ी निंदा की थी। ममता ने भागवत के इस बयान को राष्ट्र-विरोधी करार देते हुए उनसे अपना बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग की थी। पर्यवेक्षक का कहना है कि ममता का बयान बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच चल रही प्रतिद्वंद्विता की लड़ाई के बीच आया है, जिसमें आरएसएस प्राय: भाजपा की रणनीतियों में अहम भूमिका निभाता है।
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भागवत के दौरे में परिवर्तन को संभावित रूप से केंद्र सरकार, आरएसएस और बंगाल सरकार के नाजुक संबंधों को देखते हुए राजनीतिक माहौल में तालमेल बिठाने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
संघ के सूत्रों के अनुसार मध्य और दक्षिण बंगाल के जिलों में अपने संगठनात्मक उपस्थिति को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की संभावनाएं हैं। मध्य बंगाल में आदिवासी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने, हाशिए पर मौजूद समुदायों तक पहुंचने और विभिन्न समूहों के बीच अपना आधार मजबूत करने की आरएसएस की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। बैठकों में राज्य में संघ की ओर से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर चर्चा होने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना भी शामिल होगी।