डीजल की बढ़ती कीमतों और सड़क परिवहन व्यवसाय की समस्याओं के प्रति उदासीनता को लेकर ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के आह्वान पर पश्चिम बंगाल समेत पूरे देश में सोमवार को काला दिवस मनाया गया। परिवहन उद्योग से जुड़े लोगों ने अपने वाहनों पर काला झंडा फहराया
डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर उतरे सड़क पर
कोलकाता/नई दिल्ली. डीजल की बढ़ती कीमतों और सड़क परिवहन व्यवसाय की समस्याओं के प्रति उदासीनता को लेकर ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के आह्वान पर पश्चिम बंगाल समेत पूरे देश में सोमवार को काला दिवस मनाया गया। परिवहन उद्योग से जुड़े लोगों ने अपने वाहनों पर काला झंडा फहराया, मौन विरोध मार्च निकाला। 6 महीने के मोरेटोरियम की मांग, ई-वे बिल और अन्य लंबित मुद्दों के समाधान के लिए कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। एआईएमटीसी के अध्यक्ष कुलतरन सिंह अटवाल और महासचिव नवीन गुप्ता ने बताया कि परिवहन उद्योग पर निर्भर 20 करोड़ से अधिक लोगों की दुर्दशा के प्रति सरकार को संवेदनशील बनाने के लिए हमारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था। हमारी ओर से पीएम नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को ज्ञापन सौंपा गया। ऑल इंडिया कन्फेडरेशन ऑफ गुड्स व्हीकल ओनर्स एसोसिएशन (ईस्ट जोन) और फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रक ऑपरेटर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमृत शेरगिल ने कहा कि परिवहन व्यवसाय बचाओ अभियान के तहत हमने काले झंडे और काली पट्टी के साथ विरोध मार्च निकाला।
--
प्रमुख मांगें
केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क में कमी करे, राज्यों द्वारा डीजल और पेट्रोल पर वैट कम किया जाए। देश भर में डीजल और पेट्रोल की एक समान दर हो, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में तिमाही संशोधन हो।
ई-वे बिल की वैधता के लिए निर्धारित समय सीमा को हर 100 किलोमीटर के लिए 1 दिन के पहले के स्तर पर बहाल किया जाए।
--
डाल रही प्रतिकूल प्रभाव
डीजल की बढ़ती कीमतें व्यवसाय के परिचालन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं, क्योंकि यह परिचालन लागत का 65 प्रतिशत है। टायर, पुर्जों और ल्यूब की लागत में और वृद्धि हुई है। इसके अलावा टैक्स, परमिट फीस, बीमा, टोल, वेतन, ईएमआई का बोझ बढ़ रहा है जबकि माल भाड़ा नहीं बढ़ रहा है।