West Bengal यूजीसी ने हाल ही में एमफिल की डिग्री को यह कहते हुए बंद करने का निर्देश दिया था कि एमफिल मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है। इसलिए इसमें 2024-25 सत्र से प्रवेश न दिया जाए। इसके बावजूद बंगाल सरकार एमफिल में प्रवेश देगी। इस बात की जानकारी पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने दी है।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा है कि राज्य सरकार यूजीसी के उस फैसले का पालन नहीं करेगी जिसमें विश्वविद्यालयों को 2023-24 शैक्षणिक वर्ष के लिए एमफिल कार्यक्रमों में प्रवेश रोकने का निर्देश दिया गया हैं। दरअसल यूजीसी सचिव मनीष जोशी ने 27 दिसंबर को कहा था, ''यूजीसी के संज्ञान में आया है कि कुछ विश्वविद्यालय एमफिल (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) पाठ्यक्रमों के लिए नए आवेदन आमंत्रित कर रहे हैं। इस संबंध में, सभी के ध्यान में लाया जा रहा है कि एमफिल मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है।"
उन्होंने आगे कहा कि यूजीसी (पीएचडी डिग्री के लिए न्यूनतम अर्हता एवं प्रक्रिया) नियमावली, 2022 का नियम 14 स्पष्ट रूप से कहता है कि उच्च शिक्षण संस्थान एमफिल पाठ्यक्रम में प्रवेश की कोई पेशकश नहीं करेंगे।
इसी मुद्दे पर जब गुरूवार को पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु से पूछा गया कि क्या पश्चिम बंगाल भी यूजीसी के इस फैसले का पालन करेगा तो जवाब में बसु ने यूजीसी के निर्देशों को मानने से साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य का उच्च शिक्षा विभाग शिक्षाविदों की विशेषज्ञ समिति द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों का ही पालन करेगा और उसी के अनुसार चलेगा। बसु ने कहा, "राज्य विश्वविद्यालयों में एमफिल पाठ्यक्रमों के संबंध में राज्य की अपनी नीतियां हैं और उनके साथ छेड़छाड़ करने का कोई कारण नहीं है।"
गौरतलब हैं कि यूजीसी ने देश के विश्वविद्यालयों को एमफिल पाठ्यक्रमों की पेशकश के खिलाफ अपने हालिया पत्र में कहा है कि यह एक मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है और छात्रों को ऐसे कार्यक्रम में प्रवेश लेने के प्रति आगाह किया है। नवंबर 2022 में यूजीसी द्वारा एमफिल कार्यक्रम बंद कर दिया गया था। यूजीसी ने छात्रों को किसी भी एमफिल कोर्स में दाखिला न लेने की भी सलाह दी है।