मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म में घटिया कपड़े के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही सरकार ने राज्य में पिछले 15 वर्ष के दौरान जारी किए गए सभी पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है।
सुवेंदु सरकार ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यों की समीक्षा शुरू कर दी है। रोजगार, शिक्षा, नगर निगम भर्ती से लेकर राशन और आवास तक कई क्षेत्रों में पूर्व सरकार के खिलाफ अंगुली उठी है। इस बीच राज्य सरकार की ग्रामीण आवास योजना बांग्ला बाड़ी के तहत लाभार्थियों की पात्रता जांच प्रक्रिया को लेकर नया नोटिफिकेशन जारी किया गया है। पंचायत एंड रुलर डवलेपमेंट विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के अनुसार विभिन्न जिलों में लाभार्थियों की सूची का सत्यापन, पात्र एवं अपात्र लोगों की जांच तथा स्थायी प्रतीक्षा सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा स्कूल यूनिफॉर्म में भ्रष्टाचार भी जांच के दायरे में हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म में घटिया कपड़े के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही सरकार ने राज्य में पिछले 15 वर्ष के दौरान जारी किए गए सभी पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है। राज्य पिछड़ा वर्ग विकास विभाग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया कि वे वर्ष 2011 से 2026 तक जारी किए गए एससी, एसटी और ओबीसी प्रमाणपत्रों का पुनः सत्यापन करें।
सरकारी निर्देश के अनुसार बांग्ला बाड़ी के तहत जिन परिवारों के नाम पहले से अस्थायी सूची में शामिल हैं, उनके दस्तावेज, आवास की स्थिति, आय तथा जमीन संबंधी जानकारी की जांच की जाएगी। जिन लाभार्थियों के पास पक्का मकान है या जो योजना की शर्तों को पूरा नहीं करते, उन्हें सूची से हटाया जा सकता है। वहीं वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा। योजना के तहत मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार, कच्चे मकान में रहने वाले लोग तथा राज्य के स्थायी निवासी पात्र माने जाएंगे। जिला प्रशासन एवं पंचायत स्तर पर सर्वे और फिजिकल वेरिफिकेशन का कार्य शुरू कर दिया गया है। सरकार की ओर से लाभार्थियों से अपील की गई है कि वे आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी, बैंक खाता और जमीन से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें ताकि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो। पात्रता जांच पूरी होने के बाद अंतिम लाभार्थी सूची प्रकाशित की जाएगी।
राज्य सरकार ने प्रस्तावित अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थियों के सत्यापन और उनसे जुड़े आंकड़ों में सुधार करने का अभियान शुरू किया है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य लाभार्थियों की सूची से अपात्र नामों को हटाना और वास्तविक लाभार्थियों का उचित सत्यापन सुनिश्चित करना है। अधिसूचना में कहा गया है कि लक्ष्मी भंडार योजना के सभी मौजूदा लाभार्थियों को अन्नपूर्णा योजना में शामिल किया जाएगा, सिवाय उन लोगों के जो मृत, स्थानांतरित, हटाए गए या अनुपस्थित मतदाता के रूप में एसआईआर-2026 के दौरान चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद हटाए गए तथा मतदाता पर्ची वितरण के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट पाए गए लोगों को भी योजना से बाहर रखा जाएगा।
सीएम ने राज्य शिक्षा विभाग से सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों को ममता बनर्जी सरकार द्वारा वितरित यूनिफॉर्म की घटिया गुणवत्ता पर रिपोर्ट मांगी है। एक अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ समीक्षा बैठक की। शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि पिछली सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए चुना था। 2011 में ममता बनर्जी सरकार के सत्ता में आने के बाद, राज्य ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा आठ तक के छात्रों के लिए तैयार यूनिफॉर्म एमएसएमई विभाग द्वारा आपूर्ति की जाएगी। सुवेंदु यह जानना चाहते हैं कि कोटेशन कैसे दिया गया था और उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि वित्त विभाग ने गुणवत्ता की जांच किए बिना ही धनराशि कैसे आवंटित कर दी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यूनिफॉर्म की गुणवत्ता की जांच के बाद ही धनराशि आवंटित की जाएगी।