कोलकाता

बड़ा सवाल: क्या टाटा समूह की सिंगूर में होगी वापसी, बदलेगी बंगाल की तस्वीर

राज्य सरकार चाहती है कि टाटा समूह हुगली जिले के सिंगूर में फिर से लौटे। उन्होंने कहा कि इससे एक मजबूत संदेश जाएगा कि बंगाल फिर से निवेश के लिए तैयार है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या टाटा समूह की सिंगूर में वापसी होगी और बंगाल की तस्वीर बदलेगी।

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Jun 01, 2026
बड़ा सवाल: क्या टाटा समूह की सिंगूर में होगी वापसी, बदलेगी बंगाल की तस्वीर

वर्ष 2008 में टाटा समूह की नैनो परियोजना के पश्चिम बंगाल के सिंगूर से चले जाने और लगभग तैयार कारखाने को बाद में तोड़े जाने से कॉरपोरेट जगत में बड़ा झटका लगा। बंगाल में नीतिगत अनिश्चितता और बड़े औद्योगिक निवेशों के प्रति विरोध की स्थायी धारणा बन गई। करीब दो दशक बाद भाजपा उसी स्थान को उद्योगों के पलायन के प्रतीक से उद्योगों की वापसी के प्रतीक के रूप में स्थापित करना चाहती है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि टाटा समूह हुगली जिले के सिंगूर में फिर से लौटे। उन्होंने कहा कि इससे एक मजबूत संदेश जाएगा कि बंगाल फिर से निवेश के लिए तैयार है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या टाटा समूह की सिंगूर में वापसी होगी और बंगाल की तस्वीर बदलेगी।

देश के कई उद्यमी राज्य में निवेश में रुचि दिखा रहे

संवाददाताओं से बात करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि देश के कई उद्यमी राज्य में निवेश में रुचि दिखा रहे हैं। रिलायंस समूह के अलावा अन्य समूह से भी हमारी बातचीत चल रही है। टाटा समूह की सिंगूर वापसी से लगभग दो दशक पहले नैनो परियोजना के राज्य से बाहर जाने के बाद निवेशकों के बीच बना गलत संदेश मिटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि टाटा समूह वापस आए और वो भी सिंगूर में। हम पूरे देश और दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि अब पश्चिम बंगाल निवेशकों के लिए अनुकूल है और निवेश का स्वागत करने के लिए तैयार है।

निवेश के माहौल को नुकसान पहुंचा

सिंगूर से 2008 में नैनो परियोजना के बाहर जाने और ममता बनर्जी के नेतृत्व में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के बाद पैदा हुए विवाद का जिक्र करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि टाटा मोटर्स संयंत्र को हटाया जाना बंगाल की उद्योग-विरोधी छवि का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा कि टाटा मोटर्स के जाने से राज्य के निवेश के माहौल को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा है। कभी भारत का विनिर्माण केंद्र रहा पश्चिम बंगाल पिछले कई दशकों में लगातार पिछड़ता गया है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि टाटा समूह सिंगूर या बंगाल में किसी भी रूप में लौटे, चाहे वह ऑटोमोबाइल क्षेत्र हो या कोई अन्य क्षेत्र। वे देश के सबसे पुराने, सम्मानित और भरोसेमंद औद्योगिक समूहों में से एक हैं।

भूमि अधिग्रहण नीतियों में बुनियादी बदलाव जरूरी

भट्टाचार्य ने कहा कि भूमि अधिग्रहण नीतियों में बुनियादी बदलाव के बिना बंगाल में औद्योगिक पुनर्जागरण संभव नहीं है। उन्होंने कहा, हमारे पास कोई व्यापक भूमि नीति नहीं थी। ममता बनर्जी ने घोषणा कर दी थी कि सरकार उद्योगों के लिए एक इंच भूमि भी अधिग्रहित नहीं करेगी और कंपनियों को सीधे जमीन खरीदनी होगी। ऐसी अव्यावहारिक और त्रुटिपूर्ण नीति के तहत उद्योगपति घर-घर जाकर जमीन नहीं खरीद सकते। अन्य राज्यों से तुलना करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर पश्चिम बंगाल को नजरअंदाज किया है। यदि टाटा मोटर्स के खिलाफ आंदोलन ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को सत्ता तक पहुंचाने और 34 वर्ष के वाम मोर्चा शासन को समाप्त करने में मदद की थी, तो दूसरी ओर यह कई निवेशकों की नजर में बंगाल के औद्योगिक पतन का प्रतीक भी बन गया।

भाजपा सरकार के बाद निवेशकों की सोच बदलनी शुरू

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि राज्य में भाजपा सरकार के बाद निवेशकों की सोच बदलनी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा, आज एक उद्योगपति मुझसे मिले। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना संयंत्र और कारोबार बंगाल से बाहर ले जाने का फैसला कर लिया था, लेकिन चार मई के बाद उन्होंने अपने विचार बदल दिए। सेमीकंडक्टर समेत अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावना बन रही है। बंगाल को पूर्व का प्रवेश द्वार बताते हुए भाजपा नेता ने कहा कि राज्य की भौगोलिक स्थिति, बंदरगाह और बेहतर संपर्क व्यवस्था उसे निवेश आकर्षित करने का स्वाभाविक लाभ देती है, बशर्ते नीतिगत स्थिरता बहाल की जाए।

इनका कहना है

टाटा जैसे कई उद्योगपति पश्चिम बंगाल में आना चाहते हैं। सरकार बदलते ही उनके फोन आने शुरू हो गए हैं। हमने उनसे कहा है कि हम आपको यहां बुलाएंगे और आपको व्यापार करने और उद्योग लगाने की भी व्यवस्था देंगे, लेकिन 1-2 महीने का समय लगेगा।
दिलीप घोष, मंत्री, पश्चिम बंगाल

Published on:
01 Jun 2026 05:44 pm
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