ढप पर धमाल का सिलसिला शुरू, होली नजदीक आते ही फाल्गुन के रंग में रंगने लगे लोग
होली नजदीक आते ही लोग फाल्गुन के रंग में रंगने लगे हैं। कॉम्प्लेक्स और बैंक्वेट हॉल में होली प्रीति सम्मेलन की शुरुआत हो रही है वहीं बड़ाबाजार सहित महानगर की गद्दियों और घरों में वसन्त पंचमी से शुरू ढप पर धमाल गाने का सिलसिला परवान चढ़ रहा है। देर रात तक चलने वाले इन आयोजनों मे राजस्थानी लोकगीतों के साथ श्याम बाबा और करणी माता के भजनों के अलावा मरुधरा के वीरों की शौर्यगाथा भी गाई जा रही है। बुधवार रात बड़ाबाजार में इसी प्रकार का एक धमाल आयोजन हुआ। लाल चंद शर्मा ने बताया कि होली ऐसा अनूठा पर्व है जिसमें न केवल मरुधरा की लोक कला और संस्कृति को प्रदर्शित करते है बल्कि दो हजार किलोमीटर दूर प्रदेश में रहकर भी सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हैं। उन्होंने बताया कि जब भी अवसर मिलता है ....कण कण स्यू गूंजे जय-जय राजस्थान जैसे गीतों का भी सामूहिक गायन किया जाता है।
---नए और पुराने गीतों की श्रृंखला के साथ भजन
फागोत्सव की शुरुआत होते ही होली के हंसी ठिठोली भरे नए और पुराने गीतों की श्रृंखला के साथ ...गणपत बलकारी जी फतेह म्हारी आज करो और महर करो मात भवानी विनती करां बारम्बार जैसे भगवान गणेश और करनी माता के भजन भी खूब गाये जा रहे हैं। गायन मण्डली समूह के सदस्य लक्ष्मीनारायण ओझा ने बताया कि होली का प्रारम्भ ठाकुरजी से हुआ है। ऐसा नही है कि इस अवसर पर केवल व्यंग्यात्मक गीतों का गायन हो। सनातन धर्म में किसी भी कार्य के शुभारंभ में गजानंद को मनाने की आराधना रही है इसलिए गायन की शुरुआत गणेश वंदना से की जाती है। फागोत्सव में श्याम बाबा, हनुमान, राम सीता तथा देशनोक की करनी माता के भजन पूरे भाव से गाते हैं।
--मरुधरा की शौर्यगाथा का बखान
गायन में विभिन्न लोकगीत, हास्य व्यंग्य तथा भजन गाये गए वहीं मरुधरा की शौर्यगाथा का भी बखूबी बखान किया गया। हल्दी घाटी में समर लड्यो, वो चेतक रो असवार कठे, मायड़ थारो वो पूत कठे वो महाराणा प्रताप कठे के गायन पर लोग झूम उठे।