
Jwala Prasad Sharma: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव के 70 वर्षीय ज्वाला प्रसाद शर्मा ने अपने जज्बे और दृढ़ संकल्प से लोगों का ध्यान खींचा है। उन्होंने श्रीनगर में आयोजित कश्मीर मैराथन 2026 में 21 किलोमीटर की दौड़ नंगे पैर पूरी की। खास बात यह रही कि उस समय तापमान करीब 2 डिग्री सेल्सियस था। इतनी ठंड में भी ज्वाला प्रसाद धोती और चश्मा पहनकर दौड़ते नजर आए। उनकी इस दौड़ का मकसद कोई पदक जीतना या रिकॉर्ड बनाना नहीं था। वह अपने क्षेत्र के युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए रोजाना कुछ समय दौड़ने और व्यायाम करने की आदत जरूरी है।
ज्वाला प्रसाद शर्मा ने श्रीनगर में आयोजित कश्मीर मैराथन 2026 में हिस्सा लेकर 21 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। दौड़ के दौरान तापमान करीब 2 डिग्री सेल्सियस था। इसके बावजूद उन्होंने जूते पहनने के बजाय नंगे पैर दौड़ने का फैसला किया। धोती और चश्मे में मैराथन दौड़ने का उनका अंदाज भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी सक्रियता और संकल्प ने यह संदेश दिया कि जीवन में किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, ज्वाला शर्मा का उद्देश्य अपनी उपलब्धि का प्रदर्शन करना भर नहीं है। वह चाहते हैं कि उनकी इस पहल से कोंडागांव और बस्तर क्षेत्र के युवा भी अपनी सेहत के प्रति जागरूक हों।
ज्वाला प्रसाद शर्मा ने अपने क्षेत्र के युवाओं को संदेश देते हुए कहा, "बस्तर जंगल नहीं, जज्बा है।" उनका कहना है कि आज मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल और आलस्य के कारण लोग शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं। इसका असर उनकी जीवनशैली और स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। वह चाहते हैं कि युवा मोबाइल पर अधिक समय बिताने के बजाय मैदान में उतरें और नियमित रूप से दौड़ने की आदत डालें। उनके मुताबिक, स्वस्थ रहने के लिए शुरुआत में ही लंबी दूरी तय करना जरूरी नहीं है। रोज सुबह कम से कम 30 मिनट दौड़ने या शारीरिक गतिविधि करने से सक्रिय जीवनशैली की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
कोंडागांव के नौजवानों से अपील करते हुए ज्वाला शर्मा ने कहा कि वे हर सुबह कम से कम 30 मिनट दौड़ने के लिए समय निकालें। उन्होंने अपनी मैराथन का उदाहरण देते हुए कहा, "अगर 70 साल का मैं कश्मीर की ठंड में नंगे पैर 21 किलोमीटर दौड़ सकता हूं, तो छत्तीसगढ़ की गर्मी में आप क्यों नहीं?" उनका यह संदेश युवाओं को अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों को शामिल करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश है। ज्वाला शर्मा का मानना है कि नियमित अभ्यास, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के जरिए लोग अपनी फिटनेस पर ध्यान दे सकते हैं।
ज्वाला प्रसाद शर्मा के लिए कश्मीर मैराथन में हिस्सा लेना केवल दौड़ पूरी करने का मामला नहीं था। वह अपनी भागीदारी के जरिए युवाओं को यह बताना चाहते हैं कि उम्र को सक्रिय जीवनशैली के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। उनकी पहल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को मोबाइल और निष्क्रिय दिनचर्या से बाहर निकालकर खेलकूद और व्यायाम की ओर प्रेरित करना है।
70 वर्ष की उम्र में 21 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने वाले ज्वाला शर्मा ने अपने संदेश के जरिए फिटनेस, आत्मविश्वास और संकल्प की अहमियत सामने रखी है। कोंडागांव के ज्वाला प्रसाद शर्मा की यह पहल स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है। उनका संदेश साफ है—स्वस्थ रहने के लिए रोजाना थोड़ा समय खुद को दें और अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।