
कोंडागांव. इस जिले को शिल्पियों की नगरी के नाम से पहचाना जाता है पर यहां के शिल्पियों को आज तक किसी अलंकरण से नवाजा नहीं गया। ये शिल्पी देश-विदेशों में राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। शिल्पियों के हुनर से कई राज्य व राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार तो मिले पर अंलकरण से ये अब तक दूर हैं।
600 से अधिक शिल्पी पंजीकृत हैं
कई शिल्पी हैं जिन्हें राज्यपाल व राष्ट्रपति के हाथों पुरुस्कृत किया गया है। उनकी कलाकृति देश के साथ ही विदेशों के संग्रहालयों व मल्टीनेशनल कंपनियों की शोभा बढ़ा रही है। जिले में 600 से अधिक शिल्पी पंजीकृत हैं। लौहशिल्प में ही 300 से अधिक का पंजीयन है।
चली आ रही पुश्तैनी परंपरा
आज के समय में जब हर वर्ग व समाज के लोग अपने पुश्तैनी काम को छोड़कर नई दिशा में ढल रहे है, ऐसे में शिल्पी ही हैं जो अपनी पुश्तैनी काम को करते आ रहे हैं। वर्ष 1970 में राष्ट्रपति से घड़वा शिल्प के लिए पुरुस्कृत सुखनंदन पोयाम की माने तो शिल्पियों को भी अलंकरण से नवाजा जाना चाहिए।
शिल्पी समाज अलंकरण से वंचित है
वे कहते है कि प्रदेश में शिल्पियों की कमी नहीं है। कई हुनरमंद शिल्पी हैं पर इस ओर कोई ध्यान नहीं देता। इस कारण शिल्पी समाज अलंकरण से वंचित है। उनके बेटे रामचरण पोयाम व नाती राकेश पोयाम को भी राज्य स्तर के कई पुरस्कार मिले हैं पर इनका भी यही मानना हैं कि शिल्पियों को भी पद्मश्री- पद्मभूषण जैसे अंलकरण से सम्मानित किया जाना चाहिए।
एक दफे भेजा गया था प्रस्ताव
हस्त शिल्प विकास बोर्ड के स्थानीय प्रभारी अधिकारी सीआर नाग ने बताया कि राज्य कार्यालय से वर्ष 2014-15 में पद्मश्री/पद्मभूषण के संबंध में नाम मांगा गया था। इस आधार पर यहां से नामित कर भेजा गया था, इसके बाद इस संबंध में कोई जानकारी नहीं आई।
ये भी पढ़ें
भारतीय जनता पार्टी की जिला ईकाई इन दिनों जिले भर में घूम-घूमकर बोनस आभार यात्रा में जुटी हुई है। यह रैली शुक्रवार को दहीकोंगा पहुंची जहां नान अध्यक्ष लता उसेंडी, जिलाध्यक्ष मनोज जैन ने केंद्र व राज्य सरकार के द्वारा किये जा रहे कार्य व उनके द्वारा लागू किये गए योजनाओं की जानकारी दी। इसमें किसानों के साथ ही आम जनता के लिए लागू की गई नीति व योजनाओं को बारी-बारी से ग्रामीणों को बताया। बाजार परिसर में भी आभार रैली रथ के साथ पहुंची। इस मौके पर जितेंद्र सुराना, प्रेमसिंह नाग, बालसिंह बघेल, लुभा नाग, लखमूराम मौर्य, सुदरूराम कश्यप, सोनारूराम मंडावी सहित अन्य मौजूद थे।