बिना चिंतन के किया गया अध्ययन सिर्फ और सिर्फ मेहनत की बर्बादी ही है।
कोरबा . दिनभर में जितना भी पढ़ें उसका चिंतन व मनन करें। जब ऐसा लगे कि कुछ भूल गए हों या फिर पढा हुआ वाक्य याद न आ रहा हो, तब तत्काल किताब खोलकर इसे देख लें। इस तरह पढ़ाई करने से पढ़ा हुआ ज्ञान हमेशा दिमाग में रहेगा। लंबे समय तक आप इसे याद रख पाएंग। बिना चिंतन के किया गया अध्ययन सिर्फ और सिर्फ मेहनत की बर्बादी ही है।
बोर्ड परीक्षाओं के समय शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बल्गीखार की व्याख्याता ललिता साहू ने पत्रिका डॉट कॉम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे कार्यक्रम में इस तरह के कई महत्वपूर्ण टिप्स छात्रों के लिए बताए। जोकि परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे।
व्याख्याता ललिला को हाल ही में शिक्षा श्री पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्होंने शिक्षा गुणवत्ता पर आधारित राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित कार्यशाला में भी अपने विद्यालय की उपस्थिति दर्ज कराई थी।
परीक्षाओं की तैयारी के विषय में चर्चा करते हुए ललिता ने बताया कि परीक्षाओं के समय बच्चों पर काफी मानसिक दबाव रहता है। ऐसे में उन्हें शांत दिमाग से खासतौर से लिखने का अभ्यास करना चाहिए। लिखने का अभ्यास नहीं होने की वजह से ही छात्र पढ़ा हुआ प्रश्न भी परीक्षा कक्ष में ठीक तरह से हल नहीं कर पाते। अभिभावकों को भी चाहिए कि वह बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं। उन्हें घर में पढाई वाला माहौल प्रदान करें।
आज के दौर में समाज की भी परीक्षाओं के समय दायित्व बनता है कि वह देर रात या दिन में भी विभिन्न कार्यक्रमों के नाम पर डीजे या अन्य ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले यंत्रों का बेहद सीमित उपयोग करें।
बल्गी में हर साल उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम आने की पीछे का कारण बताते हुए ललिता ने बताया कि हम अपने विद्यालय में साल भर बच्चों को तैयार करते हैं। बीच-बीच में बच्चों को मोटिवेट करने के लिए अलग-अलग क्षेत्र के सफल लोगों को बुलाकर उन्हें क्लास लेने को कहते हैं।
ताकि बच्चों में ऐसी भावना आए कि हमें भी सफल होना है। इसके अलावा विज्ञान कांग्रेस व अन्य गतिविधियां प्राथमिकता से करवाई जाती है। बोर्ड परीक्षा शुरू होने के पहले हम एन वक्त तक हम बच्चों को स्कूल बुलाकर उन्हें अपनी निगरानी में रिवीजन करवाते हैं। बच्चों की सफलता के पीछे शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। उन्हें पूरी तरह से समर्पित होना पड़ेगा।