कोरबा

इस अस्पताल में दवाओं के रिकार्ड कम्प्यूटराइज्ड नहीं होने से एक्सपायरी डेट की तुरंत नहीं मिल पाती जानकारी

सार्वजनिक क्षेत्र व सरकारी अस्पतालों में दवाओं के एक्सपायर होने के पहले इस्तेमाल में लाने का एक सिस्टम होता है।

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Aug 24, 2018
इस अस्पताल में दवाओं के रिकार्ड कम्प्यूटराइज्ड नहीं होने से एक्सपायरी डेट की तुरंत नहीं मिल पाती जानकारी

कोरबा. सीएसईबी के एचटीपीएस वेस्ट के दर्री स्थित 60 बेड अस्पताल में लाखों की दवाएं एक्पायर होने के खुलासे के बाद हड़कंप मचा है। इस मामले में एक और चौंकाने वाला तथ्य प्रकाश में यह आया है कि अस्पताल में दवाओं के रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए मध्यप्रदेश शासन काल के बड़े-बड़े रजिस्टरों का उपयोग किया जाता है जबकि वर्तमान में अस्पतालों में दवाओं के रिकॉर्ड मेंटेन करने कम्प्यूटर का उपयोग हो रहा है।

सीएसईबी के इस अस्पताल में दवाओं का रिकॉर्ड कम्प्यूटराइज्ड नहीं होने के कारण कौन सी दवा की एक्सपायरी डेट की जानकारी तुरंत नहीं मिल पाती। जजिस्टर खंगालने के बाद ही दवाओं के स्थिति का पता चलता है। सार्वजनिक क्षेत्र व सरकारी अस्पतालों में दवाओं के एक्सपायर होने के पहले इस्तेमाल में लाने का एक सिस्टम होता है।

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इसके अनुसार अस्पताल के सभी डॉक्टर्स को हर हफ्ते आने वाले दो से तीन महीने में जो दवाएं एक्सपायर होने वाली हैं। उसकी सूची प्रदान की जाती है। सीएसईबी वेस्ट के स्टोर से मिली जानकारी के अनुसार आगामी दो तीन महीनों में ५२ हजार १२० दवाएं की एक्सपायर डेट है लेकिन अस्पताल प्रबंधन इसकी रणनीति नहीं बना पाया है।

साल भर में एक ही बार दवाओं की खरीदी
सूत्र बताते हैं कि सीएसईबी के अस्पतालों में दवा खरीदी की आड़ में बड़ा खेल चलता है। आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी गई है कि जरूरत से अधिक दवाओं की खरीदी साल में एक ही बार हो जाती है। तीन खेप में अस्पताल में पहुंचायी जाती है। इसमें से ८० प्रतिशत खरीदी सेन्ट्रल स्तर पर तो महज 20 प्रतिशत खरीदी स्थनीय स्तर पर होती है। एक तरफ कर्मचारी दवाओं की कमी से जूझते रहते हैं। तो दूसरी तरफ लाखों की दवाओं स्टोर में पड़े-पड़े ही एक्पायर हो जाती है।

कई बार कम्प्यूटराइज्ड करने की मांग रखी
इस संबंध में कर्मचारी संगठन जनता यूनियन के प्रांतीय सचिव का कहना है कि वेस्ट अस्पताल में दवाओं के रिकॉर्ड कम्प्यूटराइज्ड नहीं है। जिससे दवा कब एक्पायर हो जाती है, चिकित्सकों को भी इसकी भनक नहीं लगती है। इस बात को लेकर अस्पताल प्रबंधन से कई बार हमारी बहस भी हो चुकी है।

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Published on:
24 Aug 2018 11:38 am
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