
छत्तीसगढ़ में 441 से अधिक सरकारी काम घर बैठे ( Photo - Patrika )
Ration Card New Update: अब राशनकार्ड बनवाने या उसमें किसी सदस्य का नाम जोडऩे-हटाने की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। राज्य सरकार ने राशनकार्ड से जुड़ी सभी सेवाओं को ऑनलाइन करने का निर्णय किया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) ने सेवा सेतु पोर्टल डिजाइन किया है। इस पोर्टल के माध्यम से लोग घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से आवेदन कर सकेंगे।
नए राशनकार्ड के आवेदन से लेकर संशोधन तक की पूरी प्रक्रिया अब सेवा सेतु पोर्टल के जरिए ही पूर्ण की जाएगी। ( Chhattisgarh News ) इससे लोगों को नगर निगम, जनपद पंचायत या जिला कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह प्रक्रिया लोक सेवा केंद्रों, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में भी पूरी की जा सकेगी। अब तक राशनकार्ड के लिए आवेदन ऑफलाइन किए जाते थे, जिससे काफी समय लगता था और परेशानी होती थी।
छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। नया राशन कार्ड बनवाने के लिए लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती थी। रियायती दर पर मिलने वाला चावल गरीबों के लिए एक बड़ी सुविधा है, इसलिए राशन कार्ड की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। अब इस समस्या के समाधान के लिए एक नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है।
इस नई प्रणाली से राशन कार्ड बनवाने की पूरी प्रक्रिया सरल और सुगम हो जाएगी। आवेदक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और अपने आवेदन की स्थिति भी आसानी से ट्रैक कर पाएंगे। राशन कार्ड स्वीकृत होने के बाद उसकी पीडीएफ $फाइल पोर्टल पर उपलब्ध होगी, जिसे हितग्राही अपने घर से ही डाउनलोड कर सकेंगे या किसी लोक सेवा केंद्र से उसका प्रिंट निकलवा सकेंगे। इस पहल से लोगों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
बीपीएल वर्ग के राशन कार्डधारक हितग्राहियों को सरकार प्रति राशन कार्ड 35 किलो चावल प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त शक्कर और चने का वितरण भी किया जाता है। हालांकि, कई बार आवंटन नहीं मिलने के कारण चना और शक्कर का वितरण अटक जाता है। फिर भी इस कार्ड से मिलने वाला चावल से लोगों के लिए बड़ी राहत होती है। कई बार परिवारों के बंटने पर नए राशन कार्ड की आवश्यकता पड़ती है। किसी परिजन के जन्म या मृत्यु होने पर भी राशन कार्ड में नाम जुड़वाना या हटाना पड़ता है। इसके लिए लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटते रहते हैं, इससे परेशानी होती है।
कोरबा जिले में राशन कार्डधारियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। लोग सबसे अधिक गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले कार्ड बनवा रहे हैं। इसके लिए जुगाड़ लगा रहे हैं। कार्ड बनाने में दलालों का गिरोह भी सक्रिय है जो कार्ड बनाने की गारंटी देता है और बदले में दो से तीन हजार रुपए तक लेता है।
यह गिरोह इतना सक्रिय है कि पैसे देने के एक महीने में ही कार्ड बनाकर जारी करा देता है। कोरबा जिले में सबसे अधिक बीपीएल कार्ड बनवाने वालों में वे लोग भी शामिल हैं जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं। खाद्य सुरक्षा स्कीम के तहत ऐसे लोग बीपीएल कार्ड की पात्रता नहीं रखते, बावजूद इसके लोग बीपीएल कार्ड बनाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।
सरकारी राशन कार्ड बनवाने या उसमें संशोधन कराने के लिए कई दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। परिवार के मुखिया और सभी सदस्यों का आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र (जैसे बिजली बिल, मतदाता पहचानपत्र या सरपंच/पार्षद का प्रमाण पत्र), मुखिया का बैंक खाता विवरण, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो जमा करना होगा।
पात्रता के आधार पर विभिन्न प्रकार के राशन कार्ड जारी किए जाते हैं। अत्यंत गरीब परिवार, विशेष पिछड़ी जनजातियां, भूमिहीन मजदूर, विधवा और अनाथ बच्चों को अंत्योदय कार्ड मिलता है। बीपीएल परिवारों को प्राथमिकता कार्ड दिया जाता है। बेसहारा वृद्ध, विधवा और परित्यक्ता को निराश्रित कार्ड और दिव्यांगजनों को निशक्तजन कार्ड जारी किया जाता है। अन्य पात्र परिवारों को एपीएल कार्ड प्रदान किया जाता है।
जिला खाद्य अधिकारी धनध्याम कंवर ने बताया कि राशनकार्ड से जुड़े मामलों के निपटारे की समय सीमा लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत 30 दिन निर्धारित है। आवेदन प्राप्त होने के बाद नगरीय क्षेत्रों में संबंधित अधिकारी निर्धारित समय में निर्णय करेंगे। इस प्रक्रिया के ऑनलाइन होने से राशन कार्ड बनाने के कार्य में तेजी आएगी। इससे लोगों को कार्यालयों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी।
Updated on:
08 Jun 2026 04:07 pm
Published on:
08 Jun 2026 03:26 pm
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