मिशन इन्द्र धनुष के तहत बच्चों को डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, पोलियो, खसरा, हेपेटाइटिस बी आदि से मुकाबला करने के लिए टीकाकरण किया जा रहा है
कोरबा. टीकाकरण के जरिए सभी बच्चों को सुरक्षा कवच देने में जुटे स्वास्थ्य विभाग नेशनल हेल्थ सर्वे के खुलासे परेशान कर रहे हैं। सर्वे का दावा है कि जन्म के बाद ढाई फीसदी बच्चे को कोई टीका नहीं लगा है। पोलियो की दवा भी सभी बच्चों तक नहीं पहुंची है। दो साल से कम उम्र के सभी बच्चों को टीकाकरण करने के लिए केन्द्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना इन्द्र धनुष कोरबा जिले में चल रहा है। विभाग का दावा है कि इस योजना के जरिए टीकाकरण के सौ फीसदी लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा। दो साल से कम उम्र का एक भी बच्चा टीकाकरण से नहीं छूटेगा।
गर्भवती माताओं को भी जरूरी टीके लगाए जाएंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने ८५६ बच्चों और २३९ गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया है। ेये बच्चें २८८ गांव मेें रहते हैं। इस विशेष अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने १४० टीमों को गठन किया गया है। इसमें बहुउद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के साथ आंगनबाड़ी के कार्यकर्ता और सहायिका को भी शामिल किया गया था। मिशन इन्द्र धनुष के तहत बच्चों को डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, पोलियो, खसरा, बचपन में होने वाली तपेदिक, हेपेटाइटिस बी आदि से मुकाबला करने के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। मिशन इन्द्रधनुष केन्द्र सरकार की सहायता से देशभर के पिछड़े जिलों में चलाई जा रही है। इसमें कोरबा भी शामिल है। हालांकि छत्तीसगढ़ सरकार ने मिशन इन्द्रधनुष को पूरे प्रदेश में लागू किया है।
नेशनल हेल्थ सर्वे में खुलासा
चार साल पहले स्वास्थ्य विभाग ने नेशनल हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट जारी की थी। इसमें कई चौकाने वाले खुलासे हुए थे। इसमें बताया गया था कि कोरबा जिले में ढाई फीसदी बच्चों को एक भी वैक्सिन नहीं लगी। सघन पल्स पोलिया अभियान के बाद भी ८८.७ फीसदी को पोलियो की दवा पिलाई गई। इसमें ९७.८ फीसदी बच्चे शहर के थे। गंाव में रहने वाले ८४.३ फीसदी को पोलियो की दवा दी गई थी। २७.३ फीसदी बच्चों विटामिन ए की खुराक से छूट गए थे।
जिले में ७२.७ फीसदी बच्चों को भी विटामिन ए की दवा दी गई थी। डीपीटी का टीका ६९ फीसदी बच्चों को ही लगा था। नेशनल हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट २०१३ में जारी की गई थी। इसमें खुलासा हुआ था कि टीकाकरण ९० फीसदी तक नहीं पहुंचा है। स्वास्थ्य विभाग के सर्वे ने स्थानीय प्रशासन के दावे की पोल खोल दी थी। इसके बाद परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय ने कोरबा जिले पर निगरानी बढ़ा दी थी।
-सभी बच्चों का टीकाकरण हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। टीकाकरण के सौ फीसदी लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है- पदमाकर शिंदे, कार्यक्रम प्रबंधक, एनआरएचएम