कोरबा

प्राकृतिक अजूबा: एक पेड़ की जड़ों से निकल रहा अनवरत पानी, ग्रामीण वर्षो ंसे कर रहे उपयोग

कोरबा. कोरबा जिले के कोरकोमा गांव में एक पेड़ किसी प्राकृतिक अजूबे से कम नहीं है। इस पेड़ की जड़ों से एक सदी से भी अधिक समय से अनवरत पानी निकल रहा है। यह पानी इतना शुद्ध है कि बिना छाने या उबाले ग्रामीण इसका लंबे समय से उपयोग कर रहे हैं।

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May 28, 2023
आसपास के तालाब और स्टॉपडेम सूखने के कगार पर, लेकिन कम नहीं हुई पेड़ से पानी की धार

एक तरफ जहां गर्मी से इसी गांव में एक तालाब सूखने के कगार पर है। स्टॉपडेप भी कई साल से सूखा पड़ा है। तो वहीं स्टॉपडेम से लगे अर्जुन के पेड़ से निकल रही पानी की धार कभी कम नहीं हो रही है। इस प्राकृतिक जलस्त्रोत से करीब एक सदी से भी अधिक समय से गांव के एक बड़ी आबादी की प्यास बुझ रही है। पेड़ के जड़ में पाइप लगाया गया है और तीन अलग-अलग जगहों पर पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। गांव के राठिया मोहल्ले से निकली इस जल धारा पर ग्रामीणों ने मंदिर भी बनवा दिया है। लोग नहाने के बाद यहां पर पूजा अर्चना भी करते हैं। ग्रामीण इस पानी का उपयोग पूजन कार्यों के लिए भी करते हैं। इसे लोगों ने तुर्री पानी का नाम दिया है।

आसपास कोई नदी या नाला भी नहीं
पेड़ के आसपास कोई नदी या नाला भी नहीं है। ग्रामीणों ने जब देखा कि पेड़ की जड़ से अनवरत पानी बह रहा है तो पानी निकलने वाले तीन जगहों पर पाइप लगा दिया गया। ताकि पानी का उपयोग बेहतर ढंग से किया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि कोरकोमा के वनों में तुर्री व छोटे-छोटे कई जल स्त्रोत हैं। इनसे किसान सीमित तादाद में सब्जी की खेती करते है।

० एक मात्र तालाब उपयोग योग्य नहीं
कोरकोमा में एक ओर यह प्राकृतिक जलस्त्रोत बह रहा है। वही आसपास के तालाब और कुएं सूख गए है। लगातार दो साल से तालाब पर करीब १५ लाख से अधिक खर्च किया जा चुका है, लेकिन हर बार तालाब सूख जा रहा है। बारिश के पानी से तालाब पूरा भर भी नहींं पाता।


जड़ को जितना ज्यादा पानी उतनी लंबी आयु
बॉटनी के प्रोफेसर प्रतीक कुमार का कहना है कि इस पेड़ की प्रकृति पानी के लिए अनुकूल होती है। इसकी जड़ों को जितना ज्यादा पानी मिलता है, यह उतनी लंबी आयु तक विकसित होता जाता है। चूंकि पानी का स्त्रोत जड़ के नीचे से ही है, इसलिए यह उसके लिए ज्यादा लाभकारी है। जिन स्थानों पर यह पेड़ उग आता है, जमीन के नीचे या उपर पानी के स्त्रोत भी होते है। यह वृक्ष औसतन १०० से १२० साल तक जीवित रहते हंै।

वर्जन
कई पीढिय़ों से गांव के लोग देखते आ रहे हैं कि पेड़ की जड़ों से पानी लगातार निकल रहा है। गांव वाले इस पानी का उपयोग हर कार्यों के लिए करते हैं। यहां पर मंदिर का निर्माण भी कराया गया है, जहां पूजा अर्चना भी की जाती है।
रूपेश्वरी राठिया, सरपंच, ग्राम कोरकोमा

Published on:
28 May 2023 12:12 pm
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