कोरबा. विधानसभा चुनाव के परिणाम अगले रविवार को सामने आ जाएंगे। रुमगरा एयर स्ट्रिप में हवाई सेवा शुरू करने को लेकर कराए गए सर्वे रिपोर्ट वर्तमान सरकार के पास पहुंचे कई महीने बीत चुके हैं,लेकिन अब तक इस पर निर्णय नहीं हो सका है। सर्वे में यह स्पष्ट हो चुका है कि लैंडिंग और टेकऑफ एक ही ओर से हो सकेगा।
विमान सतरेंगा-अजगरबहार की ओर से लैंड करेंगे और उड़ेंगे। रिपोर्ट में चिमनी और फुटका पहाड़ को लेकर जो अड़चन बताई गई है उसकी वजह से मामला अटका हुआ है। पिछले साल सितंबर महीने में ही पीडब्ल्यूडी ने दिल्ली की कंपनी जीओएड कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड से सर्वे कराया गया था। कंपनी के सदस्य करीब एक सप्ताह तक कोरबा में थे।
व्यापक तौर पर सर्वे कर रिपोर्ट विभाग को सौंपी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि ऊंची चिमनी और एक तरफ पहाड़ की वजह से विमान की लैंडिंग और टेकऑफ सिर्फ सतरेंगा-अजगरबहार की ओर से ही हो सकेगा। बहुत कम शहरों में ही ऐसे विमानतल है जहां एक ही ओर से विमान लैंडिंग और टेकऑफ करते हैं।
इसमें कई तरह की तकनीकी समस्या भी आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में अधिक सीटर वाले विमान और विमानों की संख्या अधिक नहीं बढ़ाई जा सकती है। इसी वजह से मामला अटका हुआ है। नई सरकार से लोगों का कहना है कि कोरबा में हवाई सेवा जल्द शुरू हो, जितनी भी तकनीकी समस्या है, उसे दूर कर सुविधा दिलाई जाए।
अभी बिलासपुर और रायपुर जाने की होड़
अभी हवाई मार्ग से जाने के लिए लोगों को सबसे अधिक रायपुर का फेरा लगाना पड़ रहा है। स्थिति ये है कि जितने का हवाई सफर का किराया दिल्ली व मुंबई तक का लग रहा है उतना खर्च रायपुर से आने जाने में हो रहा है। बिलासपुर में सीमित विमान की वजह से लोगों को बहुत अधिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
2011 के बाद से नहीं उड़े पैसेंजर एयरक्राफ्ट
करीब ११ साल पहले वर्ष 2011 में व्यवसायिक एयरक्राफ्ट रुमगरा से शुरु किया गया था। पैसेंजर नहीं मिलने से चंद दिनों में बंद हो गई थी। छत्तीसगढ़ एविएशन एकेडमी ने इसकी शुरुआत की थी। पांच सीटर पैसेंजर एयरक्राफ्ट रायपुर के लिए उड़ान भी भरी थी। महंगा किराया और पैसेंजर नहीं मिलने की वजह से कंपनी ने घाटे के कारण उड़ानें बंद कर दी।
अभी 1200 मीटर, 2500 मीटर रनवे बढ़ानेे की रिपोर्ट
वर्तमान में रूमगरा हवाई पट्टी की लंबाई 1200 मीटर है। सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हवाई पट्टी को 2500 मीटर करने की जरुरत पड़ेगी। तब जाकर बड़े विमान इस हवाइपट्टी में उतर सकेगी। इसके लिए आसपास के कई गांव व वन क्षेत्र की जमीन अधिग्रहण करने की जरुरत पड़ेगी।
हवाई सेवा ऊर्जाधानी की सबसे बड़ी जरूरत
एसईसीएल की कोयला खदानें, बालको, एनटीपीसी, लैंको, उत्पादन कंपनी समेत कई छोटे-बड़े उद्योग जिले में संचालित है। वहीं आम लोगों को व्यापार, पढ़ाई व इलाज के लिए भी बड़े शहर जाना लगा रहता है। इस वजह से हवाई सेवा को जल्द से जल्द शुुरु करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।